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गंगा तट पर श्रद्धालुओं ने किया पंचमी का स्नान
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वसंत पंचमी पर काशी में बाबा दरबार से लेकर गंगा के घाट तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। शनिवार को पंचमी का स्नान करने के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं ने गंगा तट का रुख कर लिया था। स्नान के बाद श्रद्धालु दर्शन के लिए बाबा दरबार भी पहुंचे।
भगवान भास्कर के उदीयमान होते ही गंगा तट पर आस्थावानों का हुजूम उमड़ पड़ा। गंगा के सभी प्रमुख घाटों पर स्नान के लिए लोग पहुंचते रहे। हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं का रेला बाबा दरबार में भी उमड़ा। आस्थावानों ने गंगा गोमती संगम कैथी में भी स्नान कर मार्कंडेय महादेव का दर्शन पूजन किया।
सरस्वती मां के जयकारे से गूंज उठा माता अन्नपूर्णा का दरबार
वसंत पंचमी पर अन्नपूर्णा मंदिर का प्रांगण सरस्वती माता के जयकारे से गूंज उठा। मां अन्नपूर्णा के मंदिर में मां सरस्वती का विधि-विधान से पूजन संपन्न हुआ। आरती के बाद आम भक्तों के दर्शन के लिए कपाट खोल दिए गए। अन्नपूर्णा मंदिर परिसर को सुगंधित फूलों व झालरों से सजाया गया था। मां सरस्वती की एक झलक पाने के लिये मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा।
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सरस्वती फाटक पर विराजीं मां सरस्वती
विश्वनाथ धाम में 1300 साल पूर्व आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मां सरस्वती का पूजन अर्चन विधि-विधान से संपन्न किया गया। धाम परिसर में माता सरस्वती का विग्रह अपने पुराने स्थान पर स्थापित कर पूजन हुआ। शनिवार को काशी की 13 सौ साल पुरानी परंपरा के अनुसार सरस्वती फाटक पर बने मां सरस्वती के नवनिर्मित मंदिर में माता की पूजा संपन्न हुई।
स्थापित हुई होलिकाएं
वसंत पंचमी पर शहर से लेकर गांव तक होलिका स्थापित करने की परंपरा का भी निर्वहन किया गया। पहले से चिह्नित स्थानों पर पूजन के बाद विधि-विधान से होलिका का स्वरूप स्थापित किया गया। इसके साथ ही काशी में फागुन की शुरुआत भी हो गई।
संगीत घरानों ने कला की देवी को किया नमन
वसंत पंचमी पर संगीत घरानों ने कला की देवी को नमन किया। बनारस घराने में माता प्रसाद मिश्र के आवास पर शिष्यों ने मां सरस्वती का विधि-विधान से पूजन किया। इसके साथ ही कई संगीत व कला केंद्रों में भी माता की पूजा संपन्न हुई।
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भगवान भास्कर के उदीयमान होते ही गंगा तट पर आस्थावानों का हुजूम उमड़ पड़ा। गंगा के सभी प्रमुख घाटों पर स्नान के लिए लोग पहुंचते रहे। हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं का रेला बाबा दरबार में भी उमड़ा। आस्थावानों ने गंगा गोमती संगम कैथी में भी स्नान कर मार्कंडेय महादेव का दर्शन पूजन किया।
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सरस्वती मां के जयकारे से गूंज उठा माता अन्नपूर्णा का दरबार
वसंत पंचमी पर अन्नपूर्णा मंदिर का प्रांगण सरस्वती माता के जयकारे से गूंज उठा। मां अन्नपूर्णा के मंदिर में मां सरस्वती का विधि-विधान से पूजन संपन्न हुआ। आरती के बाद आम भक्तों के दर्शन के लिए कपाट खोल दिए गए। अन्नपूर्णा मंदिर परिसर को सुगंधित फूलों व झालरों से सजाया गया था। मां सरस्वती की एक झलक पाने के लिये मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा।
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सरस्वती फाटक पर विराजीं मां सरस्वती
विश्वनाथ धाम में 1300 साल पूर्व आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मां सरस्वती का पूजन अर्चन विधि-विधान से संपन्न किया गया। धाम परिसर में माता सरस्वती का विग्रह अपने पुराने स्थान पर स्थापित कर पूजन हुआ। शनिवार को काशी की 13 सौ साल पुरानी परंपरा के अनुसार सरस्वती फाटक पर बने मां सरस्वती के नवनिर्मित मंदिर में माता की पूजा संपन्न हुई।
स्थापित हुई होलिकाएं
वसंत पंचमी पर शहर से लेकर गांव तक होलिका स्थापित करने की परंपरा का भी निर्वहन किया गया। पहले से चिह्नित स्थानों पर पूजन के बाद विधि-विधान से होलिका का स्वरूप स्थापित किया गया। इसके साथ ही काशी में फागुन की शुरुआत भी हो गई।
संगीत घरानों ने कला की देवी को किया नमन
वसंत पंचमी पर संगीत घरानों ने कला की देवी को नमन किया। बनारस घराने में माता प्रसाद मिश्र के आवास पर शिष्यों ने मां सरस्वती का विधि-विधान से पूजन किया। इसके साथ ही कई संगीत व कला केंद्रों में भी माता की पूजा संपन्न हुई।