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त्रिकोणात्मक लड़ाई में फंसे प्रत्याशियों के सपने
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गाजीपुर। जिले के जखनिया (सुरक्षित) सीट त्रिकोणात्मक लड़ाई के बीच फंसी हुई है। जातिगत समीकरण के खेल में किसी भी प्रत्याशी की राह आसान नहीं दिखाई पड़ रही है। प्रबुद्धजनों की मानें तो भाजपा-सुभासपा के आमने-सामने की लड़ाई को बसपा ने काफी संघर्षपूर्ण बना दिया है। वजह जातिगत आंकड़ों को वोट बैंक का आधार मानकर लड़ाई काफी रोचकपूर्ण हो चुकी है। अगर बसपा अपने वोट बैंक को बचा ले जाता है तो सुभासपा को इसका फायदा होगा। दूसरी ओर भाजपा उस वोट बैंक में सेंधमारी करने में कामयाब हो जाता है तो सवर्ण वोटों के सहारे नाव किनारे लगाने में सफल होगा। ऐसे में जीत-हार का अंतर कम ही रहेगा।
इस विधानसभा क्षेत्र में पिछले एक चुनाव में सपा तो दूसरे चुनाव में सुभासपा का वर्चस्व रहा है। वर्ष 2012 में सपा की सीट पर सुब्बाराम विधानसभा पहुंचे थे। जबकि 2017 में सुभासपा ने पांच हजार के अंतर से सपा के प्रत्याशी को हराकर मैदान मार लिया था। देखा जाए तो जीत-हार का अंतर कुछ अधिक नहीं था, लेकिन सुभासपा के परंपरागत वोट ने जीत-हार के आंकड़ों में अंतर लाकर खड़ा कर दिया था। हालांकि वर्ष 2017 में सुभासपा के किला फतह में भाजपा का साथ था, लेकिन इस बार सुभासपा साइकिल के साथ है। इस सीट को बचाने के लिए सुभासपा प्रत्याशी वेदी राम मेहनत से जुटे हुए हैं।
इधर भाजपा प्रत्याशी रामराज बनवासी सवर्ण और वोट के साथ दलितों के अलावा अन्य जातियों का वोट अपने पक्ष करने में लगे हुए हैं। वहीं मुसहर वोट बैंक को जोड़कर भारी अंतर से आंकड़ों को बदलने के साथ परचम लहराने को दिन रात जुटे हुए हैं। हालांकि बसपा प्रत्याशी विजय कुमार कसकर लड़ रहे हैं, जिससे यहां की लड़ाई काफी कठिन हो चुकी है। भाजपा- सुभासपा- बसपा के तीनों प्रत्याशी राजनीतिक धुरंधर हैं, ऐसे में जद्दोजहद संघर्षपूर्ण ही दिखाई पड़ रहा है। भाजपा द्वारा महादलित समाज के प्रत्याशी को मैदान में उतराने से समीकरण बिगड़ता दिख रहा है।
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वर्ष 2017 में सुभासपा के त्रिवेणी राम ने सपा के गरीब राम को 5157 मतों के अंतर से हराया था। तब भी बसपा यहां तीसरे स्थान पर थी। एक बार फिर जखनिया विधानसभा क्षेत्र में जातिगत समीकरण ही नया गुल खिला सकता है। पिछली बार सुभासपा का भाजपा के साथ गठबंधन था। ऐसे में भाजपा का भी वोट सुभासपा के खाते में गया था। इस बार भाजपा ने महादलित समाज से आने वाले प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। ऐसे में पिछली बार भाजपा का मिला वोट सुभासपा के खाते से कम होगा। हालांकि भाजपा और सुभासपा के प्रत्याशियों का नया चेहरा हैं। वहीं बसपा प्रत्याशी का पुराना चेहरा इन दोनों पार्टियों के समीकरण को गड़बड़ाने में लगा है। ऐसे में तीनों प्रत्याशी अनुसूचित जाति, यादव, क्षत्रिय, ब्राहम्ण, राजभर, मुसहर और बिंद जाति के वोटों को पक्ष में करने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं।
कमजोरी और मजबूरी
सुभासपा प्रत्याशी वेदी राम जखनिया के लिए नया चेहरा हैं। जिससे इनके लिए लोगों से जुड़ने में समय लग रहा है। हालांकि सपा और सुभासपा का गठबंधन होने से इनको मजबूती मिल रही है। भाजपा के रामराज बनवासी महादलित वर्ग के हैं। ऐसे में बनवासी समाज के होने से अन्य वोटरों के बीच सकारात्मक मैसेज जा रहा है। हालांकि चुनावी राजनीति से इनका जुड़ाव कम रही रहा है। जिससे राजनीतिक उलझन देखने को मिल रही है। वहीं, बसपा के विजय कुमार यहां से विधायक रह चुके हैं। उस दौरान कराए गए कामों का असर इस चुनाव में देखने को मिल रहा है। हालांकि क्षेत्र में बहुत सक्रिय नहीं होने से लोगों के बीच जगह बनाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वोटों का गणित
