UP News: न्याय में देरी, न्याय न मिलने के समान...वाराणसी में परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों का प्रशिक्षण शुरू
वाराणसी के सर्किट हाउस सभागार में वाराणसी सहित 12 जिलों के परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शनिवार से शुरू हुआ। पहले दिन न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने संबोधित किया।
विस्तार
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय न मिलने के समान है। समय पर न्याय प्राप्त करने में कठिनाई के कारण वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रियाएं जैसे बातचीत, मध्यस्थता, पंच निर्णय और सुलह को बढ़ावा मिला है। यह मंच पक्षकारों को मुकदमेबाजी का सहारा लिए बिना समाधान खोजने का अवसर प्रदान करते हैं। वह सर्किट हाउस सभागार में वाराणसी सहित 12 जिलों के परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कई तलाकशुदा जोड़े पाते हैं कि मध्यस्थता उन्हें तलाक के मुकदमेबाजी की उच्च वित्तीय और भावनात्मक लागतों से बचने की अनुमति देती है। उन्हें शाब्दिक रूप से अदालत कक्ष के बाहर रखते हैं।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि पारिवारिक विवादों का व्यक्तियों और उनके प्रियजनों के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वे परिवारों के सामंजस्य और स्थिरता को चुनौती देते हुए हमारे समाज के मूल को छूते हैं। न्यायाधीशों के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम एक ऐसा मंच प्रदान करें, जहां परिवारों को सांत्वना, समझ और समाधान मिल सके।
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पारंपरिक प्रतिकूल अदालती कार्रवाई हालांकि कुछ मामलों में आवश्यक है, लेकिन हमेशा सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने और पारिवारिक रिश्तों को संरक्षित करने के लिए अनुकूल नहीं होती है। न्यायमूर्ति अजय भनोट ने सभी प्रतिभागियों को उपयोगी प्रशिक्षण सत्र के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण के बाद फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश बेहतर इंसान और बेहतर न्यायाधीश बनकर सामने आएंगे।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के मार्गदर्शन में कार्यक्रम
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश के पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए मध्यस्थता तकनीकों पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सर्किट हाउस सभागार में हुआ। इसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की अध्यक्षता में पारिवारिक न्यायालय मामलों का संवेदीकरण, मध्यस्थता और सुलह केंद्र समिति, इलाहाबाद के सहयोग से आयोजित किया गया है। पारिवारिक न्यायालय मामलों के संवेदीकरण समिति के सदस्य न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर और वाराणसी के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मौजूद रहे।
पारिवारिक विवादों को मध्यस्थता से निपटाने पर जोर
प्रशिक्षण में पारिवारिक विवादों को मध्यस्थता से निपटाने पर जोर दिया गया। साथ ही मध्यस्थता की तकनीक पर चर्चा हुई। मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम में वाराणसी के साथ आज़मगढ़, बलिया, भदोही के ज्ञानपुर, चंदौली, देवरिया, गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, मिर्जापुर, प्रतापगढ़ और सोनभद्र के पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश शामिल हैं। वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने उद्घाटन सत्र में सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रशिक्षण देने वालों में सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति के विशेषज्ञ मध्यस्थता प्रशिक्षक अनूप कुमार श्रीवास्तव, नीरज उपाध्याय, राजलक्ष्मी सिन्हा और संदीप सक्सेना शामिल हैं।