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SSVV: दो इंच चौड़े कपड़े पर लिखी दुर्गासप्तशती है संरक्षित, RSS के वरिष्ठ प्रचारक ने देखी पांडुलिपियां

Fri, 01 Mar 2024 06:26 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 01 Mar 2024 06:26 PM IST
सार

SSVV: विश्वविद्यालय में निरीक्षण के बाद डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के ज्ञान तत्व को जनमानस के सामने लाने की जरूरत है। हमारे वास्तु शास्त्र में क्या है, हमारा चिंतन और आविष्कार क्या था, विद्वानों और विशेषज्ञों को इस पर कार्य करना चाहिए।

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Durga Saptashati written on two inch wide cloth preserved in Sampurnanand Sanskrit University
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में कुलपति के साथ कृष्ण गोपाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. कृष्ण गोपाल ने सरस्वती भवन का निरीक्षण कर यहां रखी दुर्लभ पांडुलिपियों को देखा। यहां रखीं दुर्लभ पांडुलिपियों को देखकर उन्होंने इसके संरक्षण और इस पर शोध करने के लिए छात्रों को प्रेरित किया।
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सरस्वती भवन में संरक्षित स्वर्ण अक्षरों में लिपिबद्ध भागवद्गीता और दो इंच चौड़े कपड़े पर लिखी दुर्गासप्तशती देख अभिभूत हुए। दुर्गासप्तशती को मैग्नीफाइड ग्लास से ही देखा जा सकता है। इसके अलावा लाख पत्र पर स्वर्ण पॉलिश, ऋग्वेद संहिता भाष्यम, लाह, भोजपत्र, कपड़ा काष्ठ सहित कागज पर लिपिबद्ध पांडुलिपियां भी यहां रखी हैं।
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विश्वविद्यालय में निरीक्षण के बाद डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के ज्ञान तत्व को जनमानस के सामने लाने की जरूरत है। हमारे वास्तु शास्त्र में क्या है, हमारा चिंतन और आविष्कार क्या था, विद्वानों और विशेषज्ञों को इस पर कार्य करना चाहिए।
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अध्यक्षता करते कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा की एक प्रमुख विशेषता यह है कि वह व्यष्टि से समष्टि को जोड़ती है। उसकी प्रत्येक प्रार्थना में विश्व बंधुत्व की भावना व्याप्त है। भारतीय ज्ञान परंपरा हमें प्रकृति से जोड़ती है। प्रकृति की शक्तियों को पहचानकर उसी धारा में चलने की जरूरत है।
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