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तीन साल बाद बिना तिथि विवाद के दिवाली: ग्रह-नक्षत्रों की चाल ऐसी कि सुबह से रात तक अमावस्या; ये है शुभ मुहूर्त
Wed, 07 Oct 2026 08:49 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 07 Oct 2026 08:49 AM IST
सार
इस साल तीन साल बाद बिना तिथि विवाद के दीवाली होगी। ग्रह-नक्षत्रों की चाल ऐसी कि सुबह से रात तक अमावस्या है। बीएचयू के ज्योतिषाचार्यां ने कहा कि हर बार सूर्यास्त के आसपास अमावस्या लगती थी, तभी भ्रम होता था। सुबह 10:50 बजे से ही दिवाली मनाने का मुहूर्त है, उससे पहले हनुमान जयंती होगी।
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Diwali
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
तीन साल में पहली बार पर दिवाली की तिथि को लेकर उत्तर से दक्षिण तक कोई विवाद नहीं उठा। ग्रह-नक्षत्रों की चाल और काशी से उठे पंचांगों की एकरूपता अभियान के चलते ऐसा संभव हो पाया है।
पिछले तीन साल में काशी विद्वत परिषद और बीएचयू के ज्योतिष विभाग की ओर से भारत भर के 100 से ज्यादा पंचांगों का अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन कर उन्हें एकमत किया गया।
सत्र 2026-27 के पंचांगों की एकरूपता में आने से एक तिथि और एक पर्व की धारणा सामने आई। एकरूपता कार्य के समन्वयक रहे बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि इस बार ग्रह-नक्षत्रों का मान ही है ऐसा है कि दिवाली को लेकर तिथि विवाद नहीं है।
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पिछले तीन साल में काशी विद्वत परिषद और बीएचयू के ज्योतिष विभाग की ओर से भारत भर के 100 से ज्यादा पंचांगों का अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन कर उन्हें एकमत किया गया।
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सत्र 2026-27 के पंचांगों की एकरूपता में आने से एक तिथि और एक पर्व की धारणा सामने आई। एकरूपता कार्य के समन्वयक रहे बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि इस बार ग्रह-नक्षत्रों का मान ही है ऐसा है कि दिवाली को लेकर तिथि विवाद नहीं है।
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हर बार अमावस्या सूर्यास्त के आसपास शुरू होकर अगले दिन सूर्यास्त तक होती थी। इसके कारण तिथि को लेकर कुछ लोगों की ओर से शास्त्रीय वचनों का ठीक से व्याख्या न करने के चलते भ्रम की स्थिति बन जाती थी। इस बार स्थितियां अलग हैं।
अमावस्या एक ही दिन आठ नवंबर की अर्द्धरात्रि और प्रदोष काल में रहेगी इसलिए इस साल एक ही दिन दिवाली मनाई जानी है। सूर्यास्त से लेकर दो घंटे 24 मिनट तक प्रदोष काल होगा। इसी में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।
व्रत रहकर लक्ष्मी पूजन करने बहुत लाभकारी होता है और प्रदोष काल में भोजन किया जा सकता है। इसी अमावस्या पर पितरों का श्राद्ध करने का भी विधान है। हाथ में दीपक लेकर दक्षिण की ओर अपने पितरों को दिखाना चाहिए।
पंचांग एकरूपता टीम के सदस्य रहे डॉ. सुभाष पांडेय के अनुसार, शुद्ध पंचांग गणना में तिथि को लेकर कोई भ्रम नहीं होता, लेकिन गणना और आकलन सटीक होना चाहिए। इस बार प्राकृतिक तौर पर भ्रम जैसी स्थिति नहीं बनी।
आठ नवंबर की सुबह से दिवाली का मुहूर्त
श्री काशी विश्वनाथ न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, अमावस्या आठ नवंबर को सुबह 10:50 बजे से लग जाएगी। तभी से दिवाली का मुहूर्त शुरू हो जाएगा। उससे पहले हनुमान जयंती होगी।
श्री काशी विश्वनाथ न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, अमावस्या आठ नवंबर को सुबह 10:50 बजे से लग जाएगी। तभी से दिवाली का मुहूर्त शुरू हो जाएगा। उससे पहले हनुमान जयंती होगी।
इस दिन रात 12 बजे तक दिवाली मनाने के लिए 13 घंटे 10 मिनट का मुहूर्त मिलेगा। वहीं सूर्यास्त के बाद दो घंटे 24 मिनट का प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा कर दीया जलाने का सबसे शुभ समय होगा। इस रात पितरों के श्राद्ध भी करने की परंपरा भी रही है।
विशाखा नक्षत्र की अर्द्धरात्रि में महानिशा
प्रो. नागेंद्र पांडेय ने काशी के ऋषिकेष और महावीर पंचांग से गणना कर बताया कि विशाखा नक्षत्र की अर्द्धरात्रि में महानिशा होगी। लक्ष्मी-गणेश और कुबेर की पूजा एक ही दिन होगी। वहीं सुबह 10:50 के पहले चतुर्दशी में हनुमान जयंती मनाई जाएगी। उसके बाद नहीं मनाया जा सकता।
प्रो. नागेंद्र पांडेय ने काशी के ऋषिकेष और महावीर पंचांग से गणना कर बताया कि विशाखा नक्षत्र की अर्द्धरात्रि में महानिशा होगी। लक्ष्मी-गणेश और कुबेर की पूजा एक ही दिन होगी। वहीं सुबह 10:50 के पहले चतुर्दशी में हनुमान जयंती मनाई जाएगी। उसके बाद नहीं मनाया जा सकता।