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धनतेरस: 325 साल में पहली बार खुले मैदान में होंगे भगवान धनवंतरि के दर्शन, काशी में है देश की इकलौती प्रतिमा

Sun, 31 Oct 2021 12:56 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 31 Oct 2021 12:56 AM IST
सार

मोक्ष नगरी काशी में धनत्रयोदशी की रात अमृत कलश छलकेगा। तिथि विशेष पर आरोग्य अमृत बरसाने खुद भगवान धनवंतरि आएंगे। कोरोना संक्रमण काल के बाद इस साल सार्वजनिक पूजन उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 

 

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Dhanteras 2021 Dhanvantari pujan darshan god of health in  open ground only statue of country in Kashi
धनवंतरि निवास पर पत्रकार वार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धनतेरस पर भगवान धनवंतरि आरोग्य अमृत की बरसात श्रद्धालुओं पर करेंगे। दो नवंबर को वाराणसी के सुड़िया स्थित धनवंतरि निवास पर 325वें साल में धनवंतरि पूजन किया जाएगा। कोरोना संक्रमण काल के बाद इस साल सार्वजनिक पूजन उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना प्रोटोकॉल के साथ श्रद्धालुओं को भगवान धनवंतरि का दर्शन व पूजन करने का पुण्य लाभ प्राप्त हो गया।

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शनिवार को सुड़िया स्थित धनवंतरि निवास पर पत्रकार वार्ता में राजवैद्य पंडित शिव कुमार शास्त्री के पुत्र पंडित रामकुमार शास्त्री, नंदकुमार शास्त्री, समीर कुमार शास्त्री ने बताया कि कोरोना महामारी से निजात के लिए भगवान धनवंतरि की विशेष पूजा की जाएगी। भगवान धनवंतरि के अष्ट धातु की प्रतिमा का विशेष शृंगार होगा।
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आम श्रद्धालुओं को शाम चार बजे से दर्शन प्राप्त होंगे। इस बार खुले आंगन में भगवान धनवंतरि की प्रतिमा दर्शन के लिए रखी जाएगी। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा। इस दौरान उत्पल शास्त्री, आदित्य, मिहिर एवं पवन सिंह उपस्थित रहे।
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पढ़ेंः मां अन्नपूर्णा दर्शन: साल में चार दिन ही मिलते हैं माता के दर्शन, धनतेरस से अन्नकूट तक श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन

प्रतिमा 325 साल पुरानी

Dhanteras 2021 Dhanvantari pujan darshan god of health in  open ground only statue of country in Kashi
भगवान धनवंतरि की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला

पं. रामकुमार शास्त्री ने बताया कि काशी हीं नहीं पूरे भारत में एक मात्र अष्ट धातु के भगवान धन्वंतरि की मूर्ति सुड़िया स्थित धन्वंतरि निवास में राजवैद्य स्व. पंडित शिव कुमार शास्त्री के आवास में विराजमान है। प्रतिमा 325 साल पुरानी है और इसके ऊपर चांदी का छत्र मौजूद है। भगवान चांदी के सिंहासन पर विराजमान हैं और उनके चारों हाथों में अमृत का कलश, चक्र, शंख और जोंक सुशोभित हैं।

उनको विशिष्ट चमत्कारी औषधियों जैसे रस , स्वर्ण , हीरा , माणिक , पन्ना , मोती तथा जड़ीबूटियों में केशर , कस्तूरी, अंबर, अश्वगंधा, अमृता, शंखपुष्पी, मूसली आदि का विशेष भोग लगाया लगाया जाता है। भगवान के अगल बगल लगाने के लिए विशेष सुगंधित प्रभावकारी विशेष फूल हिमालय से मंगवाए जाते हैं।

प्रभु धनवंतरि के दर्शन की मान्यता

मान्यता है कि प्रभु धनवंतरि के दर्शन से वर्ष भर परिवार में रोग-व्याधि नहीं होती है। श्रीमद्भागवत में उल्लेख है कि विष्णु के 24 अवतारों में धनवंतरि भी एक थे। वह सीधे समुद्र से हाथ में अमृत कलश लेकर प्रगट हुए थे। यह काल दोपहर का था ऐसे में पूजन इस बेला में ही किया जाता है।
 
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