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ईस्टर की तैयारियां शुरू, कब्रों की सफाई व रंग-रोगन में जुटे मसीही
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मसीही समाज गुड फ्राइडे व ईस्टर पर्व की तैयारियों में जुट गया है। 10 अप्रैल को खजूर का इतवार पॉम संडे के रूप में मनाया जाएगा। खजूर का इतवार मसीही समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। इस पर्व को मनाने के लिए बीते दो मार्च से मसीही समुदाय के लोगों द्वारा 40 दिनों का कठिन उपवास किया जा रहा है।
मैत्री भवन के निदेशक फादर फिलिप डेनिस ने बताया कि पाम संडे के दिन प्रभु यीशु मसीही अंतिम बार अपने शिष्यों के साथ गधे के बच्चे जो दीन एवं सरलता के प्रतीक माने गए हैं पर सवार होकर येरुशलम में प्रवेेश करते हैं। अपने राजा के प्रवेश करने पर उनके अनुयायियों द्वारा खजूर की डालियां एवं अपने कपड़े बिछाकर होसन्ना के गीत गाते हुए उनका स्वागत किया जाता है। सेंट थॉमस चर्च के पुरोहित एन स्टीवंस ने बताया कि पाम संडे से लेकर ईस्टर संडे तक विशेष प्रार्थना सप्ताह मनाया जाएगा।
ईस्टर के पहले पड़ने वाले खजूर के इतवार को लेकर ईसाई परिवारों द्वारा कब्रिस्तानों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पूर्वजों की याद में मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर लोग इस दौरान अपने परिजनों के कब्रों की साफ-सफाई और रंग-रोगन के काम में लगे हुए हैं।
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मृत परिजनों की याद में मनाया जाता ईस्टर
यह पर्व मसीही विश्वासी अपने मृत प्रियजनों की याद में मनाते हैं। ईस्टर के दिन कब्रिस्तानों में मिट्टी को समर्पित हो चुके लोगों को याद किया जाता है। यह उनकी भावना और अपनों से घनिष्ठता को दर्शाता है। इस क्रम में कब्रों पर फूल चढ़ाए जाते हैं। साथ ही अगरबत्तियां और मोमबत्तियां जलाई जाती हैं। इस दिन कब्रिस्तानों पर प्रार्थना समारोह और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। इसके बाद अंत में कब्रों पर पवित्र जल का छिड़काव किया जाता है।
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मैत्री भवन के निदेशक फादर फिलिप डेनिस ने बताया कि पाम संडे के दिन प्रभु यीशु मसीही अंतिम बार अपने शिष्यों के साथ गधे के बच्चे जो दीन एवं सरलता के प्रतीक माने गए हैं पर सवार होकर येरुशलम में प्रवेेश करते हैं। अपने राजा के प्रवेश करने पर उनके अनुयायियों द्वारा खजूर की डालियां एवं अपने कपड़े बिछाकर होसन्ना के गीत गाते हुए उनका स्वागत किया जाता है। सेंट थॉमस चर्च के पुरोहित एन स्टीवंस ने बताया कि पाम संडे से लेकर ईस्टर संडे तक विशेष प्रार्थना सप्ताह मनाया जाएगा।
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ईस्टर के पहले पड़ने वाले खजूर के इतवार को लेकर ईसाई परिवारों द्वारा कब्रिस्तानों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पूर्वजों की याद में मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर लोग इस दौरान अपने परिजनों के कब्रों की साफ-सफाई और रंग-रोगन के काम में लगे हुए हैं।
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यह पर्व मसीही विश्वासी अपने मृत प्रियजनों की याद में मनाते हैं। ईस्टर के दिन कब्रिस्तानों में मिट्टी को समर्पित हो चुके लोगों को याद किया जाता है। यह उनकी भावना और अपनों से घनिष्ठता को दर्शाता है। इस क्रम में कब्रों पर फूल चढ़ाए जाते हैं। साथ ही अगरबत्तियां और मोमबत्तियां जलाई जाती हैं। इस दिन कब्रिस्तानों पर प्रार्थना समारोह और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। इसके बाद अंत में कब्रों पर पवित्र जल का छिड़काव किया जाता है।