UP : जब गावस्कर, कपिल और सचिन ने जड़े थे चौके-छक्के, जानें डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम का खेल इतिहास
Varanasi News : वाराणसी के डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम का नाम विश्व भर में फैला हुआ है। यहां नामचीन खिलाड़ियों ने अपने खेल का प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही कई नाम ऐसे हैं, जो इस मैदान में खेलकर प्रसिद्धि पा गए। आइए हम बताते हैं सिगरा स्टेडियम का गौरवशाली इतिहास...
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डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम का खेल इतिहास गौरवशाली रहा है। राष्ट्रीय फलक पर 500 से अधिक खिलाड़ी चमक बिखेर चुके हैं। भारतीय क्रिकेट के महानतम खिलाड़ी सुनील गावस्कर, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर ने भी चौके छक्के जड़े थे। 1983 में पहली बार वर्ल्ड कप जीतने के बाद प्रदर्शन मैच में यहां सभी खिलाड़ी आए थे।
वाराणसी क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि सिगरा स्टेडियम में बड़े भाई अमेरिका निवासी प्रो. राज किशोर यादव और वाराणसी क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे राजीव रंजन यादव ने 1983 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के साथ मिलकर मैच कराया था। रोजर बिन्नी, मोहिंदर अमरनाथ के अलावा उभरते खिलाड़ी के रूप में मो. अजहरूद्दीन, सचिन तेंदुलकर यहां चौके छक्के लगा चुके हैं।
दिलीप वेंगसरकर, यशपाल शर्मा, किरन मोरे, संदीप पाटिल संजय मांजरेकर, इरफान पठान, युसुफ पठान, संजय बांगड़ ने भी यहां मैच खेले हैं। फुटबॉल के मुकाबले भी खेले गए: डॉ. संपूर्णानंद के प्रयास से स्टेडियम का निर्माण 1960 से 62 के बीच हुआ था। मैदान में छह रणजी ट्रॉफी मैच 1964, 1970, 1978, 1988, 2003, 2003 में हुए थे।
दो बार यूपी, एक बार राजस्थान, एक बार रेलवे ने रणजी ट्रॉफी मैच जीता था। पूर्व कोच फरमान हैदर ने बताया कि स्टेडियम को फुटबॉल के लिए जाना जाता है। 1965 में दो रुपये का टिकट लगता था। मोहन बगान जैसे क्लब के मैच भी हो चुके हैं। विनोद कन्नौजिया, अख्तर अली, नूर आलम, मुश्ताक अली, मोहम्मद नसीम, शम्शी रजा, नसीम अख्तर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं।
यहीं के हॉस्टल के बच्चों ने पहली बार सुब्रतो कप जीता था। ओलंपियन मोहम्मद शाहिद, राहुल सिंह, विवेक सिंह हॉकी की प्रैक्टिस करते थे। ओलंपिक का गोल्ड मेडलिस्ट तब निकला था जब एस्ट्रोटर्फ नहीं था।
यूपी और काशी के विकास पुरुष थे डॉ. संपूर्णानंद
उस जमाने में सीमित संसाधन थे। डॉ. संपूर्णानंद ने देश की स्वाधीनता संग्राम में महात्मा गांधी के साथ काफी काम किया था। यूपी के दूसरे मुख्यमंत्री और राजस्थान के दूसरे राज्यपाल थे। काशी में जन्मे संपूर्णानंद को यूपी और काशी का विकास पुरुष कहा जाता था। उन्होंने काशी के विकास में मील के पत्थर गाड़े हैं। उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय और स्पोर्ट्स के क्षेत्र में काशी का नाम ऊंचा किया था।
अब पदक जीतने की जिम्मेदारी : ललित
पीएम मोदी ने खेल सुविधाओं की सौगात दे दी है, अब जिम्मेदारी खिलाड़ियों की है कि वे अधिक से अधिक पदक जीतकर देश और काशी का नाम रोशन करें। उक्त बातें लगातार दो बार ओलंपिक कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय ने कहीं। स्टेडियम के उद्घाटन के मौके पर ललित उपाध्याय ने कहा कि यह खेल का स्वर्णिम युग है। यहां अब एक नहीं कई खेलों का अभ्यास कर दक्ष खिलाड़ी निकलेंगे। अब बनारस खेल और खिलाड़ियों के नाम से दुनिया में जाना जाएगा।
सपना सच होने जैसा है : प्रशांति
इंटरनेशनल बास्केटबॉल प्लेयर प्रशांति सिंह ने बताया कि वह भाग्यशाली हैं, जो उन्होंने प्रधानमंत्री से नेशनल सेंटर फॉर एक्सीलेंस स्टेडियम की वाराणसी में मांग की थी। आज ये मांग पूरी हो गई। कहा कि चार साल में यह उपलब्धि बेमिसाल है। 9 नवंबर 2020 को पीएम से सौगात मांगी थी, जो आज अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं से युक्त होकर काशी वासियों को मिली है। काशी के 300 किलोमीटर परिधि में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम नहीं था। इससे खिलाड़ियों को फायदा होगा।