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इरी ने बनाया राइस नॉलेज बैंक, यहां से तैयार होंगे भविष्य के कृषि वैज्ञानिक
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चावल की सैकड़ों प्रजातियों की जानकारी अब एक मंच पर मिलेगी। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र चांदपुर में राइस नॉलेज बैंक बनाया गया है। इसकी मदद से कृषि के विद्यार्थी भविष्य के वैज्ञानिक बन सकेंगे। यूपी में इसके विकास के लिए इरी निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह और मुख्य सचिव डॉ. दुर्गा शंकर मिश्रा के साथ चर्चा की।
डॉ. सुधांशु सिंह ने मुख्य सचिव को चावल की कई प्रजातियों के परिणाम जैसे कि कम जीआई वाली लाइंस, अधिक पोषण वाली पारंपरिक धान की प्रजातियों की पहचान और अधिक सुगंध वाली कालानमक चावल की पहचान के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय राइस नॉलेज बैंक के विकास के बारे में परिचर्चा की। इससे कृषि के विद्यार्थी भविष्य के वैज्ञानिक बन सकें। बैंक में देश भर की सैकड़ों प्रजाति की चावल की किस्मों को शामिल किया गया। इसके बारे में कोई भी कहीं से उन्नत किस्म के बीज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेगा।
सरकार के साथ इरी के संबंध मजबूत करने पर जोर
मुख्य सचिव ने सरकार के साथ इरी के संबंध मजबूत करने पर जोर दिया। प्राकृतिक संसाधनों की लगातार कमी और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में किसान समुदाय की समग्र समृद्धि के लिए मिलकर कार्य करने को कहा। उन्होंने इरी को चावल आधारित प्रणालियों में आपूर्ति और मांग के अंतराल को पाटने और अनुसंधान कार्यों को किसानों के खेतों तक ले जाने के लिए वैज्ञानिकों की प्रमुख भूमिकाओं पर जोर दिया। डॉ. सुधांशु ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम करने का आश्वासन दिया।
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डॉ. सुधांशु सिंह ने मुख्य सचिव को चावल की कई प्रजातियों के परिणाम जैसे कि कम जीआई वाली लाइंस, अधिक पोषण वाली पारंपरिक धान की प्रजातियों की पहचान और अधिक सुगंध वाली कालानमक चावल की पहचान के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय राइस नॉलेज बैंक के विकास के बारे में परिचर्चा की। इससे कृषि के विद्यार्थी भविष्य के वैज्ञानिक बन सकें। बैंक में देश भर की सैकड़ों प्रजाति की चावल की किस्मों को शामिल किया गया। इसके बारे में कोई भी कहीं से उन्नत किस्म के बीज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेगा।
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सरकार के साथ इरी के संबंध मजबूत करने पर जोर
मुख्य सचिव ने सरकार के साथ इरी के संबंध मजबूत करने पर जोर दिया। प्राकृतिक संसाधनों की लगातार कमी और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में किसान समुदाय की समग्र समृद्धि के लिए मिलकर कार्य करने को कहा। उन्होंने इरी को चावल आधारित प्रणालियों में आपूर्ति और मांग के अंतराल को पाटने और अनुसंधान कार्यों को किसानों के खेतों तक ले जाने के लिए वैज्ञानिकों की प्रमुख भूमिकाओं पर जोर दिया। डॉ. सुधांशु ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम करने का आश्वासन दिया।
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