{"_id":"5abf7a6d4f1c1bed618b4b6a","slug":"drug-bought-from-company-whose-license-canceled","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बीएचयू अस्पतालः मरीजों की मौत के मामले में नया खुलासा, जिस कंपनी का लाइसेंस रद्द, उसी से खरीदी दवा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएचयू अस्पतालः मरीजों की मौत के मामले में नया खुलासा, जिस कंपनी का लाइसेंस रद्द, उसी से खरीदी दवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 02 Apr 2018 11:04 AM IST
विज्ञापन
बीएचयू अस्पताल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में बीते साल जून महीने में इलाज के दौरान 9 मरीजों की मौत के मामले में कई नए तथ्य सामने आए हैं। जिस कंपनी से दवा खरीदी जा रही थी, उसका लाइसेंस दो साल पहले ही निरस्त कर दिया था।
बावजूद इसके न सिर्फ उसी कंपनी से दवा खरीदी गई बल्कि टेंडर की निर्धारित प्रक्रिया को भी दरकिनार कर दिया गया। बताया जा रहा है कि दवा कंपनी के मालिक इलाहाबाद क्षेत्र के भाजपा के एक विधायक के पुत्र हैं।
ऐसे में जांच की आंच उन तक ना पहुंचने पाए, इसकी कोशिश में पुलिस से लेकर बीएचयू प्रशासन तक जुटा है। तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी त्रिपाठी ने दवा कंपनी से करार को सहमति दी थी। सूत्रों की मानें तो नवनियुक्त कुलपति ने इस मामले की फाइल तलब की है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त एके जैन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि बीएचयू अस्पताल में उस समय इस्तेमाल की जाने वाली नॉन फार्मकोपियल ग्रेड की नाइट्रस ऑक्साइड औषधि की श्रेणी में आती ही नहीं है।
वहीं दूसरी ओर आरटीआई कार्यकर्ता हरिकेश बहादुर सिंह को सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि संबंधित दवा कंपनी का लाइसेंस दो साल पहले ही स्थगित कर दिया गया था।
विज्ञापन
बावजूद इसके न सिर्फ उसी कंपनी से दवा खरीदी गई बल्कि टेंडर की निर्धारित प्रक्रिया को भी दरकिनार कर दिया गया। बताया जा रहा है कि दवा कंपनी के मालिक इलाहाबाद क्षेत्र के भाजपा के एक विधायक के पुत्र हैं।
विज्ञापन
ऐसे में जांच की आंच उन तक ना पहुंचने पाए, इसकी कोशिश में पुलिस से लेकर बीएचयू प्रशासन तक जुटा है। तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी त्रिपाठी ने दवा कंपनी से करार को सहमति दी थी। सूत्रों की मानें तो नवनियुक्त कुलपति ने इस मामले की फाइल तलब की है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त एके जैन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि बीएचयू अस्पताल में उस समय इस्तेमाल की जाने वाली नॉन फार्मकोपियल ग्रेड की नाइट्रस ऑक्साइड औषधि की श्रेणी में आती ही नहीं है।
वहीं दूसरी ओर आरटीआई कार्यकर्ता हरिकेश बहादुर सिंह को सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि संबंधित दवा कंपनी का लाइसेंस दो साल पहले ही स्थगित कर दिया गया था।
किसी ने उंगली नहीं उठाई
demo pic
ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि आखिर किसकी शह पर गैरकानूनी तरीके से बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के सर सुंदरलाल अस्पताल में नाइट्रस ऑक्साइड की आपूर्ति होती रही।
इसकी जानकारी सर सुंदरलाल अस्पताल के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर तत्कालीन कुलपति तक को थी लेकिन किसी ने उंगली नहीं उठाई। अब मामला सामने आने पर बीएचयू के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा है।
आरटीआई के जरिये ही बीएचयू प्रशासन ने हरिकेश बहादुर सिंह को दो अलग-अलग पत्रों में दो अलग जानकारी दी है। एक तरफ तो बीएचयू प्रशासन कहता है कि उसने इलाहाबाद की कथित कंपनी को कोई आर्डर नहीं दिया था तो वहीं बीएचयू अस्पताल के अभिलेखों से ही पता चलता है कि संबंधित कंपनी से दवा खरीदी गई थी।
दरअसल इस दवा खरीद में भी बड़ा घालमेल हुआ है। सूत्रों की मानें तो बिना किसी टेंडर के ही इलाहाबाद की कथित दवा कंपनी को आर्डर दिया गया था। इस मामले की शिकायत पीएमओ से लेकर के मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक की गई है।
इसकी जानकारी सर सुंदरलाल अस्पताल के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर तत्कालीन कुलपति तक को थी लेकिन किसी ने उंगली नहीं उठाई। अब मामला सामने आने पर बीएचयू के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा है।
आरटीआई के जरिये ही बीएचयू प्रशासन ने हरिकेश बहादुर सिंह को दो अलग-अलग पत्रों में दो अलग जानकारी दी है। एक तरफ तो बीएचयू प्रशासन कहता है कि उसने इलाहाबाद की कथित कंपनी को कोई आर्डर नहीं दिया था तो वहीं बीएचयू अस्पताल के अभिलेखों से ही पता चलता है कि संबंधित कंपनी से दवा खरीदी गई थी।
दरअसल इस दवा खरीद में भी बड़ा घालमेल हुआ है। सूत्रों की मानें तो बिना किसी टेंडर के ही इलाहाबाद की कथित दवा कंपनी को आर्डर दिया गया था। इस मामले की शिकायत पीएमओ से लेकर के मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक की गई है।