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यूपी: दिन-रात करनी पड़ी मशक्कत, 15 साल बाद खतौनी में जिंदा हुए मृत भोला सिंह, जानें पूरा मामला

Mon, 08 Feb 2021 02:19 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 08 Feb 2021 02:19 PM IST
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dead Bhola Singh after 15 years alive in Khatauni mirzapur up
तहसीलदार सुनील कुमार भोला को खतौनी का कागज देते हुए - फोटो : अमर उजाला

मिर्जापुर जिले के सदर तहसील क्षेत्र के अमोई निवासी भोला सिंह 15 वर्षों के संघर्ष के बाद खतौनी में भी ‘जिंदा’ हो गए। तहसीलदार सदर सुनील कुमार की अदालत ने मुकदमे का फैसला कर उनको खतौनी में जिंदा कराने का आदेश दिया है। अमर उजाला ने भोला सिंह के लिए जिंदा रहते उनको खतौनी में मृत दिखाए जाने का मामला उठाया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब इस मामले का संज्ञान लिया तो जांच में तेजी आई।

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तहसील सदर क्षेत्र के अमोई निवासी भोला सिंह 16 जनवरी को जिला मुख्यालय पर पर अपने को जिंदा साबित करने के लिए धरने पर बैठे थे। अमर उजाला ने उनकी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर जिला प्रशासन हरकत में आया। उसके बाद शुरु हुई उसके वरासत की जांच की कवायद। भोला सिंह का आरोप था कि उसके भाई राजनारायण ने तहसील कर्मियों से मिलीभगत कर खतौनी में उसे मृत दिखाकर उसकी जायदाद अपने नाम करा ली।
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इसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू की तो पता चला कि भोला लालगंज तहसील क्षेत्र के रामपुर खोमर का निवासी है। वहां पर जब जांच टीम गई तो पता चला कि भोला का असली नाम श्यामनारायण सिंह है। रामपुर खोमर गांव के इनके साले रमाशंकर सिंह कहते हैं कि गांव में इन्हें श्याम नारायण के नाम से जाना जाता है और भोला सिंह  भी नाम है। इनका इनका मूल निवास अमोई गांव  है। भोला सिंह कागजात के मामले में पूछने पर कहते हैं कि घर पर कोई कागज मौजूद नहीं है।

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ग्रामीण एक बात तो जरूर कह रहे हैं कि इनकी ससुराल इसी गांव में है। अमोई गांव निवासी राज नारायण सिंह को अपना भाई बताने वाले भोला सिंह उर्फ श्याम नारायण का प्रकरण एक मुकदमा के रूप में जिले में चल रहा है। जब से मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान में लिया है तब से यह प्रकरण गांव के लोगों ने जाना है इसके पूर्व क्या विवाद था गांव के सारे लोगों को पता नहीं था। तहसीलदार सुनील कुमार ने कहा कि भोला के मुकदमे का निर्णय हो गया है। वरासत में उसका नाम खतौनी में दर्ज होगा। इस मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने एसडीएम लालगंज को जिम्मेदारी दी थी। वहां से जांच आख्या जिलाधिकारी को भेजी गई। उसके बाद शनिवार को यह निर्णय आया।

डीएनए जांच के लिए नहीं आया राजनारायण

मिर्जापुर। इस पेचीदे मामले की जांच के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लिया गया। भोला ने 23 जनवरी को डीएनए जांच के लिए अपना सैंपल दिया था। उसके बाद उसके भाई राजनारायण को भी जांच के लिए बुलाया गया लेकिन वह नहीं आया। उसकी अनुपस्थिति ने भी इस मामले में भोला सिंह का साथ दिया।

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