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चौखट पर ठिठका ख्वाब
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 28 Dec 2015 01:55 AM IST
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गंगा में जलपरिवहन के प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट की सुस्त रफ्तार से लोग मायूस हैं। इलाहाबाद से हल्दिया के बीच जल परिवहन शुरू करने का हो-हल्ला कहीं गायब हो गया है।
इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) के निदेशक ने नवंबर में यहां टर्मिनल निर्माण का काम शुरू करने का दावा किया था लेकिन ईंट रखना तो दूर अब तक इसकी कोई तैयारी भी नजर नहीं आई।
जलपरिवहन की इस योजना को लेकर अधिकारियों ने बड़े-बड़े सपने दिखाए लेकिन अब तक कोई पहल हकीकत नहीं बन पाई। अब तो इस बहुउद्देशीय योजना के भविष्य पर ही सवाल उठने लगे हैं।
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भाजपा के केंद्र की सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी की प्राथमिकताओं में से एक इलाहाबाद से हल्दिया तक जलपरिवहन भी है। शुरू में इस योजना को लेकर ताबड़तोड़ बैठकें हुईं। जना की कुल लागत 42 सौ करोड़ रुपये देने की पेशकश के साथ वर्ल्ड बैंक ने 300 करोड़ रुपये स्वीकृत भी कर दिए। पहले फेज में वाराणसी से हल्दिया के बीच जलपरिवहन को सुचारु रूप से शुरू कराने के लिए तेजी से प्रयास हुए। फाइव स्टार होटलों में उद्यमियों, व्यापारियाें और वर्ल्ड बैंक की टीमों के साथ कई बैठकें हुईं।
आए दिन जलपरिवहन की कार्ययोजनाओं को लेकर नए-नए खुलासे किए जाते रहे। अभी कुछ महीने पहले यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैठक हुई, जिसमें कई विदेशी सर्वेयर कंपनियों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान आईडब्ल्यूएआई चेयरमैन अमिताभ वर्मा ने दावा किया था कि नवंबर के पहले सप्ताह में वाराणसी में प्रस्तावित टर्मिनल का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी उन्होंने दी थी। उसके बाद आफकांस नामक कंपनी को टर्मिनल बनाने का ठेका मिलने की बात सामने आई लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
टर्मिनल निर्माण की कुल लागत 196 करोड़ रुपये निर्धारित है। इस बारे में आईडब्ल्यूएआई के अधिकारी अब कुछ स्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं कि काम कब तक शुरू होगा। पिछले डेढ़ साल के दौरान हर महीने आईडब्ल्यूएआई की औसतन दो बैठकें हो जाया करती थीं लेकिन दो महीने से वह भी बंद है। इधर लोग जलपरिवहन के ख्वाब के पूरे होने के इंतजार में हैं।
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इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) के निदेशक ने नवंबर में यहां टर्मिनल निर्माण का काम शुरू करने का दावा किया था लेकिन ईंट रखना तो दूर अब तक इसकी कोई तैयारी भी नजर नहीं आई।
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जलपरिवहन की इस योजना को लेकर अधिकारियों ने बड़े-बड़े सपने दिखाए लेकिन अब तक कोई पहल हकीकत नहीं बन पाई। अब तो इस बहुउद्देशीय योजना के भविष्य पर ही सवाल उठने लगे हैं।
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भाजपा के केंद्र की सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी की प्राथमिकताओं में से एक इलाहाबाद से हल्दिया तक जलपरिवहन भी है। शुरू में इस योजना को लेकर ताबड़तोड़ बैठकें हुईं। जना की कुल लागत 42 सौ करोड़ रुपये देने की पेशकश के साथ वर्ल्ड बैंक ने 300 करोड़ रुपये स्वीकृत भी कर दिए। पहले फेज में वाराणसी से हल्दिया के बीच जलपरिवहन को सुचारु रूप से शुरू कराने के लिए तेजी से प्रयास हुए। फाइव स्टार होटलों में उद्यमियों, व्यापारियाें और वर्ल्ड बैंक की टीमों के साथ कई बैठकें हुईं।
आए दिन जलपरिवहन की कार्ययोजनाओं को लेकर नए-नए खुलासे किए जाते रहे। अभी कुछ महीने पहले यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैठक हुई, जिसमें कई विदेशी सर्वेयर कंपनियों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान आईडब्ल्यूएआई चेयरमैन अमिताभ वर्मा ने दावा किया था कि नवंबर के पहले सप्ताह में वाराणसी में प्रस्तावित टर्मिनल का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी उन्होंने दी थी। उसके बाद आफकांस नामक कंपनी को टर्मिनल बनाने का ठेका मिलने की बात सामने आई लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
टर्मिनल निर्माण की कुल लागत 196 करोड़ रुपये निर्धारित है। इस बारे में आईडब्ल्यूएआई के अधिकारी अब कुछ स्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं कि काम कब तक शुरू होगा। पिछले डेढ़ साल के दौरान हर महीने आईडब्ल्यूएआई की औसतन दो बैठकें हो जाया करती थीं लेकिन दो महीने से वह भी बंद है। इधर लोग जलपरिवहन के ख्वाब के पूरे होने के इंतजार में हैं।