रेलवे को मिलेगी नई ताकत, 12 हजार अश्व शक्ति क्षमता का तैयार हो रहा रेल इंजन
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डीरेका (डीजल रेल कारखाना) में तैयार होने वाला कनवर्टेड लोको (रेल इंजन) 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगा। आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्डस ऑर्गेनाइजेशन) ने प्रोटोटाइप इंजन के परीक्षण के बाद इसकी अधिकतम गति 95 किमी प्रति घंटा निर्धारित की है। इसका उत्पादन भी शुरू हो गया है और जून तक दूसरा रेल इंजन बनकर तैयार हो जाएगा।
इस साल 14 कनवर्टेड लोको बनाने का लक्ष्य रेलवे बोर्ड ने डीरेका को दिया है। रेलवे में सेवा दे रहे 4000 अश्वशक्ति क्षमता वाले डब्ल्यूडीजी-4 (डीजल से चलने वाले) रेल इंजनों को कनवर्टेड लोको में बदला जाएगा। इसके लिए कई रेल इंजनों को अलग-अलग जोन से डीरेका में लाया गया है।
कनवर्टेड लोको माल ढुलाई के लिए सेवाएं देंगे। डीजल रेल इंजन से रूपांतरित प्रोटो टाइप 12,000 अश्व शक्ति के विद्युत रेल इंजन का परीक्षण पश्चिम मध्य रेलवे के तुगलकाबाद शेड में चल रहा था।
105 किमी प्रति घंटे की गति के लिए किया गया था तैयार
वर्कशॉप में 4000 अश्व शक्ति के दो डब्ल्यूडीजी-4 रेल इंजनों को अलग-अलग 6000 अश्व शक्ति के विद्युत रेल इंजनों में रूपांतरित कर और उन्हें जोड़कर 12000 अश्व शक्ति का विद्युत रेल इंजन बनाया गया।
इसे 105 किमी प्रति घंटा की गति से चलने के लिए डिजाइन किया गया था, मगर आरडीएसओ ने 95 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति निर्धारित की है। इंजन का वजन 252 टन है। इसमें तीन फेज इंडक्शन मोटर, चार पावर कंवर्टर लगे हैं। यह इंजन रीजेनेरेटिव व न्यूमेटिक ब्रेकिंग सिस्टम से युक्त है।
डीरेका के उप महाप्रबंधक नितिन मेहरोत्रा ने बताया कि मेक इन इंडिया के तहत बनाए गए कनवर्टेड लोको की रफ्तार आरडीएसओ ने 95 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की है। नियमित उत्पादन के तहत जून तक दूसरा लोको तैयार हो जाएगा।