फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Death of turtle Lung infection due pollution could lived for 40 more years buried

वाराणसी में कछुए की माैत : प्रदूषण से फेफड़े में हुआ संक्रमण, 40 साल और जिंदा रह सकता था; यहा किया गया दफन

Wed, 05 Feb 2025 11:49 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 05 Feb 2025 11:49 AM IST
सार

इस प्रजाति के कछुओं के पैर में निशान होते हैं। कछुआ साफ्ट सील टर्टल प्रजाति का था। इसकी उम्र करीब 120 से 150 तक होती है। मरने वाला कछुए की उम्र करीब 80 साल थी। 

विज्ञापन
Death of turtle Lung infection due pollution could lived for 40 more years buried
सारनाथ में दफन किया गया कछुआ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फेफड़े में संक्रमण से हुए छेद के कारण शंकुलधारा का कछुआ मरा था। इसे लंग्स इंफेक्शन एंड लंग्स पंचर कहा जाता है। मंगलवार को सारनाथ में कछुआ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह सामने आया। सारनाथ स्थित मिनी जू के पीछे कछुआ को दफन किया गया।

विज्ञापन


सारनाथ में वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग के तीन डाक्टरों डॉ. प्रताप नारायण, डॉ. राम आधार चौधरी और डॉ. सुधांशु सिंह ने कछुआ का पोस्टमार्टम किया। डाक्टरों के अनुसार चीनी मांझे से मौत नहीं हुई है। 
विज्ञापन


बताया जा रहा है कि वह अभी 40 साल तक और जीवित रह सकता था। शंकुलधारा पोखरे का पानी केमिकलयुक्त था। उसके फेफड़े में पानी भर गया था और लंग्स पंचर था। इससे सांस नहीं ले पा रहा था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जांच अधिकारी और उप प्रभागीय अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि स्थानीय लोगों ने मरे कछुआ को द्वारकाधीश मंदिर के पीछे मैदान में दफन कर दिया था। कछुआ को जमीन से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया है। उसे सारनाथ स्थित मिनी जू के पीछे दफन किया गया है।

शंकुलधारा पोखरे सहित कई तालाबों में गंदगी
शंकुलधारा पोखरे में पिंडदान के दौरान लोग सिंदूर, हल्दी सहित केमिकल युक्त सामान डाल देते हैं। इसका असर जलीय जंतुओं पर पड़ता है। शहर में 63 कुंड और तालाब हैं। ज्यादातर कुंडों में गंदगी है। 

इससे अक्सर मछलियों और कछुओं की मौत होती है। मूर्ति विसर्जन और पूजा पाठ का सामान डालने से केमिकल चला जाता है। साथ ही लोग कपड़े तालाबों में कपड़े धुलते हैं। इससे भी गंदगी बढ़ती है। 

कुंडों और तालाबों से कछुओं को रेस्क्यू किया जाएगा
कछुआ की मौत के बाद वन विभाग ने शहर के सभी तालाबों का सर्वे कराने का योजना बनाई है। विभाग के अधिकारी ने बताया कि कुंडों और तालाबों से कछुआ को रेस्क्यू कर उसे संरक्षित किया जाएगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed