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भक्तों के दुख दूर करने के लिए धरती पर अवतार लेते हैं भगवान
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बुधवार को धर्मसंघ स्थित मणि मंदिर के प्रांगण प्रवचन देते कथावाचक संत मुरलीधर महाराज
जोधपुर से पधारे कथावाचक संत मुरलीधर महाराज ने कहा कि सगुण साकार निर्गुण निराकार परमात्मा में विशेष अंतर नहीं है, इन दोनों के स्वरूप में उतना ही अंतर है जितना पानी और बर्फ में होता है। दोनों का गुण व धर्म समान है केवल स्वरूप अलग है, मनुष्य भ्रम वश दोनों को अलग अलग समझता है। भगवान अपने भक्तों के कष्ट को हरने के लिए मनुज रूप में इस धरा पर अवतार लेते हैं।
बृहस्पतिवार को दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ मणि मंदिर में चल रहे 115वें करपात्र प्राकट्योत्सव पर आयोजित श्रीराम कथा के छठवें दिन मुरलीधर महाराज ने कहा कि भगवान इस धरती पर सिर्फ राक्षसों का संहार करने नहीं बल्कि भक्तों के दुख को दूर करने के लिए अवतरित होते हैं। जब-जब इस धरा पर गौ, ब्राह्मण, संत और भक्तों पर अत्याचार हुआ तब भगवान स्वयं सगुण साकार रूप में धरती पर अवतरित हुए हैं।
वर्तमान में गौ माता की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए मुरलीधर महाराज ने कहा कि बड़े ही लज्जा का विषय है कि ऋषि और मुनियों के इस देश में हम अपने स्वार्थवश मां के समान गाय को घर से बाहर निकालकर आवारा पशु बना दिए हैं। गौशाला गायों को बचाने का साधन कभी नहीं हो सकती, यदि गायों का संरक्षण करना है तो उन्हें घर में ही पालना होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मानव के लिए खाद्य सुरक्षा कानून है उसी प्रकार गायों के भरण-पोषण के लिए कानून बनाया जाए तथा गाय को राष्ट्रमाता घोषित कर उसके संरक्षण व संवर्धन का प्रयास करना चाहिए।
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धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि गांव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। कथा का शुभारंभ व्यास पीठ के पूजन से हुआ। इस दौरान पंडित जगजीतन पांडेय, राम गोपालानंद महाराज, विजय मोदी, राजमंगल पांडेय मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ मणि मंदिर में चल रहे 115वें करपात्र प्राकट्योत्सव पर आयोजित श्रीराम कथा के छठवें दिन मुरलीधर महाराज ने कहा कि भगवान इस धरती पर सिर्फ राक्षसों का संहार करने नहीं बल्कि भक्तों के दुख को दूर करने के लिए अवतरित होते हैं। जब-जब इस धरा पर गौ, ब्राह्मण, संत और भक्तों पर अत्याचार हुआ तब भगवान स्वयं सगुण साकार रूप में धरती पर अवतरित हुए हैं।
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वर्तमान में गौ माता की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए मुरलीधर महाराज ने कहा कि बड़े ही लज्जा का विषय है कि ऋषि और मुनियों के इस देश में हम अपने स्वार्थवश मां के समान गाय को घर से बाहर निकालकर आवारा पशु बना दिए हैं। गौशाला गायों को बचाने का साधन कभी नहीं हो सकती, यदि गायों का संरक्षण करना है तो उन्हें घर में ही पालना होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मानव के लिए खाद्य सुरक्षा कानून है उसी प्रकार गायों के भरण-पोषण के लिए कानून बनाया जाए तथा गाय को राष्ट्रमाता घोषित कर उसके संरक्षण व संवर्धन का प्रयास करना चाहिए।
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धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि गांव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। कथा का शुभारंभ व्यास पीठ के पूजन से हुआ। इस दौरान पंडित जगजीतन पांडेय, राम गोपालानंद महाराज, विजय मोदी, राजमंगल पांडेय मौजूद रहे।