कुल- 430298
पुरुष- 231300
महिला- 198984
थर्ड जेंडर- 14
पिछले चुनाव का परिणाम
त्रिवेणी राम- सुभासपा - 84158
गरीब राम- सपा - 79001
संजीव कुमार- बसपा - 67077
जातिगत समीकरण
अनुसूचित जाति - 75 हजार
यादव - 45 हजार
क्षत्रिय- 42 हजार
ब्राह्मण - 22 हजार
राजभर - 20 हजार
मुसहर - 15 हजार
बिंद - पांच हजार
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इस विधानसभा क्षेत्र में पिछले एक चुनाव में सपा तो दूसरे चुनाव में सुभासपा का वर्चस्व रहा है। वर्ष 2012 में सपा की सीट पर सुब्बाराम विधानसभा पहुंचे थे। जबकि 2017 में सुभासपा ने पांच हजार के अंतर से सपा के प्रत्याशी को हराकर मैदान मार लिया था। देखा जाए तो जीत-हार का अंतर कुछ अधिक नहीं था, लेकिन सुभासपा के परंपरागत वोट ने जीत-हार के आंकड़ों में अंतर लाकर खड़ा कर दिया था। हालांकि वर्ष 2017 में सुभासपा के किला फतह में भाजपा का साथ था, लेकिन इस बार सुभासपा साइकिल के साथ है। इस सीट को बचाने के लिए सुभासपा प्रत्याशी वेदी राम मेहनत से जुटे हुए हैं।
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इधर भाजपा प्रत्याशी रामराज बनवासी सवर्ण और वोट के साथ दलितों के अलावा अन्य जातियों का वोट अपने पक्ष करने में लगे हुए हैं। वहीं मुसहर वोट बैंक को जोड़कर भारी अंतर से आंकड़ों को बदलने के साथ परचम लहराने को दिन रात जुटे हुए हैं। हालांकि बसपा प्रत्याशी विजय कुमार कसकर लड़ रहे हैं, जिससे यहां की लड़ाई काफी कठिन हो चुकी है। भाजपा- सुभासपा- बसपा के तीनों प्रत्याशी राजनीतिक धुरंधर हैं, ऐसे में जद्दोजहद संघर्षपूर्ण ही दिखाई पड़ रहा है। भाजपा द्वारा महादलित समाज के प्रत्याशी को मैदान में उतराने से समीकरण बिगड़ता दिख रहा है।
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वर्ष 2017 में सुभासपा के त्रिवेणी राम ने सपा के गरीब राम को 5157 मतों के अंतर से हराया था। तब भी बसपा यहां तीसरे स्थान पर थी। एक बार फिर जखनिया विधानसभा क्षेत्र में जातिगत समीकरण ही नया गुल खिला सकता है। पिछली बार सुभासपा का भाजपा के साथ गठबंधन था। ऐसे में भाजपा का भी वोट सुभासपा के खाते में गया था। इस बार भाजपा ने महादलित समाज से आने वाले प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। ऐसे में पिछली बार भाजपा का मिला वोट सुभासपा के खाते से कम होगा। हालांकि भाजपा और सुभासपा के प्रत्याशियों का नया चेहरा हैं। वहीं बसपा प्रत्याशी का पुराना चेहरा इन दोनों पार्टियों के समीकरण को गड़बड़ाने में लगा है। ऐसे में तीनों प्रत्याशी अनुसूचित जाति, यादव, क्षत्रिय, ब्राहम्ण, राजभर, मुसहर और बिंद जाति के वोटों को पक्ष में करने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं।
कमजोरी और मजबूरी
सुभासपा प्रत्याशी वेदी राम जखनिया के लिए नया चेहरा हैं। जिससे इनके लिए लोगों से जुड़ने में समय लग रहा है। हालांकि सपा और सुभासपा का गठबंधन होने से इनको मजबूती मिल रही है। भाजपा के रामराज बनवासी महादलित वर्ग के हैं। ऐसे में बनवासी समाज के होने से अन्य वोटरों के बीच सकारात्मक मैसेज जा रहा है। हालांकि चुनावी राजनीति से इनका जुड़ाव कम रही रहा है। जिससे राजनीतिक उलझन देखने को मिल रही है। वहीं, बसपा के विजय कुमार यहां से विधायक रह चुके हैं। उस दौरान कराए गए कामों का असर इस चुनाव में देखने को मिल रहा है। हालांकि क्षेत्र में बहुत सक्रिय नहीं होने से लोगों के बीच जगह बनाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वोटों का गणित
कुल- 430298
पुरुष- 231300
महिला- 198984
थर्ड जेंडर- 14
पिछले चुनाव का परिणाम
त्रिवेणी राम- सुभासपा - 84158
गरीब राम- सपा - 79001
संजीव कुमार- बसपा - 67077
जातिगत समीकरण
अनुसूचित जाति - 75 हजार
यादव - 45 हजार
क्षत्रिय- 42 हजार
ब्राह्मण - 22 हजार
राजभर - 20 हजार
मुसहर - 15 हजार
बिंद - पांच हजार