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‘अतुल्य भारत’ की साख बचाने वाली बहादुर बेटियों की मां सिस्टम की मार से हुई लाचार, जानिए पूरा मामला
विचित्र सिंह ,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 14 Sep 2018 10:26 AM IST
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‘अतुल्य भारत’ की रक्षा के लिए तीनों सगी बहनों को प्रदेश सरकार ने दिया था रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार
- फोटो : अमर उजाला
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विदेशी मेहमानों को जानलेवा हमले से बचाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित ‘दत्ता सिस्टर्स’ की मां चैताली दत्ता अपनी छह बिस्वा जमीन पर कब्जे के लिए चार साल से लेखपाल से लेकर आला अफसरों के दफ्तरों और थाने का चक्कर काट रही हैं।
मिर्जापुर के चुनार तहसील में पुरैनी भइली गांव में अपनी जमीन पर कब्जे के लिए चैताली आठ अगस्त को वहां के डीएम अनुराग पटेल से मिलीं और मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन निष्कर्ष ढाक के तीन पात रहे। लेखपाल ने स्थलीय निरीक्षण कर बता दिया कि मौके पर जमीन खाली नहीं है।
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बावजूद इसके 22 अगस्त को पोर्टल पर शिकायत के निस्तारण का दावा भी कर दिया। हकीकत में न तो किसी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से बात की और न ही मौका-मुआयना कर उन्हें भौतिक तौर पर कब्जा दिलाया। उल्टे अब ग्राम प्रधान और राजस्व कर्मी शिकायतकर्ता पर जमीन बेचने का दबाव बना रहे हैं।
पढ़ेंः फ्रांसीसी पर्यटकों की आबरू बचाने वाली तीन सगी बहनों को पुरस्कार से नवाजेगी यूपी सरकार
सोनारपुरा निवासी चैताली दत्ता की सास अनुराधा दत्ता ने 1997 में जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। अनुराधा दत्ता ने 24 जून, 2014 को जमीन चैताली दत्ता के नाम कर दी। दाखिल खारिज भी हो गया लेकिन उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिला। इस पर चैताली ने 2014 में ही चुनार के तत्कालीन एसडीएम को तहसील दिवस पर प्रार्थना पत्र दिया था।
पढ़ेंः नौकरशाह करा रहे सरकार की किरकिरी, पोर्टल पर शिकायतों का हो रहा फर्जी निस्तारण
एसडीएम ने लेखपाल विनोद यादव और अदलहाट थाना प्रभारी को आदेश दिया कि जमीन नापी कर कब्जा दिलाया जाए। इसके बाद चैताली की मुश्किलें लगातार बढ़ती गईं। थानेदार, लेखपाल और ग्राम प्रधान आज-कल-परसों कब्जा दिलाने का आश्वासन देकर उन्हें टरकाते रहे।
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पढ़ेंः वीरता पुरस्कार पाकर बोली बहादूर बेटी, जहां भी अन्याय होता दिखेगा उसका करेंगे विरोध
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मिर्जापुर के चुनार तहसील में पुरैनी भइली गांव में अपनी जमीन पर कब्जे के लिए चैताली आठ अगस्त को वहां के डीएम अनुराग पटेल से मिलीं और मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन निष्कर्ष ढाक के तीन पात रहे। लेखपाल ने स्थलीय निरीक्षण कर बता दिया कि मौके पर जमीन खाली नहीं है।
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बावजूद इसके 22 अगस्त को पोर्टल पर शिकायत के निस्तारण का दावा भी कर दिया। हकीकत में न तो किसी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से बात की और न ही मौका-मुआयना कर उन्हें भौतिक तौर पर कब्जा दिलाया। उल्टे अब ग्राम प्रधान और राजस्व कर्मी शिकायतकर्ता पर जमीन बेचने का दबाव बना रहे हैं।
