प्यास बुझाने के लिए खोदा कुआं, मिला शिवलिंग
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वाराणसी के बभनियाव में भूगर्भ से निकल रहे पुरातात्विक अवशेष और शिवलिंग मिलने से यह गांव लोगों के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। कण-कण शंकर की किंवदंती यूं तो काशी में व्याप्त है, लेकिन गांव में हो रही खुदाई से मिल रहे अवशेष व शिवलिंग इस अवधारणा को पुष्ट कर रहे हैं।
खुदाई स्थल से महज 20 फीट की दूरी पर बने शिवलिंग और उसकी स्थिति को देखकर पुरातत्वविदों को यहां काफी संख्या में शिव मंदिर या बड़ा उपासना केंद्र होने के संकेत मिले हैं। बीएचयू के आर्कियोलोजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीण कहते हैं कि करीब 200 वर्ष पूर्व कुएं की खुदाई के दौरान यहां शिवलिंग मिला था।
जिसके बाद ग्रामीणों ने मंदिर निर्माण करवा दिया। उन्होंने बताया कि यहां बड़े उपासना स्थल होने की उम्मीद इसलिए भी है क्योंकि मंदिर में शिवलिंग तो है, लेकिन नंदी की प्रतिमा नहीं है। जबकि सामान्य तौर पर शिवलिंग के सामने नंदी की प्रतिमा होती है।
ऐसे मिला शिवलिंग
गांव के बांसदेव मौर्य और राजापुर के श्यामनारायण समेत कई ग्रामीणों ने शिव मंदिर के निर्माण के बारे में बताया कि पहले यहां काफी दूर तक घने जंगल थे। अलग-अलग वजहों से यहां आने वाले लोग मार्ग भटक गए और यहीं बस गए। भूख लगी तो फल-फूल खाकर गुजारा कर लिया। लेकिन पीने के लिए पानी का इंतजाम नहीं था। इसके लिए लोग कुआं खोदने लगे। करीब छह फीट की खुदाई के बाद यहां शिवलिंग दिखा। इसके बाद लोगों ने खुदाई बंद कर यहां मंदिर निर्माण कर पूजा-पाठ करना शुरू कर दिया।
एक ओर शिवलिंग, पर नहीं हैं नंदी
सोमवार को बीएचयू की पुरातत्व विभाग की टीम खुदाई में जुटी रही। ग्रामीणों में भूगर्भ से निकल रहे अवेशष को देखने और समझने का कौतूहल साफ दिख रहा है। आसपास के गांवों से आए ग्रामीणों ने बताया कि आज भी किसी निर्माण के लिए खुदाई या खेती करते हैं तो शिवलिंग व पुरातात्विक अवशेष मिलते रहते हैं। इस मंदिर से करीब 100 मीटर की दूरी पर एक और शिव मंदिर है।