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घटते प्राकृतिक संसाधन कृषि वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती
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बीएचयू में कृषि विज्ञान संस्थान के प्रसार शिक्षा विभाग और इंडियन सोसाइटी आफ एक्सटेंशन एजूकेशन नई दिल्ली के तत्वावधान में तीन दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। पहले दिन आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य से कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई।
मुख्य अतिथि प्रदेश के कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत ने कहा कि जिस तरह से आबादी बढ़ती जा रही है, उसके मुकाबले पर्याप्त संसाधन की जरूरत है। तेजी से घटते प्राकृतिक संसाधन कृषि वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। शताब्दी कृषि सभागार में आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुवादी और अभिनव विस्तार दृष्टिकोणों के माध्यम से भारतीय कृषि को बदलना विषय पर कृषि मंत्री राजपूत ने कहा कि प्रसार वैज्ञानिकों द्वारा नवीनतम तकनीकियों को समय से किसानों तक पहुंचाना समय की मांग है।
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा के कुलपति और इंडियन सोसायटी आफ एक्सटेंशन एजूकेशन नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. यूएस गौतम ने कहा कि प्रसार शिक्षा, कृषि शिक्षा का मुख्य आधार है। बीएचयू के प्रभारी कुलपति प्रो. वीके शुक्ला ने इस तरह की संगोष्ठी को कृषि विकास के लिए बहुत उपयोगी बताया। इस दौरान प्रो. रमेश चंद, प्रो. जीएस बोहरा, प्रो. बी जिर्ली, डॉ. एमएस नैन आदि मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि प्रदेश के कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत ने कहा कि जिस तरह से आबादी बढ़ती जा रही है, उसके मुकाबले पर्याप्त संसाधन की जरूरत है। तेजी से घटते प्राकृतिक संसाधन कृषि वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। शताब्दी कृषि सभागार में आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुवादी और अभिनव विस्तार दृष्टिकोणों के माध्यम से भारतीय कृषि को बदलना विषय पर कृषि मंत्री राजपूत ने कहा कि प्रसार वैज्ञानिकों द्वारा नवीनतम तकनीकियों को समय से किसानों तक पहुंचाना समय की मांग है।
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बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा के कुलपति और इंडियन सोसायटी आफ एक्सटेंशन एजूकेशन नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. यूएस गौतम ने कहा कि प्रसार शिक्षा, कृषि शिक्षा का मुख्य आधार है। बीएचयू के प्रभारी कुलपति प्रो. वीके शुक्ला ने इस तरह की संगोष्ठी को कृषि विकास के लिए बहुत उपयोगी बताया। इस दौरान प्रो. रमेश चंद, प्रो. जीएस बोहरा, प्रो. बी जिर्ली, डॉ. एमएस नैन आदि मौजूद रहे।
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