बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में चल रही अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शनिवार को ‘राजस्थान पुरातनता और परिवर्तन’ पर चर्चा की गई। इस दौरान बीएचयू के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने अपने शोध-आधारित व्याख्यान के माध्यम से बताया कि राजस्थानियों का डीएनए पाकिस्तान से नहीं बल्कि मध्यप्रदेश और गुजरात से अधिक मिलता है।
वाराणसी इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री द्वारा आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में प्रो. चौबे ने राजस्थान की विभिन्न जातियों और जनजातियों पर किए गए अपने दीर्घकालिक डीएनए अध्ययन के परिणाम के बारे में बताया। कहा कि राजस्थान की आबादी का आनुवंशिक स्वरूप पश्चिम की ओर पाकिस्तान की ओर झुकने के बजाय भारतीय उपमहाद्वीप के मध्य-पश्चिमी भूभाग, विशेषकर मध्य प्रदेश और गुजरात, के साथ सर्वाधिक निकटता रखता है। बताया कि टीम की ओर से किए गए जीनोम-व्यापी विश्लेषण से यह बार-बार सामने आया है कि राजस्थान की अध्ययनित आबादियाँ उत्तर-मध्य भारत की आबादियों से अधिक आनुवंशिक समानता रखती हैं, न कि सीमा पार पाकिस्तानी आबादियों से। इस जेनेटिक अध्ययन, जिसमें मीणा, गुज्जर तथा राजस्थान की मिश्रित आबादी के 669 व्यक्तियों के आँकड़े शामिल थे। व्याख्यान का सबसे चर्चित हिस्सा राजस्थान की जातियों और जनजातियों में पाए गए लगभग 52,000 वर्ष पुराने माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए वंशों का प्रस्तुतीकरण रहा।