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घटती कमाई, बढ़ती महंगाई से सरकारी स्कूलों में बढ़े दाखिले

Sat, 18 Sep 2021 01:05 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 18 Sep 2021 01:05 AM IST
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Decreasing earnings, rising inflation increased admissions in government schools
कोरोना काल में बढ़ी महंगाई, नौकरी छूटने, वेतन घटने, धंधा मंदा होने से घरों की अर्थव्यवस्था बिगड़ गई है। वहीं, अभिभावकों के सामने संकट है कि वह निजी स्कूलों की भारी भरकम फीस कैसे चुकाएं, लिहाजा वह बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला करा रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों में तेजी से बढ़ते दाखिलों के आंकड़े यही बता रहे हैं। कंपोजिट विद्यालय केशरीपुर में इस सत्र में अब तक 120 बच्चों ने प्रवेश लिया है। वहीं, प्राथमिक विद्यालय रोहनिया में अब तक 50 नए बच्चे प्रवेश ले चुके हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय नरऊर में 60 बच्चों ने दाखिला लिया है। प्राथमिक विद्यालय नरऊर में 30 बच्चों ने प्रवेश लिया है। प्राथमिक विद्यालय घोसाबाद प्रथम में 40 बच्चों ने प्रवेश लिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह की माने तो साल 2019-20 में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या डेढ़ लाख थी। यह 20-21 में बढ़कर एक लाख 84 हजार हो गई। वर्तमान में बच्चों की संख्या एक लाख 96 हजार है। उनका दावा है कि ये संख्या माह के अंत तक दो लाख हो जाएगी।
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केस वन
मंडुवाडीह निवासी हरीश अरोड़ा की बेटी पिछले साल तक केराकतपुर स्थित एक बड़े निजी विद्यालय में पढ़ाई कर रही थी। इस साल पिता ने अपनी बेटी मनप्रीत का प्रवेश भिटारी के प्राथमिक विद्यालय के कक्षा दो में करा दिया है। नंदू सिंह ने भी बेटी संध्या का प्रवेश प्राथमिक विद्यालय भिटारी में कराया है। प्रधानाध्यापक रविंद्र सिंह ने बताया कि अब तक विद्यालय में 98 नामांकन में से 46 बच्चे कक्षा दो से पांच में प्रवेश ले चुके हैं। ये सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाई करते थे। वहीं, 52 बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने कक्षा एक में प्रवेश लिया है। पिछले पांच साल में कक्षा एक में प्रवेश लेने की यह सर्वाधिक संख्या है। बच्चों की संख्या ज्यादा होने के कारण सोमवार को विद्यालय में नो एडमिशन का बोर्ड लगाने की तैयारी है।
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केस दो
ककरमत्ता निवासी राकेश सोनकर के दो बच्चे अंकित व अनन्या पहले एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते थे। कोरोना काल में उन्होंने दोनों का प्रवेश प्राथमिक विद्यालय मंडुवाडीह में करा दिया। राकेश के यहां किराए पर रहने वाले परिवार का बच्चा भी इसी विद्यालय में पढ़ाई करता है। पहली बार देश में लॉकडाउन लगा तो राकेश के बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती थी, लेकिन किराए पर रहने वाले बच्चों के स्कूल से हमेशा फोन आते थे। जिसके बाद राकेश ने बच्चों को पांचवीं तक इसी विद्यालय में पढ़ाने का फैसला किया। अब तक यहां 60 बच्चों ने इस सत्र में प्रवेश लिया है।
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प्रवेश बढ़ने की वजह
कोरोना के कारण बिगड़ी आर्थिक स्थिति
कॉन्वेंट की तर्ज पर परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई
बंद होने के बाद भी निजी विद्यालय मोटी फीस वसूल रहे हैं।
वर्जन
परिषदीय स्कूलों में नामांकन बढ़ रहा है। कई स्कूलों में नो एडमिशन का बोर्ड भी लगाना पड़ा है, क्योंकि वहां सीटें कम पढ़ गई हैं। नए बच्चों के साथ निजी विद्यालयों से भी बच्चे प्रवेश ले रहे हैं। - राकेश सिंह, बीएसए
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