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तेलंगाना और बंगाल में भी इरी धान के बीजों पर करेगा शोध

Tue, 31 May 2022 01:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2022 01:48 AM IST
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Eri will also do research on paddy seeds in Telangana and Bengal
वाराणसी। धान की उपज बढ़ाने के लिए अब अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) बंगाल और तेलंगाना में भी शोध करेगा। अच्छे परिणाम होने पर बीजों को किसानों के बीच पहुंचाया जाएगा।
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इरी के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. कुंतल दास ने बताया कि अधिक धान उत्पादन वाले राज्य यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बाद बंगाल और तेलंगाना को भी शोध के लिए चयनित किया गया। यहां क्षेत्रीय धान की प्रचलित प्रजातियों के अलावा देश की प्रसिद्ध धान की प्रजातियों को शोध के लिए लगाया जाएगा। इस सीजन में पिछले साल 27 प्रजातियों के मुकाबले 32 प्रजाति के धान लगाने की तैयारी है।
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इरी के वैज्ञानिक ने बताया कि पिछले साल के 25 प्रजाति के धान के बीजों पर शोध के बाद बिहार की प्रमुख प्रजाति स्वर्ण समृद्धि का देश के चार राज्यों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला था। अब बंगाल और तेलंगाना में प्रचलित धान के बीजों को इन राज्यों के अलावा यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिसा के ऑन फार्म ट्रायल (ओएफटी) लगाया जाएगा। ताकि किसानों को अधिक उत्पादन और गुणवत्ता वाले बीच मिल सके।
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सुगर फ्री और काला नमक धान की प्रजातियों पर होगा शोध
सिद्धार्थनगर जिले का प्रसिद्ध कालानमक धान की प्रजाति सहित देश के छह राज्यों की करीब 32 प्रजातियों के साथ सुगर फ्री धान की प्रजातियों पर भी शोध की तैयारी है। ताकि किसान अपने क्षेत्र के मौसम और संसाधन अनुकूल उन्नत किस्म के धान के बीज का प्रयोग कर अच्छा उत्पादन कर सकें।
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