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बाबा के आंगन में सजेगी शाम, दुनिया भर में छाएगा काशी विश्वनाथ धाम
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काशीपुराधिपति के आंगन में बाबा के भक्तों के लिए हर रोज शाम सजाई जाएगी। काशी विश्वनाथ धाम में देशभर के कलाकार शीश नवाने के साथ ही शिव लीला भक्तों को सुनाएंगे। स्थानीय कलाकार भी बाबा के समक्ष हर दिन अपनी प्रस्तुति समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों विश्वनाथ कॉरिडोर भक्तों को समर्पित होने के बाद आयोजन शुरू हो जाएंगे।
श्री काशी विश्वनाथ धाम के मंदिर चौक को सांस्कृतिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। इसमें अनवरत देश के नामचीन कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार भी बाबा के चरणों में स्वरांजलि अर्पित करेंगे। धार्मिक, सांस्कृतिक और कलात्मक आयोजनों की वृहद शृंखला देश भर के श्रद्धालुओं को प्राचीन के साथ नवीन काशी का अहसास कराएगी। बाबा के भक्तों के लिए खास सुविधाओं को भी धाम में तैयार किया है। मंदिर चौक के पास बनाई गई गंगा व्यूइंग गैलरी से बाबा विश्वनाथ की आराधना में भक्त जान्हवी को साक्षी मान सकेंगे। यहां से एक तरफ गंगा और दूसरी तरफ काशी विश्वनाथ के दर्शन होंगे। मंदिर परिसर के चारों मुख्य द्वार पर भी शिव के रूपों के दर्शन कर पाएंगे। दरअसल, काशी विश्वनाथ में तैयार भवन अब भक्तों को गंगा स्नान से महादेव के दर्शन तक और उसके बाद भी सुविधाओं का अहसास कराएंगे।
विशेष मौकों पर नहीं लगेगी सड़क पर कतार
सावन सहित विशेष मौकों पर अब बाबा के भक्तों की कतार शहर की सड़कों पर नहीं दिखाई देगी। काशी विश्वनाथ धाम परिसर में बने मंदिर चौक और यात्री सुविधा केंद्रों में हजारों भक्त एक साथ शामिल हो सकते हैं। लोकार्पण के बाद कुंभ का पलट प्रवाह और उसके बाद महाशिवरात्रि पर मंदिर प्रशासन की पहली परीक्षा होगी। अब तक की व्यवस्था में विशेष अवसरों पर लक्सा और मैदागिन तक लंबी कतार लगती रही है।
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धाम परिसर में भक्त कर सकेेंगे विश्राम
काशी विश्वनाथ धाम में आने वाले भक्तों को दर्शन पूजन के अलावा फूड कोर्ट, पुस्तकालय सहित अन्य सुविधाएं मिलेंगी। श्रद्धालुओं के लिए 18 कमरों का अतिथि गृह भी बनाया गया है। मंगला आरती में शामिल होने वाले भक्त यहां रात्रि विश्राम कर ब्रह्म मुहूर्त में आसानी से दर्शन कर सकेंगे। इसके साथ ही दो डोरमेट्री में भी 30 से ज्यादा भक्तों को ठहरने की व्यवस्था होगी।
गैलरी में सहेजी गईं महादेव की स्मृतियां
काशी विश्वनाथ धाम में संग्रहालय भी बनाया गया है। इसमें सिटी गैलरी में वाराणसी की ऐतिहासिक धरोहरों को जगह दी जाएगी। जबकि वाराणसी गैलरी में अधिग्रहीत भवनों की चाबी, ऐतिहासिक व विशेष मूर्तियां जिन्हें खंडित होने के कारण स्थापित नहीं किया गया और पुराने भवनों के दरवाजे खिड़कियां आदि को सहेजा जाएगा। इसमें काशी विश्वनाथ मंदिर से काशी विश्वनाथ धाम तक की पूरी कहानी भी होगी।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम के मंदिर चौक को सांस्कृतिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। इसमें अनवरत देश के नामचीन कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार भी बाबा के चरणों में स्वरांजलि अर्पित करेंगे। धार्मिक, सांस्कृतिक और कलात्मक आयोजनों की वृहद शृंखला देश भर के श्रद्धालुओं को प्राचीन के साथ नवीन काशी का अहसास कराएगी। बाबा के भक्तों के लिए खास सुविधाओं को भी धाम में तैयार किया है। मंदिर चौक के पास बनाई गई गंगा व्यूइंग गैलरी से बाबा विश्वनाथ की आराधना में भक्त जान्हवी को साक्षी मान सकेंगे। यहां से एक तरफ गंगा और दूसरी तरफ काशी विश्वनाथ के दर्शन होंगे। मंदिर परिसर के चारों मुख्य द्वार पर भी शिव के रूपों के दर्शन कर पाएंगे। दरअसल, काशी विश्वनाथ में तैयार भवन अब भक्तों को गंगा स्नान से महादेव के दर्शन तक और उसके बाद भी सुविधाओं का अहसास कराएंगे।
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विशेष मौकों पर नहीं लगेगी सड़क पर कतार
सावन सहित विशेष मौकों पर अब बाबा के भक्तों की कतार शहर की सड़कों पर नहीं दिखाई देगी। काशी विश्वनाथ धाम परिसर में बने मंदिर चौक और यात्री सुविधा केंद्रों में हजारों भक्त एक साथ शामिल हो सकते हैं। लोकार्पण के बाद कुंभ का पलट प्रवाह और उसके बाद महाशिवरात्रि पर मंदिर प्रशासन की पहली परीक्षा होगी। अब तक की व्यवस्था में विशेष अवसरों पर लक्सा और मैदागिन तक लंबी कतार लगती रही है।
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धाम परिसर में भक्त कर सकेेंगे विश्राम
काशी विश्वनाथ धाम में आने वाले भक्तों को दर्शन पूजन के अलावा फूड कोर्ट, पुस्तकालय सहित अन्य सुविधाएं मिलेंगी। श्रद्धालुओं के लिए 18 कमरों का अतिथि गृह भी बनाया गया है। मंगला आरती में शामिल होने वाले भक्त यहां रात्रि विश्राम कर ब्रह्म मुहूर्त में आसानी से दर्शन कर सकेंगे। इसके साथ ही दो डोरमेट्री में भी 30 से ज्यादा भक्तों को ठहरने की व्यवस्था होगी।
गैलरी में सहेजी गईं महादेव की स्मृतियां
काशी विश्वनाथ धाम में संग्रहालय भी बनाया गया है। इसमें सिटी गैलरी में वाराणसी की ऐतिहासिक धरोहरों को जगह दी जाएगी। जबकि वाराणसी गैलरी में अधिग्रहीत भवनों की चाबी, ऐतिहासिक व विशेष मूर्तियां जिन्हें खंडित होने के कारण स्थापित नहीं किया गया और पुराने भवनों के दरवाजे खिड़कियां आदि को सहेजा जाएगा। इसमें काशी विश्वनाथ मंदिर से काशी विश्वनाथ धाम तक की पूरी कहानी भी होगी।