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Exclusive: पांच देशों और तमिलनाडु के 76 गांवों के 60 करोड़ दान से काशी में बनी धर्मशाला, 10 मंजिला है ये भवन
Sat, 01 Nov 2025 01:19 PM IST
प्रगति चंद
हीरालाल चौरसिया, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
हीरालाल चौरसिया, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sat, 01 Nov 2025 01:19 PM IST
सार
पूर्वांचल की सबसे बड़ी धर्मशाला दान के रुपयों से बनाई गई है। पांच देशों और दो जिलों के 48 हजार परिवारों ने 60 करोड़ रुपये दान दिए। दान देने वालों में किसान से लेकर आईआईटीयंस और उद्यमी भी हैं।
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काशी में स्थित पूर्वांचल की सबसे बड़ी धर्मशाला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्वांचल की सबसे बड़ी धर्मशाला के निर्माण में 350 दानदाताओं का सहयोग रहा है। इसके लिए एक साल में ही 60 करोड़ रुपये दान मिले थे। पांच देशों और तमिलनाडु के दो जिलों में बसे नाटकोट्टई नगरतार परिवार के 76 गांवों के 48 हजार परिवारों ने दान दिए हैं। सबसे कम 10 हजार और सबसे अधिक तीन करोड़ रुपये दान में मिले हैं।
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काशी में नाटकोट्टई नगर क्षेत्रम् से माता विशालाक्षी मंदिर में दो सौ साल पहले से श्री काशी विश्वनाथ को शृंगार भोग अर्पित करने की परंपरा है और एक धर्मशाला पहले से संचालित है। अब दूसरी 10 मंजिला धर्मशाला बन गई है।
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140 कमरों वाली है ये धर्मशाला
श्री काशी नाटकोट्टई क्षेत्रम् के अध्यक्ष लेना नारायणन ने बताया कि इस 140 कमरों वाली धर्मशाला के शिलान्यास के दिन ही इसके उद्घाटन की तिथि भी तय कर दी गई थी और इसी बीच नाटकोट्टई नगरतार परिवार के लोगों से दान की राशि जुटाई गई।
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दान देने वालों में 10 हजार रुपये सबसे कम
दान देने वालों में किसान से लेकर आईआईटीयंस और उद्यमी भी हैं। दान की राशि किसी और से नहीं ली गई है। उन्होंने बताया कि दान देने वालों में 10 हजार रुपये सबसे कम हैं। इसके बाद 10, 17, 25, 50 लाख रुपये देने वालों की संख्या ज्यादा है। एक और तीन करोड़ रुपये देने वाले भी हैं। एम.ए.आर.आर. मुथैया, अविरामी रामनाथन, रामास्वामी आदि ने भी अधिक दान दिया है।
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दो जिलों में बसा है परिवार
तमिलनाडु के शिवगंगई और पुंदुकोटई जिलों के 78 गांवों में नाटकोट्टई नगरतार परिवार बसा है। इन परिवारों के लोग पढ़-लिखकर विदेशों में भी बसे हैं। लेना नारायणन ने बताया कि जब भी कोई सेवा का कार्य होता है, तो परिवार के लोगों के सहयोग से होता है। कोई भी आयोजन होता है तो सभी एकजुट होकर भाग लेते हैं।
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दो जिलों में बसा है परिवार
तमिलनाडु के शिवगंगई और पुंदुकोटई जिलों के 78 गांवों में नाटकोट्टई नगरतार परिवार बसा है। इन परिवारों के लोग पढ़-लिखकर विदेशों में भी बसे हैं। लेना नारायणन ने बताया कि जब भी कोई सेवा का कार्य होता है, तो परिवार के लोगों के सहयोग से होता है। कोई भी आयोजन होता है तो सभी एकजुट होकर भाग लेते हैं।