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बच्चों को इकट्ठा कर गांवों में पढ़ाएंगे शिक्षक
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वाराणसी। कोविड-19 संक्रमण से बच्चों को बचाने के लिए शिक्षण संस्थान 22 मार्च से ही बंद है। लेकिन बच्चों शिक्षा बाधित नहीं हो इसके लिए अब स्कूलों के बच्चों को एंड्रॉयड फोन के जरिए पढ़ाया जा रहा है। हालांकि गांव में कई ऐसे बच्चे हैं जिनके पास एंड्रॉयड फोन नहीं होने की वजह से वह पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह व शिक्षकों ने बच्चों को पढ़ाने के लिए एक नया तरीका निकाला है। जिसमें न बच्चों को स्मार्ट फोन की जरूरत पड़ेगी न ही बच्चों को स्कूल जाना होगा।
इसके तहत शिक्षक उन बच्चों तक खुद पहुंचकर पढ़ाई कराएंगे। सोमवार को बीएसए ने सेवापुरी विकास क्षेत्र के 10 गांवों में इस नई पहल की शुरुआत की। इसके तहत विद्यालय के शिक्षक अपने विद्यालय क्षेत्र के गांवों में जाकर ऐसे बच्चों को एक जगह इकट्ठा करेंगे जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। सामाजिक दूरी के साथ इन बच्चों को पढ़ाया जाएगा। जहां एक ओर विद्यालय के शिक्षक गांव में पहुंच कर बच्चों को इकट्ठा करेंगे तो वहीं दूसरे शिक्षक विद्यालय में बैठकर बच्चों को फोटो और वीडियो के जरिए कविता-कहानी, अक्षर ज्ञान के साथ-साथ गणित और विज्ञान के पाठ्यक्रमों का अभ्यास कराएंगे।
कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई में सबसे ज्यादा समस्या है। इसी को देखते हुए एक नई पहल की गई है। जिसमें ज्यादा से ज्यादा बच्चे शिक्षित हो सकें।- राकेश सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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ब्लूटूथ एम्पलीफायर के जरिये पढ़ रहे प्राथमिक के बच्चे
कई क्षेत्रों में बच्चों के घरों में स्मार्ट फ़ोन उपलब्ध नहीं है या वो नेटपैक नहीं रख पाते। इसे समस्या को देखते हुए प्राथमिक विद्यालय सीवो के शिक्षकों ने एक नया प्रयोग किया। जिसमें वो बच्चों को वीडियो कॉलिंग के माध्यम से पढ़ा रहे है। इसमें गांव के शिक्षक सत्येन्द्र कुमार मौर्य तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे। सत्येन्द्र अपने फोन को ब्लूएटूथ एम्पलीफायर से जोड़ देते है जिससे विद्यालय में बैठी शिक्षिका की आवाज आसानी से 8-10 बच्चों तक पहुंच जाती है। विद्यालय की इस टीम में सत्येंद्र कुमार मौर्य, ज्योत्स्ना अग्रवाल, अर्चना, अनामिका सिंह, सरिता यादव, उर्मिला यादव, धर्मा देवी के साथ प्रधानाध्यापक प्रताप नारायण सिंह की मुख्य भूमिका है।
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इसके तहत शिक्षक उन बच्चों तक खुद पहुंचकर पढ़ाई कराएंगे। सोमवार को बीएसए ने सेवापुरी विकास क्षेत्र के 10 गांवों में इस नई पहल की शुरुआत की। इसके तहत विद्यालय के शिक्षक अपने विद्यालय क्षेत्र के गांवों में जाकर ऐसे बच्चों को एक जगह इकट्ठा करेंगे जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। सामाजिक दूरी के साथ इन बच्चों को पढ़ाया जाएगा। जहां एक ओर विद्यालय के शिक्षक गांव में पहुंच कर बच्चों को इकट्ठा करेंगे तो वहीं दूसरे शिक्षक विद्यालय में बैठकर बच्चों को फोटो और वीडियो के जरिए कविता-कहानी, अक्षर ज्ञान के साथ-साथ गणित और विज्ञान के पाठ्यक्रमों का अभ्यास कराएंगे।
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कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई में सबसे ज्यादा समस्या है। इसी को देखते हुए एक नई पहल की गई है। जिसमें ज्यादा से ज्यादा बच्चे शिक्षित हो सकें।- राकेश सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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ब्लूटूथ एम्पलीफायर के जरिये पढ़ रहे प्राथमिक के बच्चे
कई क्षेत्रों में बच्चों के घरों में स्मार्ट फ़ोन उपलब्ध नहीं है या वो नेटपैक नहीं रख पाते। इसे समस्या को देखते हुए प्राथमिक विद्यालय सीवो के शिक्षकों ने एक नया प्रयोग किया। जिसमें वो बच्चों को वीडियो कॉलिंग के माध्यम से पढ़ा रहे है। इसमें गांव के शिक्षक सत्येन्द्र कुमार मौर्य तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे। सत्येन्द्र अपने फोन को ब्लूएटूथ एम्पलीफायर से जोड़ देते है जिससे विद्यालय में बैठी शिक्षिका की आवाज आसानी से 8-10 बच्चों तक पहुंच जाती है। विद्यालय की इस टीम में सत्येंद्र कुमार मौर्य, ज्योत्स्ना अग्रवाल, अर्चना, अनामिका सिंह, सरिता यादव, उर्मिला यादव, धर्मा देवी के साथ प्रधानाध्यापक प्रताप नारायण सिंह की मुख्य भूमिका है।