वाराणसीः संस्कृत विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने प्रोफेसर पर लगाया मारपीट का आरोप, कार्रवाई के लिया दिया धरना, जांच के लिए बनी कमेटी
कर्मचारियों के कामकाज ठप करने से विभागों में सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारियों का कहना था कि जब तक प्रोफेसर पर कार्रवाई नहीं हो जाएगी विरोध जारी रहेगा।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने प्रोफेसर पर मारपीट का आरोप लगाया है। कुलपति से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से नाराज कर्मचारी शनिवार को कामकाज ठपकर धरने पर बैठ गए। मामले में प्रोफेसर पर कार्रवाई की मांग की।
उधर प्रोफेसर ने भी घटना की पूरी जानकारी कुलपति को देते हुए मारपीट के आरोप को गलत बताया। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है। कर्मचारियों का कहना था कि जब तक प्रोफेसर पर कार्रवाई नहीं हो जाएगी तब तक विरोध जारी रहेगा।
17 फरवरी की है घटना
विश्वविद्यालय के विज्ञान विभाग में तैनात चपरासी पुनवासी लाल ने विभाग के प्रोफेसर जितेंद्र कुमार पर 17 फरवरी को कार्यालय में मारपीट करने व गाली गलौच करने की शिकायत कुलपति से की है। शनिवार को सुबह घटना के विरोध में कार्रवाई न होने पर नाराज कर्मचारी कामकाज छोड़कर बाहर आ गए और केंद्रीय कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
विभागों में पसरा रहा सन्नाटा
इस दौरान प्रोफेसर द्वारा कर्मचारी के साथ मारपीट की घटना की निंदा करते हुए इसे गलत बताया। इधर कर्मचारियों के कामकाज ठप करने और प्रदर्शन के चलते विभागों में सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारियों का कहना था कि जब तक प्रोफेसर पर कार्रवाई नहीं हो जाएगी तब तक विरोध जारी रहेगा।
तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
विश्वविद्यालय के कुलसचिव ओमप्रकाश ने बताया कि विज्ञान विभाग के चपरासी ने प्रोफेसर जितेंद्र कुमार पर मारपीट, गाली गलौच का आरोप लगाया है। मामले की जांच तीन सदस्यीय जांच कमेटी करेगी। कमेटी में वेदांत विभाग के प्रोफेसर रामकिशोर त्रिपाठी को अध्यक्ष, दर्शन संकाय के संकायप्रमुख प्रो. सुधाकर मिश्र और विनयाधिकारी प्रो. शैलेश कुमार मिश्र को सदस्य बनाया गया है। कमेटी जांच कर अपनी आख्या कुलपति को सौंपेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमानुसार जांच कमेटी गठित कर दी है। चुनाव आचार संहिता में धारा 144 लागू है। इसमें किसी प्रकार का हड़ताल, धरना, प्रदर्शन नहीं हो सकता। अगर कर्मचारी नहीं माने तो जिला निर्वाचन अधिकारी को सूचित कर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।-प्रो. हरेराम त्रिपाठी, कुलपति