आजमगढ़ में डीसीबी प्रबंधक ने फर्जी खाते खोलकर किया 1.45 करोड़ का घोटाला, गिरफ्तार
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घोटाले में इनके कार्यकाल में ही फर्जी खाते खोले गए थे और इनकी मिलीभगत से ही चेकों को भुनाया गया था। गुरुवार को रोडवेज से गिरफ्तारी के समय आरोपी ने क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर को दांत से काट भी लिया।
समाज कल्याण विभाग में वर्ष 2007 से 2011 के दौरान हुए 1.45 करोड़ रुपये की घोटाले की जांच तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से सीडीओ की नेतृत्व में बनी कमेटी को सौंपी थी।
कमेटी में शामिल अपर जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी सुनील सिंह ने मामले की जांच की तो पाया गया कि जून 2011 में तत्कालीन बाबू जोखन राम का स्थानांतरण महारागंज होने पर उन्होंने विधवा, विकलांग पेंशन और छात्रवृत्ति के 204 ऐसे चेक नवागत बाबू गंगासागर राय को सौंपे थे जो लाभार्थी के ना मिलने के कारण बैंकों से लौट आए थे।
इसे समाज कल्याण विभाग के नेशनल खाते में जमा कराना था। तत्कालीन बाबू गंगासागर राय ने इसमें से कई चेकों को विभाग के खाते में जमा कराने के बजाय जिला सहकारी बैंक कप्तानगंज के प्रबंधक की मिलीभगत से फर्जी खातों में जमा कर 1.45 करोड़ की धनराशि भुना ली। अधिकारी की मदद से धन का आहरण कर इसका गबन कर लिया गया।
आरोपी के खिलाफ छात्रवृत्ति गबन का भी मामला है दर्ज
मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच की ओर से की जा रही है। गुरुवार को क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर कुंवर वीपी सिंह, निरीक्षक मुकेश कुमार और आरक्षी प्रवीण सिंह को जानकारी मिली कि आरोपी आजमगढ़ रोडवेज पर कहीं जाने की फिराक में है। पुलिस ने मौके से इसे गिरफ्तार कर लिया।
इंस्पेक्टर कुंवर वीपी सिंह ने बताया कि आरोपी प्रबंधक की ओर से पहले गोविंद पुत्र सुरेश निवासी देवखरी के नाम से फर्जी खाता खुलवाया गया। फिर इसी के सत्यापन से चार और फर्जी खाते खुलवाए गए।यही नहीं फर्जी हस्ताक्षर से समाज कल्याण विभाग के नाम से भी खाता खुलवाया गया।
उसमें भी चेकों को भुनाया गया। एक-एक खाते में एक दिन में कई-कई चेकों को भुनाया जाता था और प्रबंधक की ओर से इसकी कोई जानकारी नहीं की जाती थी। इससे इस गबन में उनके शामिल होने की पुष्टि हुई थी। मामले में वांछित अन्य अभियुक्तों की जांच की जा रही है।