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पांच सौ करोड़ खर्च फिर भी पाइपलाइन तक नहीं पहुंचा सीवर
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असि नदी को सीवेज मुक्त कराने के लिए पांच सौ करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी स्थितियां जस की तस हैं। नदी में गिर रहे सीवेज को ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाने के लिए पाइप लाइन बिछाने में मानकों का जमकर उल्लंघन किया गया है। असि नदी मुक्ति अभियान के संयोजक ने इस गड़बड़ी की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री, जलशक्ति मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय से की। साथ ही पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है।
संयोजक कपींद्र तिवारी ने बताया कि जायका ने पांच सौ करोड़ की लागत से असि नदी में गिरने वाले सीवेज को नदी किनारे पाइपलाइन से नगवां पंपिंग स्टेशन और वहां से रमना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाने की योजना शुरू की थी। इसका ठेका ईएमएस कंपनी को दिया गया था। कंपनी ने काम की शुरुआत की तो उसकी गुणवत्ता मानकों के विपरीत थी। इसकी शिकायत जल निगम के तत्कालीन जीएम से की। इस मामले में नदी विशेषज्ञ प्रो. यूके चौधरी से भी बात की गई। जल निगम के जीएम कार्य की गुणवत्ता में कोई भी खामी मानने को तैयार नहीं थे।
प्रो. यूके चौधरी ने मौके पर मुआयना किया और बताया कि गुणवत्ता खराब है। इसके बाद विशेषज्ञों की मीटिंग बुलाई गई, जिसमें भूगर्भ शास्त्री प्रो. जीएस यादव, आईआईटी सिविल के प्रो. देवेंद्र मोहन, विधायक रवींद्र जायसवाल शामिल हुए। सभी ने योजना में कई खामियां बताई थीं और कार्य की निगरानी के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाने का सुझाव दिया था। जलनिगम के जीएम ने इस सुझाव को नजरअंदाज कर दिया और इसके बाद मनमाने तरीके से जैसे-तैसे पाइप लाइन डाल दी गई। नतीजा आज सभी के सामने है कि पांच सौ करोड़ खर्च करने के बाद भी असि नदी में गिर रहे सीवर को पाइप लाइन तक नहीं पहुंचाया जा सका है। सीवर ऊपर-ऊपर ही बहाकर नगवां ले जाया जा रहा और वहां पर नदी को पूरी तरह से टैप कर दिया गया है।
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संयोजक कपींद्र तिवारी ने बताया कि जायका ने पांच सौ करोड़ की लागत से असि नदी में गिरने वाले सीवेज को नदी किनारे पाइपलाइन से नगवां पंपिंग स्टेशन और वहां से रमना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाने की योजना शुरू की थी। इसका ठेका ईएमएस कंपनी को दिया गया था। कंपनी ने काम की शुरुआत की तो उसकी गुणवत्ता मानकों के विपरीत थी। इसकी शिकायत जल निगम के तत्कालीन जीएम से की। इस मामले में नदी विशेषज्ञ प्रो. यूके चौधरी से भी बात की गई। जल निगम के जीएम कार्य की गुणवत्ता में कोई भी खामी मानने को तैयार नहीं थे।
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प्रो. यूके चौधरी ने मौके पर मुआयना किया और बताया कि गुणवत्ता खराब है। इसके बाद विशेषज्ञों की मीटिंग बुलाई गई, जिसमें भूगर्भ शास्त्री प्रो. जीएस यादव, आईआईटी सिविल के प्रो. देवेंद्र मोहन, विधायक रवींद्र जायसवाल शामिल हुए। सभी ने योजना में कई खामियां बताई थीं और कार्य की निगरानी के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाने का सुझाव दिया था। जलनिगम के जीएम ने इस सुझाव को नजरअंदाज कर दिया और इसके बाद मनमाने तरीके से जैसे-तैसे पाइप लाइन डाल दी गई। नतीजा आज सभी के सामने है कि पांच सौ करोड़ खर्च करने के बाद भी असि नदी में गिर रहे सीवर को पाइप लाइन तक नहीं पहुंचाया जा सका है। सीवर ऊपर-ऊपर ही बहाकर नगवां ले जाया जा रहा और वहां पर नदी को पूरी तरह से टैप कर दिया गया है।
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