Varanasi News: मैदागिन-गोदौलिया पर 100 छोटे-बड़े स्कूली वाहनों की एंट्री बंद, 3000 बच्चों को हो रही दिक्कत
Varanasi Traffic: इस प्रतिबंध के कारण बच्चों और उनके अभिभावकों को दिक्कत हो रही है। उन्हें दूसरे रास्ते से स्कूल जाना पड़ रहा है। इस वजह से समय भी काफी लग रहा है।
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मैदागिन-गोदौलिया मार्ग पर यातायात दबाव को देख स्कूली छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। ऐसे में इस रूट पर रहने वाले लगभग 3000 बच्चों और अभिभावकों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है। छुट्टी के एक से डेढ़ घंटे बाद बच्चे घर पहुंच रहे हैं और सुबह एक से डेढ़ घंटे पहले घर से निकल रहे हैं। कुछ अभिभावकों ने तो बस ट्रांसपोर्ट सुविधा बंद कर निजी साधनों का सहारा ले लिया है। अभिभावकों की मांग है कि छोटे स्कूली वाहनों को प्रतिबंध से मुक्त रखा जाए।
मैदागिन से आने वाले वाहन नीचीबाग तक और गोदौलिया से बांसफाटक तक छोटे-बड़े स्कूली वाहनों की आवाजाही होती थी। पहले बच्चों को तय ठहराव तक परिजन छोड़ते थे, लेकिन अब बच्चों को पैदल या फिर दोपहिया वाहन से गिरजाघर तक ले जाकर छोड़ना और लाना पड़ रहा है। इधर, चौक, नीचीबाग आदि क्षेत्रों के रहने वाले बच्चों को मैदागिन तक आवाजाही करनी पड़ रही है।
डालिम्स, जैयपुरिया, स्मिथ, सेंट जांस, केंद्रीय विद्यालय समेत 25 से अधिक स्कूलों के छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही होती थी। अभिभावक पंडित सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि बच्चे सुबह 6 बजे घर से निकल रहे हैं तो फिर घर लौटने में अपराह्न ढाई से तीन बज रहा है। बच्चों की परेशानियां बढ़ गई हैं। अभिभावकों का भी प्रबंधन गड़बड़ हो चुका है।
कोई दुकान बंद कर रहा है तो कोई काम से छुट्टी लेकर लौट रहा : स्कूली बस सेवा बंद होने से लोगों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। ब्रह्मनाल निवासी अभिभावक गोपाल मिश्रा ने बताया कि अपराह्न के समय बच्चों को लेने के लिए गिरजाघर जाना पड़ रहा है। गाड़ियां बंद होने के कारण पैदल जाइए या फिर रिक्शा से लेकर आइए। कोई दुकान बंद कर जा रहा है तो कोई अपने काम से छुट्टी लेकर बच्चों को लेने पहुंच रहा है।
माघ मेले को लेकर इस रूट पर यातायात दबाव बहुत है। पहले से ही स्कूली वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित है, लेकिन कुछ निजी स्कूलों के वाहनों की आवाजाही हो रही थी। अब उन्हें भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। यातायात दबाव कम होने के बाद पहले की तरह स्कूल की छोटी गाड़ियों की आवाजाही मान्य होगी। - अंशुमान मिश्रा, एडीसीपी यातायात