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सोनारपुरा निवासी चैताली दत्ता की सास अनुराधा दत्ता ने 1997 में जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। अनुराधा दत्ता ने 24 जून, 2014 को जमीन चैताली दत्ता के नाम कर दी। दाखिल खारिज भी हो गया लेकिन उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिला। इस पर चैताली ने 2014 में ही चुनार के तत्कालीन एसडीएम को तहसील दिवस पर प्रार्थना पत्र दिया था।
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एसडीएम ने लेखपाल विनोद यादव और अदलहाट थाना प्रभारी को आदेश दिया कि जमीन नापी कर कब्जा दिलाया जाए। इसके बाद चैताली की मुश्किलें लगातार बढ़ती गईं। थानेदार, लेखपाल और ग्राम प्रधान आज-कल-परसों कब्जा दिलाने का आश्वासन देकर उन्हें टरकाते रहे।
जमीन बेच दो या खुद ही खोज लो
'अतु्ल्य भारत' की साख बचाने बाली दत्ता सिस्टर्स को सलाम
- फोटो : अमर उजाला
इसी बीच क्षेत्र में दलालों ने चैताली को समझाने की कोशिश की कि वह जमीन बेच दे। तीन लाख रुपये का प्रलोभन भी दिया। फिर दिन से महीने और महीने से साल हो गए, चैताली एक अफसर से दूसरे के यहां और दूसरे से तीसरे के यहां मिल रही हैं। 2017 में कुछ लोगों ने अवैध रूप से दीवार खड़ी कर ली जिसमें उनकी जमीन का कुछ हिस्सा भी दबा लिया है।
जिन्हें जमीन नापी कर कब्जा दिलाना चाहिए वह दलाल की भूमिका में हैं। पोर्टल पर शिकायत के निस्तारण के फर्जी दावे के कुछ दिन बाद एक राजस्व कर्मचारी ने चैताली को फोन कर कहा कि वह अपनी जमीन उसी को बेच दें, जिसने बाउंड्रीवाल की है। चैताली को एक लाख रुपये बिस्वा के हिसाब से भुगतान कराने को कहा गया। जब राजस्व कर्मी को बताया कि क्षेत्र में जमीन के दाम पांच लाख रुपये बिस्वा हैं। जमीन की कीमत 30 लाख रुपये होती है तो उसने उनसे साफ कह दिया कि फिर वह अपनी जमीन खुद ही खोज लें।
चुनार उपजिलाधिकारी सुरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि भूमिधरी जमीन पर फाट व सीमांकन कराए जाने के बाद ही सहखातेदार को कब्जा दिलाया जा सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को राजस्व संहिता के तहत वाद दाखिल करना चाहिए। वाद दाखिल करने पर खाताधारकों को नोटिस भेज कर उनकी जमीन का ब्यौरा मांगा जाएगा। इसके बाद ही वादकर्ता की जमीन का सीमांकन किया जा सकेगा।
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जिन्हें जमीन नापी कर कब्जा दिलाना चाहिए वह दलाल की भूमिका में हैं। पोर्टल पर शिकायत के निस्तारण के फर्जी दावे के कुछ दिन बाद एक राजस्व कर्मचारी ने चैताली को फोन कर कहा कि वह अपनी जमीन उसी को बेच दें, जिसने बाउंड्रीवाल की है। चैताली को एक लाख रुपये बिस्वा के हिसाब से भुगतान कराने को कहा गया। जब राजस्व कर्मी को बताया कि क्षेत्र में जमीन के दाम पांच लाख रुपये बिस्वा हैं। जमीन की कीमत 30 लाख रुपये होती है तो उसने उनसे साफ कह दिया कि फिर वह अपनी जमीन खुद ही खोज लें।
चुनार उपजिलाधिकारी सुरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि भूमिधरी जमीन पर फाट व सीमांकन कराए जाने के बाद ही सहखातेदार को कब्जा दिलाया जा सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को राजस्व संहिता के तहत वाद दाखिल करना चाहिए। वाद दाखिल करने पर खाताधारकों को नोटिस भेज कर उनकी जमीन का ब्यौरा मांगा जाएगा। इसके बाद ही वादकर्ता की जमीन का सीमांकन किया जा सकेगा।
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