यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आदेश, गंगा की सहायक मोरवा नदी में प्रदूषण फैलाने वाली आठ औद्योगिक इकाइयां होंगी बंद
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा की सहायक मोरवा नदी को प्रदूषित करने वाली भदोही की आठ औद्योगिक इकाइयों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इन इकाइयों के बिजली और पानी के कनेक्शन तत्काल काटे जाएंगे। इससे पहले गंगा में प्रदूषित जल डालने पर कानपुर की पांच टेनरियों को बंद कराया जा चुका है।
जानकारी के अनुसार, मोरवा नदी को दूषित कर रहे कारपेट सिटी में चल रहे आठ डाइंग प्लांटों पर कार्रवाई करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उन्हें सील कर दिया है। इनके संचालकों से बगैर एनओसी प्लांट चालू न करने की सख्त हिदायत दी गई है।
शनिवार को भदोही पहुंची नियंत्रण बोर्ड की टीम ने भदोही तहसीलदार को साथ लेकर कार्रवाई की। इससे जिले भर के डाइंग प्लांट संचालकों में हड़कंप मच गया है।
उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह सुबह अपने सहायक वैज्ञानिक अधिकारी व अन्य सदस्यों के साथ कालीन नगरी पहुंचे। उन्होंने बताया कि शिकायत मिली थी कि कुछ डाइंग प्लांट अपना दूषित पानी मोरवा नदी में धड़ल्ले से बहा रहे हैं।
कुछ डाइंग तो बगैर शोधित गंदा और रासायनिक पानी मोरवा नदी में बहा देते हैं। पिछले दिनों पानी के सैंपल की जांच भी कराई गई तो शिकायत सही पाई गई। जिसका त्वरित संज्ञान लेते हुए शनिवार को हम लोगों ने दीपक डाइंग हाउस, मनोज डायर्स, रूपेश कुमार एंड ब्रदर्स, माबूद इंटरनेशनल, अरविंद एक्सपोर्ट, एसके डाइंग हाउस, आईएस डाइंग डिवीजन व भदोही कार्पेट में छानबीन की और सीज करा दिया है।
उन्होंने संचालकों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि बिना एनओसी के इकाई को फिर से चालू किया तो सख्त कार्रवाई होगी। कार्रवाई के दौरान तहसील अधिकारी और भारी पुलिस बल मौजूद रही।
मोरवा नदी का बदल गया था रंग
मोरवा नदी के पानी का रंग गुलाबी हो गया था। जब उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसकी जानकारी मिली, औद्योगिक इकाइयों की जांच करवाई गई थी। मोरवा नदी वरूणा नदी में मिलती है, जो वाराणसी में जाकर गंगा में मिल जाती है।