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मनोज के देवी गीतों पर झूमे श्रोता
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 01 Sep 2016 02:00 AM IST
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manoj tiwari
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दुर्गाकुंड संगीत समारोह में दूसरे दिन भोजपुरी गायक मनोज तिवारी मृदुल ने देवी दरबार में अपनी हाजिरी लगाई। यह वही दुर्गा मंदिर है जहां से क्रिकेटर मनोज को गायक मनोज के रूप में पहचान मिली। मनोज ने बीस साल पुरानी रवायत को जिंदा रखा और देवी गीतों से समां बांध दिया। उन्होंने एक से बढ़कर एक पारंपरिक देवी गीत सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया।
भोजपुरी फिल्मो के इस सुपरस्टार ने मंदिर से जुड़े अपने संस्मरण भी साझा किए और बताया कि आज यदि वह संगीत जगत में अपनी एक अलग पहचान बना पाने में कामयाब हुए हैं तो इस पवित्र स्थान (दुर्गा मंदिर) का सबसे अहम योगदान है। कहा कि जब भी मुसीबत में रहा, देवी दुर्गा के आशीर्वाद से ही उबर पाया। वादा किया कि जब तक गला साथ देगा वे यहां संगीत समारोह में आते रहेंगे और देवी चरणों में गीत सुनाते रहेंगे। उन्होंने श्रोताओं की मांग पर पारंपरिक देवी गीत पचरा निमिया के डार हो मईया सुनाकर तालियां बटोरी। इसके बाद उन्होंने ‘हम तेरे बिन जी ना सकेंगे मां’सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इससे पहले फूलों से सजे माता के दरबार में संगीत निशा की शुरुआत अलीशा मिश्र के तबला वादन से हुई। तबले पर उन्होंने तीन ताल, गत, परन, टुकड़ा आदि बजाकर वाहवाही बटोरी। हारमोनियम पर संगत आनंद मिश्र ने किया। इनके बाद अमृत मिश्र एवं वसुंधरा शर्मा ने कथक की युगलबंदी पेश की। तबले पर आनंद मिश्र ने संगत किया जबकि शक्ति मिश्र ने बोल पढ़े। इस जोड़ी ने नृत्यांगनी की प्रस्तुति शाबाशी बटोरी। दुर्गा स्तुति के बाद उठान, तोड़ा, टुकड़ा, परन, तिहाइयों के अलावा लड़ियों और चक्करदार की प्रस्तुति से इन्होंने माहौल बनाया। कथक नृत्य के बाद मंच संभाला सितार वादक शिवांग मिश्र ने। उन्होंने तीन ताल में बंदिश बजाई। जसवंती राग से रामशंकर ने एकल गायन की शुरुआत की। उनके भजन हे जगजननी मात मेरी पर श्रोता देर तक भक्ति रस में गोते लगाते रहे। भोलानाथ ने तबले पर और पंकज मिश्र ने हारमोनियम पर संगत किया। इनके बाद राकेश कुमार और अंकुर मिश्र ने सितार और बांसुरी की युगलबंदी पेश की। तबले पर किशोर कुमार मिश्र ने संगत किया। कार्यक्रम का संचालन कृष्ण कुमार ने किया।
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भोजपुरी फिल्मो के इस सुपरस्टार ने मंदिर से जुड़े अपने संस्मरण भी साझा किए और बताया कि आज यदि वह संगीत जगत में अपनी एक अलग पहचान बना पाने में कामयाब हुए हैं तो इस पवित्र स्थान (दुर्गा मंदिर) का सबसे अहम योगदान है। कहा कि जब भी मुसीबत में रहा, देवी दुर्गा के आशीर्वाद से ही उबर पाया। वादा किया कि जब तक गला साथ देगा वे यहां संगीत समारोह में आते रहेंगे और देवी चरणों में गीत सुनाते रहेंगे। उन्होंने श्रोताओं की मांग पर पारंपरिक देवी गीत पचरा निमिया के डार हो मईया सुनाकर तालियां बटोरी। इसके बाद उन्होंने ‘हम तेरे बिन जी ना सकेंगे मां’सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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इससे पहले फूलों से सजे माता के दरबार में संगीत निशा की शुरुआत अलीशा मिश्र के तबला वादन से हुई। तबले पर उन्होंने तीन ताल, गत, परन, टुकड़ा आदि बजाकर वाहवाही बटोरी। हारमोनियम पर संगत आनंद मिश्र ने किया। इनके बाद अमृत मिश्र एवं वसुंधरा शर्मा ने कथक की युगलबंदी पेश की। तबले पर आनंद मिश्र ने संगत किया जबकि शक्ति मिश्र ने बोल पढ़े। इस जोड़ी ने नृत्यांगनी की प्रस्तुति शाबाशी बटोरी। दुर्गा स्तुति के बाद उठान, तोड़ा, टुकड़ा, परन, तिहाइयों के अलावा लड़ियों और चक्करदार की प्रस्तुति से इन्होंने माहौल बनाया। कथक नृत्य के बाद मंच संभाला सितार वादक शिवांग मिश्र ने। उन्होंने तीन ताल में बंदिश बजाई। जसवंती राग से रामशंकर ने एकल गायन की शुरुआत की। उनके भजन हे जगजननी मात मेरी पर श्रोता देर तक भक्ति रस में गोते लगाते रहे। भोलानाथ ने तबले पर और पंकज मिश्र ने हारमोनियम पर संगत किया। इनके बाद राकेश कुमार और अंकुर मिश्र ने सितार और बांसुरी की युगलबंदी पेश की। तबले पर किशोर कुमार मिश्र ने संगत किया। कार्यक्रम का संचालन कृष्ण कुमार ने किया।
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