ये कैसी व्यवस्था: ईएसआईसी अस्पताल में 30 दिन में तीसरी बार दवाओं की किल्लत, मरीजों को हो रही परेशानी
वाराणसी में ईएसआईसी अस्पताल में 30 दिन में तीसरी बार दवाओं की किल्लत हुई। ऐसे में घंटों लाइन में खड़े होने के बावजूद दूर- दराज से आए मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं मिलीं।
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ईएसआईसी (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) अस्पताल में 30 दिनों में तीसरी बार दवाओं की शॉर्टेज हो गई। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इससे बीमा और गैर बीमा वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल की फार्मेसी में रोज काम आने वाली दवाओं से लेकर सांस, एलर्जी, कार्डियो समेत कई जरूरी दवाएं नहीं हैं। इससे मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं लेनी पड़ रही हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 1250 मरीज आते हैं। इनमें से 800 मरीजों को इस तरह की समस्या आ रही है। डॉक्टर दवाओं का स्टॉक देखने के बाद ही दवा लिख रहे हैं। काफी देर लाइन में लगे रहने के बाद भी मरीजों के पर्चे पर उपलब्ध नहीं लिखकर छोड़ दिया जाता है।
अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बाद भले ही व्यवस्थाओं को सुधारा जा रहा हो, लेकिन फार्मेसी में अक्सर दवाओं की कमी के कारण व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों का कहना है कि बार-बार इस प्रकार की समस्याएं आ रही हैं, बावजूद इसके दवाओं का पर्याप्त स्टॉक नहीं मंगाया जा रहा है।
बाहर से दवा लेकर कर सकते हैं क्लेम
ईएसआईसी के संयुक्त निदेशक संजय कुमार ने बताया कि बीमित व्यक्ति अपने या अपने परिजनों की दवाएं निजी दुकानों से खरीद कर ईएसआईसी से उसका क्लेम कर सकते हैं। इसके लिए अस्पताल से फॉर्म लेकर भरना होगागा। इसकी शर्त यह है कि उक्त दवा अस्पताल की फार्मेसी में उपलब्ध न हो।
सर्वर डाउन से मरीज परेशान
अस्पताल में दवाओं की कमी के बीच सोमवार को फार्मेसी में सर्वर डाउन रहा। इसके कारण मरीज और भी ज्यादा परेशान रहे। किसी को डॉक्टर ने 4 तो किसी को 3 दवाएं लिखीं। सर्वर की समस्या के कारण मरीजों और उनके परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ा। दोपहर 12 बजे से खराब सर्वर 2 बजे के बाद सही हुआ।
क्या बोले अधिकारी
अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सभी दवाएं मंगाई जा रही हैं। कभी-कभी कुछ दवाओं की शॉर्टेज हो रही है। पूरी कोशिश रहती है कि मरीजों को बिना दवा के न जाना पड़े। -डॉ. प्रशांत, स्टोर इंजार्च