UP News: बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में 11 महीने में आया फैसला, दोषी को फांसी; 60 हजार लगा जुर्माना
Varanasi News: वाराणसी में दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या करने के मामले में दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है। रामनगर थाना क्षेत्र में 24 दिसंबर 2024 को वारदात हुई थी। 11 महीने के अंदर फैसला आया। मामले को लेकर सात दिन में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। वहीं अभियोजन की तरफ से सात गवाह पेश किए।
विस्तार
सजा सुनाते वक्त अदालत ने तल्ख टिप्पणी की और इरशाद को वहशी बताया। अदालत ने कहा कि दोषी ने पहले बच्ची से दुष्कर्म किया, फिर गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद पत्थर से कूंच दिया। ऐसा मनुष्य नहीं कर सकता है। इरशाद वहशी प्रवृत्ति का है। ऐसा व्यक्ति समाज के लिए खतरा है। उसे खुले में छोड़ना समाज के लिए घातक होगा। इरशाद ने निर्ममता की सारी हदें पार कीं और बच्ची को असहनीय पीड़ा दी इसलिए फांसी की सजा दी जाती है।
अभियोजन के मुताबिक आठ साल की बच्ची को 24 दिसंबर 2024 को रामनगर थाना क्षेत्र से उस वक्त अगवा किया गया था जब वह मच्छर मारने वाला क्वायल लेने दुकान पर जा रही थी। 25 दिसंबर को उसका शव बहादुरपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में मिला था। पिता की तहरीर के आधार पर रामनगर थाने की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज और मामले की छानबीन शुरू की।
इसे भी पढ़ें; दालमंडी चौड़ीकरण: भवनों को तोड़ने पहुंची टीम, हिजाब पहन कर महिलाओं ने किया विरोध, कहासुनी के बाद लौटी टीम
जांच में सामने आया सच
13 दिन में पुलिस ने पूरी की विवेचना
साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 13 दिन में विवेचना पूरी की और सात जनवरी 2025 को आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया। विशेष न्यायाधीश ( पॉक्सो एक्ट तृतीय) ने मामले की सुनवाई की और 7 नवंबर 2025 को फैसला सुरक्षित कर लिया। अदालत ने 18 नवंबर को इरशाद को फांसी की सजा सुनाई। अभियोजन की तरफ से सात गवाह पेश किए गए। इनमें बच्ची के पिता के साथ ही कुछ पुलिसकर्मी और बच्ची की पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टर भी शामिल थीं।
बोरे में भरकर फेंका था बच्ची का शव
सीसीटीवी से पहचान, मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार हुआ था इरशाद
अभियोजन के मुताबिक तत्कालीन रामनगर थाना प्रभारी निरीक्षक राजू सिंह ने सीसीटीवी की जांच की। इससे पता चला कि इरशाद ने ही बच्ची को अगवा किया था। पुलिस जब इरशाद के घर दबिश को पहुंची तो वह भाग निकला। 26 दिसंबर की रात रामनगर पुलिस ने आरोपी इरशाद को डोमरी क्षेत्र में मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। उसके पैर में गोली लगी थी। पूछताछ में इरशाद ने पुलिस को बताया था कि जैसे ही बच्ची दुकान से सामान लेकर घर लौट रही थी तभी उसका मुंह दबाकर सुनसान स्थान पर ले गया और दुष्कर्म किया। बच्ची के जिंदा बचने और गिरफ्तारी के भय से स्कार्फ से गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को बोरे में भरा और सरकारी स्कूल में फेंक दिया।
बच्ची की शर्ट, बटन, खून से सनी ईंट, बोरे को साक्ष्य के तौर पर पेश किया
अभियोजन के मुताबिक, पुलिस ने वारदात स्थल से बरामद बच्ची की शर्ट, बटन, खून से सनी ईंट, बोरे आदि साक्ष्य के तौर प्रस्तुत किए। फॉरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य पुख्ता साक्ष्य कोर्ट में पेश किया गया। वर्तमान में रोहनिया थाना प्रभारी राजू सिंह ने बताया कि दोषी इरशाद ने बहुत ही बेरहमी से बच्ची की हत्या की थी। बोरे में शव भरने के बाद बच्ची के चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर वजनी पत्थर से कई बार कूंचा था। तीन स्थानों पर वारदात को अंजाम दिया था।