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Varanasi News: बिजली कनेक्शन में देरी, फरवरी में शुरू होगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट
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वाराणसी। देश के पहले वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को चार महीने बाद बिजली कनेक्शन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। शनिवार को बिजली निगम ने प्लांट को एनओसी दी है। प्लांट के संचालन में दो मेगावाट बिजली की आवश्यकता है। जिसके लिए 132 केवीए छावनी उपकेंद्र और डाफी उपकेंद्र से दो लाइनें खींची जाएंगी। इसमें करीब महीने भर का समय जाएगा। इसके बाद ही प्लांट संचालित हो पाएगा।एनटीपीसी द्वारा रमना में 25 एकड़ जमीन में बनाए जा रहे प्लांट को बनाने में 150 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसके शुरू होने पर प्रति दिन 600 टन कचरे से 200 टन कोयले का उत्पादन हो सकेगा। कचरे से कोयला बनाने वाला यह देश का पहला प्लांट होगा। इसका सफल परीक्षण अक्तूबर 2022 में हो चुका है। कोयला के उत्पादन के बाद आसपास के जिलों में संबंधित कंपनियों को बेचा जाएगा।
नगर निगम के अनुसार वाराणसी में आम दिनों में प्रतिदिन 600 टन तथा खास मौकों पर 800 टन तक कचरा निकलता है। बड़ी ट्रकों से इसे शहर के बाहर कूड़ा निस्तारण प्लांटों तक पहुंचाया जाता है। पहले प्लांट को दिसंबर 2023 तक शुरू करने का लक्ष्य था। जो बिजली कनेक्शन न मिल पान के कारण टला। बिजली निगम की मानें तो बीते शनिवार को प्लांट को एनओसी दे दी गई है। जल्द ही कनेक्शन भी दिया जाएगा।
प्रोजेक्ट सफल रहा तो अन्य प्रदेशों में भी लगेगा प्लांट
प्लांट की शुरुआत के बाद इसे तीन साल तक ट्रायल के तौर पर चलाया जाएगा। ट्रायल पर यदि यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो अन्य प्रदेशों में भी प्लांट लगाया जाएगा। प्लांट निर्माण आगामी 25 साल को ध्यान में रखकर किया जा गया है। प्लांट की क्षमता आठ सौ टन से अधिक कचरा प्रसंस्करण की होगी।
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प्लांट को चलाने के लिए दो मेगावाट बिजली कनेक्शन की आवश्यकता है। कनेक्शन देने की कवायद बिजली निगम की ओर से की जा रही है। जल्द ही कनेक्शन मिलने की उम्मीद है। - आशीषरंजन, वरिष्ठ प्रबंधक, एनटीपीसी
नेहिया में भी प्लास्टिक अपशिष्ट प्लांट को नहीं मिला कनेक्शन
चिरईगांव के नेहिया गांव में पंचायत राज विभाग की ओर से प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट बनाया गया है। प्लांट का निर्माण पूरा हो चुका है। पंचायती राज विभाग की ओर से मार्च 2023 में ही कनेक्शन का आवेदन किया गया है। बावजूद इसके अब तक कनेक्शन नहीं मिल पाया है। बिजली का कनेक्शन न हो पाने के कारण प्लांट के संचालन में देरी हो रही है। इस प्लांट में रोजाना एक टन प्लास्टिक को रिसाइकिल किया जाएगा।
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नगर निगम के अनुसार वाराणसी में आम दिनों में प्रतिदिन 600 टन तथा खास मौकों पर 800 टन तक कचरा निकलता है। बड़ी ट्रकों से इसे शहर के बाहर कूड़ा निस्तारण प्लांटों तक पहुंचाया जाता है। पहले प्लांट को दिसंबर 2023 तक शुरू करने का लक्ष्य था। जो बिजली कनेक्शन न मिल पान के कारण टला। बिजली निगम की मानें तो बीते शनिवार को प्लांट को एनओसी दे दी गई है। जल्द ही कनेक्शन भी दिया जाएगा।
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प्रोजेक्ट सफल रहा तो अन्य प्रदेशों में भी लगेगा प्लांट
प्लांट की शुरुआत के बाद इसे तीन साल तक ट्रायल के तौर पर चलाया जाएगा। ट्रायल पर यदि यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो अन्य प्रदेशों में भी प्लांट लगाया जाएगा। प्लांट निर्माण आगामी 25 साल को ध्यान में रखकर किया जा गया है। प्लांट की क्षमता आठ सौ टन से अधिक कचरा प्रसंस्करण की होगी।
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प्लांट को चलाने के लिए दो मेगावाट बिजली कनेक्शन की आवश्यकता है। कनेक्शन देने की कवायद बिजली निगम की ओर से की जा रही है। जल्द ही कनेक्शन मिलने की उम्मीद है। - आशीषरंजन, वरिष्ठ प्रबंधक, एनटीपीसी
नेहिया में भी प्लास्टिक अपशिष्ट प्लांट को नहीं मिला कनेक्शन
चिरईगांव के नेहिया गांव में पंचायत राज विभाग की ओर से प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट बनाया गया है। प्लांट का निर्माण पूरा हो चुका है। पंचायती राज विभाग की ओर से मार्च 2023 में ही कनेक्शन का आवेदन किया गया है। बावजूद इसके अब तक कनेक्शन नहीं मिल पाया है। बिजली का कनेक्शन न हो पाने के कारण प्लांट के संचालन में देरी हो रही है। इस प्लांट में रोजाना एक टन प्लास्टिक को रिसाइकिल किया जाएगा।