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BHU में नई बहस: पीपल-बरगद पर धागा और दीया जलाने पर रोक की मांग, वीसी को लिखा पत्र वायरल; जानें मामला

Wed, 20 May 2026 01:11 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 20 May 2026 01:11 PM IST
सार

Varanasi News: बीएचयू के कुलपति को संबोधित यह पत्र सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कुछ लोग इसे पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर उचित बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय मानकर विरोध जता रहे हैं।

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Demand to Ban Tying Threads Lighting Lamps on Peepal and Banyan Trees Request Addressed BHU Vice-Chancellor
यही पत्र बना चर्चा का विषय। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में पीपल और बरगद के पेड़ों पर धागा बांधने तथा दीया जलाने पर रोक लगाने की मांग को लेकर एक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पत्र में दावा किया गया है कि पेड़ों पर धागा बांधने और दीया जलाने से उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच रहा है। वायरल पत्र को लेकर विश्वविद्यालय परिसर और सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है।

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वायरल पत्र 19 मई 2026 की तारीख का बताया जा रहा है, जिसे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति को संबोधित किया गया है। पत्र में लिखा गया है कि बीएचयू परिसर में स्थित पीपल और बरगद के पेड़ पर्यावरण संरक्षण और ऑक्सीजन उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ लोग इन पेड़ों पर धागा बांधते हैं और नीचे दीया जलाते हैं, जिससे पेड़ों को नुकसान पहुंचता है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि धागा बांधने से पेड़ों की वृद्धि प्रभावित होती है, जबकि दीया जलाने से निकलने वाली गर्मी से तने की ऊपरी परत प्रभावित होती है।

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पत्र वायरल

पत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की गई है कि परिसर में इन पेड़ों पर धागा बांधने और दीया जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही सूचना पट्ट लगवाने और सुरक्षा कर्मियों को निर्देश देने की भी अपील की गई है ताकि लोग ऐसा न करें। पत्र के अंत में यह भी कहा गया है कि यह कदम बीएचयू परिसर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने में सहायक होगा।

वायरल पत्र पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर उचित बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय मानकर विरोध जता रहे हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस वायरल पत्र को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर पत्र को लेकर बहस जारी है और लोग अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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