Gyanvapi: ज्ञानवापी परिसर में प्रतिबंधित हो मसाजिद कमेटी के पदाधिकारियों का प्रवेश, सुनवाई आज
वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी के मां श्रृंगार गौरी प्रकरण में आज दो मामलों की सुनवाई जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में होगी। एक मामले में संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर को सुरक्षित करने का अनुरोध किया गया है।
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ज्ञानवापी के मां श्रृंगार गौरी प्रकरण की वादिनी राखी सिंह की नई अर्जी पर शुक्रवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सुनवाई होगी। इसमें संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर को सुरक्षित करने का अनुरोध किया गया है। कहा गया है कि अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के लोग आते-जाते रहते हैं। वे हिंदू धर्म से संबंधित साक्ष्य नष्ट कर सकते हैं।
राखी सिंह ने जिला जज की अदालत में अपने अधिवक्ता मान बहादुर सिंह और अनुपम द्विवेदी के जरिये अर्जी देकर कहा कि ज्ञानवापी-मां शृंगार गौरी प्रकरण न्यायालय के समक्ष लंबित है। वाद के विपक्षी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के लोग उक्त परिसर में आते-जाते रहते हैं।
वे वहां मौजूद हिंदू धर्म से संबंधित ऐतिहासिक और अधिवक्ता कमीशन के सर्वे के दौरान परिलक्षित हुए साक्ष्यों को नष्ट कर रहे हैं। जबकि, इस मामले में सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी के शेष परिसर का एएसआई के जरिये वैज्ञानिक विधि से जांच के आदेश अदालत ने 21 जुलाई को दिए हैं।
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परिसर के अंदर मौजूद दरवाजे का ताला बंद
राखी सिंह ने कहा कि उन्हें अपने अधिवक्ता के माध्यम से पता चला कि 24 जुलाई 2023 को सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक ज्ञानवापी परिसर में एएसआई ने सर्वे किया था। उस दिन भी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के लोगों ने परिसर के अंदर मौजूद दरवाजे का ताला बंद रखा था। इसकी चाबी सर्वे टीम को नहीं दी गई। इससे कमेटी के पदाधिकारियों की नियत संदेह के घेरे में है। अगर साक्ष्य नष्ट हो जाएंगे तो मुकदमे के निस्तारण में समस्या व परेशानी होगी। साथ ही उपयुक्त न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंचने में समस्या होगी। इन परिस्थितियों को देखते हुए संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर को सुरक्षित करने की जरूरत है।
मां श्रृंगार गौरी के मूल वाद पर सुनवाई आज, आदेश पर सभी की निगाहें टिकी
जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में शुक्रवार को ज्ञानवापी से संबंधित मां श्रृंगार गौरी के मूल वाद में सुनवाई होनी है। इस मामले में जिला जज ने हिंदू पक्ष की चार महिला वादिनी के आवेदन पर बीते 21 जुलाई को एएसआई को ज्ञानवापी के सील वजूखाने को छोड़कर अन्य हिस्से में सर्वे का आदेश दिया था। सर्वे का काम 24 जुलाई की दोपहर सुप्रीम कोर्ट और फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से स्थगित हो गया था। गुरुवार को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्वे को जारी रखने का आदेश दिया है। इसके अलावा जिला जज की अदालत ने चार अगस्त को एएसआई को सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया था। मगर, सर्वे का काम नहीं हो पाया। ऐसे में शुक्रवार को जिला जज की अदालत के अगले आदेश पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
आदिविश्वेश्वर की तत्काल पूजा-अर्चना के वाद पर सुनवाई कल
श्रावण मास में अधिमास पड़ने की वजह से ज्ञानवापी में मिली शिवलिंग जैसी आकृति की तत्काल पूजा-अर्चना की मांग के लिए सिविल जज सीनियर डिवीजन शिखा यादव की कोर्ट में नया वाद दाखिल किया गया है। यह वाद ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य व आदिविश्वेश्वर डोली रथयात्रा के राष्ट्रीय प्रभारी शैलेंद्र योगीराज सरकार की तरफ से दाखिल किया गया है। अदालत ने वाद को मूलवाद के रूप में पंजीकृत करने के बाद सुनवाई के लिए पांच अगस्त की तिथि नियत कर दी। इस वाद में स्टेट ऑफ यूपी और अन्य को पक्षकर बनाया गया है।
भगवान अविमुक्तेश्वर के मुकदमे की सुनवाई अब 14 अगस्त को
ज्ञानवापी परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक और हिंदू पक्ष के लोगों को राग-भोग, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति प्रदान करने से संबंधित मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को नहीं हो सकी। अब मामले की सुनवाई 14 अगस्त को होगी। मुकदमे के वादी हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता और अजीत सिंह के अधिवक्ता मंगला प्रसाद पाठक और अभिषेक पाठक ने बताया कि भगवान अविमुक्तेश्वर विराजमान वगैरह बनाम अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी वगैरह के प्रकरण सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट के विचाराधीन है। गुरुवार को सुनवाई टल गई। इस मामले में मसाजिद कमेटी की तरफ से स्थगन प्रार्थना दिया गया। इसलिए अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 14 अगस्त तय कर दी। इस वाद में प्रतिवादीगण को जवाबदेही के अवसर को समाप्त करने के आवेदन पर सुनवाई होनी है।