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अंतरराष्ट्रीय शोध: श्रीलंका के सिंहली और तमिल की डीएनए संरचना एक जैसी, कभी था रोटी-बेटी का संबंध

Sat, 02 Sep 2023 01:05 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sat, 02 Sep 2023 01:05 PM IST
सार

श्रीलंका की सिंहली और तमिल आनुवांशिक रूप से समान हैं। उनके डीएनए की संरचना एक जैसी है। यानी उनमें कभी रोटी-बेटी का संबंध था। लेकिन, करीब दो हजार साल बाद से एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। इसका खामियाजा भारत ने भी भुगता है। इसका खुलासा अंतरराष्ट्रीय शोध व अध्ययन से हुआ है।

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DNA structure of Sinhalese and Tamil of Sri Lanka is similar
डीएनए

विस्तार

श्रीलंका की सिंहली और तमिल आनुवांशिक रूप से समान हैं। उनके डीएनए की संरचना एक जैसी है। यानी उनमें कभी रोटी-बेटी का संबंध था। लेकिन, करीब दो हजार साल बाद से एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। इसका खामियाजा भारत ने भी भुगता है। इसका खुलासा अंतरराष्ट्रीय शोध व अध्ययन से हुआ है। इसका प्रकाशन जर्नल आईसाइंस में हुआ है।

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बीएचयू के जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) लखनऊ के डॉ. नीरज राय और कोलंबो विश्वविद्यालय के डॉ. आर रणसिंघे के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने सिंहली और तमिल आबादी के डीएनए डाटा का व्यापक स्तर पर विश्लेषण किया है। इस अध्ययन में श्रीलंका के प्रमुख जातीय समूह, सिंहली और तमिलों की आनुवांशिक समानता और ऐतिहासिक उत्पत्ति के बारे में पता चला है।

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इस शोध का निष्कर्ष हैरान करने वाला

प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि शोधकर्ताओं ने पहली बार पांच लाख से ज्यादा जेनेटिक मार्कर्स (म्युटेशन) का उपयोग करते हुए यह अध्ययन किया। कोलंबो विश्वविद्यालय, श्रीलंका के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रणसिंघे ने कहा कि इस शोध का निष्कर्ष हैरान करने वाला था। सिंहली और तमिल, जो कि अलग-अलग भाषा बोलते हैं। सांस्कृतिक रूप से अलग हैं, उनमें एक ही तरह की आनुवांशिक संरचना नजर आई। इसका अर्थ है कि इन दोनों मानव समूह के बीच जीन प्रवाह हजारों वर्षों से जारी है। यह जातीयता और भाषा की सीमाओं के पार है। अध्ययन में कहा गया है कि सिंहली और तमिल आबादी श्रीलंका में भारत से लगभग एक ही समय यानी पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व में आई।

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पश्चिम भारत की मराठा आबादी से जुड़ी है सिंहली आबादी

प्राचीन डीएनए प्रयोगशाला हेड डॉ. नीरज राय का कहना है कि पहली बार इस शोध ने बताया कि सिंहली आबादी विशेष रूप से पश्चिम भारत की मराठा आबादी से जुड़ी हुई है और यह आनुवांशिक विरासत अब भी अपने डीएनए में सहेजे हुए हैं। प्रसिद्ध भाषाविद प्रो. जॉर्ज वैन ड्रिम के मुताबिक दक्षिण एशियाई आबादी के व्यापक संदर्भ में, श्रीलंकाई जातीय समूह किसी भी अन्य जाति या जनजाति समूहों की तुलना में आनुवंशिक रूप से अधिक समान हैं।

जेनेटिक मिक्सिंग को भी तथ्यात्मक रूप से बताता अध्ययन

प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि यह अध्ययन न केवल सिंहली लोगों के आनुवांशिक इतिहास पर प्रकाश डालता है, बल्कि श्रीलंका की विविध आबादी का भारत से प्रवास और उनकी जेनेटिक मिक्सिंग को भी तथ्यात्मक रूप से बताता है। बीएचयू के विज्ञान संकाय के निदेशक प्रो. अनिल के त्रिपाठी ने कहा कि दक्षिण एशियाई आबादी की आनुवांशिक विरासत को समझने में बीएचयू लगातार प्रयासरत है।

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