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नाम कटवाने के बाद भी विभाग ने लगा दी ड्यूटी

Mon, 07 Jun 2021 01:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jun 2021 01:51 AM IST
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Even after the name was cut, the department imposed duty
सेवापुरी ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय मटुका की सहायक अध्यापक रही सुनीता देवी (45) का पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित होने से 22 अप्रैल को निधन हो गया। आज उनके घर के हालात बहुत बदल चुके हैं, घर में मातम छाया हुआ है। पति दिनेश मां के साथ पिता की जिम्मेदारी पूरी कर रहे है।
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सुनीता के पति दिनेश बड़ागांव ब्लॉक में शिक्षक हैं। वह बताते हैं पत्नी की तबीयत खराब थी। इसलिए मैंने ड्यूटी कटवाने के लिए सरकार द्वारा पति पत्नी दोनों के शिक्षक होने पर किसी एक की ड्यूटी लगाने के आदेश की कटिंग लेकर मुख्य विकास अधिकारी के पास गया। उस वक्त तो विभाग ने पत्नी की ड्यूटी काट दी। लेकिन 16 अप्रैल को फिर से ड्यूटी लगा दी गई। तबीयत खराब होते हुए भी 18 अप्रैल को पोलिंग पार्टी के साथ पिंडरा ब्लाक के मतदान केंद्र पर जाना पड़ा। मतदान केंद्र पर रात होते-होते उनकी तबीयत बिगड़ी तो वह पास में स्थित मायके चली गई। 19 को चुनाव ड्यूटी करते हुए शाम को उनकी तबीयत फिर खराब होने लगी। उन्होंने अधिकारियों से छुट्टी की प्रार्थना की, लेकिन अधिकारियों ने मतपेटी जमा करने की बात कहकर उनको अनसुना कर दिया। वापस आते हुए जब उनकी हालत ज्यादा खराब होने लगी तो उसने बाबतपुर में उतरकर पेड़ के नीचे बैठकर मुझे फोन किया। जिसके बाद मैंने अपनी मतपेटी जमा कर उनके पास पहुंचा और घर ले आया। वापस आते हुए रात काफी हो गई थी, जिसके चलते हम 20 अप्रैल की सुबह उन्हें लेकर डॉक्टर के पास गए। डॉक्टर की दवा देने के बाद उन्हें आराम हो गया था। लेकिन शाम से फिर तबीयत बिगड़ने लगी। 21 अप्रैल को बनारस के कई अस्पतालों में कोशिश की उन्हें भर्ती करा दूं, लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार हम उन्हें लेकर भदोही के एक निजी अस्पताल गए। वहां भी काफी मिन्नत करने पर किसी तरह भर्ती किया गया। आधे घंटे बाद ही उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने लगी। किसी तरह ऑक्सीजन की व्यवस्था हुई। उसके बाद भी डॉक्टर ने कहा कि संक्रमण ज्यादा फैल चुका है इन्हें आईसीयू में भर्ती करना होगा । जिसके बाद डॉक्टर ने कुछ दवाइयां लेने के लिए भेज दिया। आईसीयू के बाहर पहुंचते ही बिटिया ने पत्नी की मृत्यु की सूचना दी।
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मृतक आश्रित के तहत मैंने बेटे के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग ने यह कहकर मना कर दिया की पति पत्नी दोनों के शिक्षक होने पर नौकरी नहीं मिल सकती। मैं रजिस्टर्ड डाक से अपने बड़े बेटे के लिए फिर से आवेदन करूंगा। - दिनेश विश्वकर्मा, सुनीता देवी के पति
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