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काशी विश्वनाथ के दर्शन को लगी सबसे लंबी लाइन
वाराणसी/ब्यूरो
Updated Wed, 13 Feb 2013 01:39 PM IST
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कुंभ के कारवां को काशी ने अपने में समेट लिया। बाबा के दर्शन को लंबी लाइन लगी। हर कदम बाबा के दरबार की ओर बढ़े, लेकिन कोई निराश नहीं हुआ। इंतजार करना पड़ा। कोई नौ घंटे तो कोई आठ घंटे तक लाइन में लगा रहा, लेकिन बाबा भोले नाथ का दर्शन सभी को मिला।
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लक्सा से चौखंभा के बीच में लंबी घुमावदार लाइन लगी। यदि सभी लाइनों को मिला दिया जाए तो यह दूरी सात किलोमीटर से अधिक थी। एक समय तो मंदिर परिसर में उमड़े श्रद्धालुओं को देखते हुए यह एनाउंस किया जाने लगा कि मंदिर परिसर में जगह नहीं है। श्रद्धालु दूसरे मंदिरों में भी दर्शन पूजन के लिए जाएं।
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पिछले 60-70 साल से यहां दर्शन पूजन करने नियमित रूप से आने वालों का कहना था कि उन्होंने इतनी लंबी लाइन पहले नहीं देखी। यात्रियों की भीड़ के चलते जाम लगा, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। अफसरों से लेकर नागरिकों तक सभी का कहना था कि यह सब बाबा की कृपा से संभव हो सका है।
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हर-हर महादेव की गूंज
मंगला आरती के बाद पट खुलते ही हर-हर महादेव के गगनभेदी जयकारे के साथ आस्थावान बाबा की झलक पाने के लिए तिल-तिल बढ़ने लगे। लक्सा, नई सड़क, दशाश्वमेध और मैदागिन-चौखंभा से ठठेरी बाजार तक भक्त लाइन में डटे हुए थे।
कंट्रोल रूम के मुताबिक, शाम सात बजे तक दो लाख भक्तों ने बाबा का दर्शन किया। शयन आरती तक यह आंकड़ा ढाई लाख से ऊपर जाने का अनुमान है। इस दिन हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के अलावा कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने भी बाबा का जलाभिषेक किया।
घुमावदार कतारें
दशाश्वमेध में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए कतार में लग रहे थे। जब भक्तों की कतार घाट की सीढ़ियों तक पहुंचने लगी, तब प्रशासन ने दो राउंड में कतार लगवाने का निर्णय लिया। दिन के 10 बजे तक दशाश्वमेध से लक्सा होते हुए एक कतार नई सड़क पर गीता मंदिर गेट से घुमा दी गई। दूसरी मैदागिन से गोलघर होते हुए पक्के महल के चौखंभा वाली गली में लगी थी। यह लाइन रामभंडार से सोरा कुआं होते हुए बुलानाला, चौक होकर छत्ताद्वार तक लगी रही।
अपनी-अपनी बारी के लिए तिल-तिल बढ़ते भक्तों की मदद के लिए सेवादार पानी, चाय और बिस्कुट लेकर पहुंचते रहे। इस दौरान वीआईपी को दर्शन कराने से कई बार लाइन में लगे लोगों को असुविधा हुई और शोर भी मचा, लेकिन हालात काबू में रहे। मंदिर परिसर में अपर मुख्य कार्यपालक पारसनाथ द्विवेदी के अलावा एएसपी (ज्ञानवापी) श्रीपति मिश्र डटे रहे।