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उस्ताद की ईद: बिस्मिल्लाह खां को मुबारकबाद देने पहुंचते थे आम-ओ-खास, मोहब्बत के साथ खिलाते थे सेवइयां
Thu, 11 Apr 2024 04:02 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Thu, 11 Apr 2024 04:02 PM IST
सार
भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ईद के अवसर पर मोहब्बत के साथ मेहमानों को सेवइयां खिलाते थे। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां से लोगों के मिलने का सिलसिला तीन दिन तक चलता था।
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बिस्मिल्लाह खां
- फोटो : self
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विस्तार
शहनाई के बादशाह और भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के घर ईद का अलग नजारा होता था। उस्ताद के पैतृक आवास हड़हा सराय पर आम से खास तक ईद की मुबारकबाद देने पहुंचते थे। वह सभी को मोहब्बत के साथ मिलकर सेवइयां खिलाते थे। उनके घर तीन दिनों तक लोगों से मिलने-जुलने का सिलसिला चलता था।
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उस्ताद की बेटी जरीना बेगम ने बताया कि अब्बा सादगी से ईद मनाते थे। सुबह दरगाहे फातमान में ईद की नमाज पढ़ते थे। फिर रास्तेभर मजलूमों व यतीमों में पैसा, कपड़ा बांटते हुए चलते थे। फिर घर पर लोगों को मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू हो जाता था। तब कमिश्नर, जिलाधिकारी, मंत्री, विधायक और सांसद भी दावत पर मिलने आते थे।
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लखनवी कबाब था पसंद
जरीना ने बताया कि ईद पर अब्बा करीब 10 तरह के व्यंजन बनवाते थे। शामी कबाब के अलावा लखनवी टुंडा कबाब भी काफी पसंद था। सेवई, हलवा, खिचड़ा, चपाती, चावल, मीट आदि बनवाते थे। कहते थे, जो आए उसे खिलाना। कोई दरवाजे से भूखा नहीं जाए, नहीं अल्लाह माफ नहीं करेंगे।
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परेशान इंसान को पहचान लेते थे
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां हमेशा जरूरतमंदों की मदद करते थे। जरीना ने बताया कि राह चलते परेशान इंसान पहचान लेते थे। उसे बुलाकर उसकी परेशानी दूर करते। मगर कोशिश करते थे कि कोई इस बात को जान न पाये।