फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Danger of serious diseases due to pollution

Varanasi: प्रदूषण की गंभीर बीमारियों का खतरा , रोजाना 15000 बीमार, सूक्ष्म जहरीले कण पहुंचा रहे नुकसान

Fri, 20 Sep 2024 10:17 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Fri, 20 Sep 2024 10:17 PM IST
सार

प्रदूषण की गंभीर बीमारियों का खतरा अस्पताल की कतारों में देखने को मिल रहा है । अस्पताल के आंकड़े भी यही कह रहे हैं कि दस फीसदी मरीजों की बीमारियों का कारण प्रदूषण है । सूक्ष्म जहरीले कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं लोगों को श्वास की बीमारी हो रही है।
 

विज्ञापन
Danger of serious diseases due to pollution
वायु प्रदूषण का कहर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू, जिला अस्पताल, मंडलीय अस्पताल, शास्त्री अस्पताल और जिले के सीएचसी-पीएचसी में रोजाना करीब 15000 लोगों की ओपीडी हो में करीब दस फीसदी मरीज तो प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के कारण पहुंच रहे हैं। अस्पताल के आंकड़े तो यही कह रहे हैं।

विज्ञापन


बीएचयू में रोजाना करीब छह हजार की ओपीडी है और यहां करीब फेफड़ों से जुड़े करीब 300 मरीज पहुंचते हैं और वहीं त्वचा रोग भी करीब 200 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। इसी तरह जिला अस्पताल, जिला अस्पताल, मंडलीय अस्पताल और शास्त्री अस्पताल के अलावा जिलेभर के सीएचसी-पीएचसी का हाल है।
विज्ञापन


जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. पीके सिंह ने बताया कि प्लास्टिक की बोतलों और इलेक्ट्रॉनिक के सामान का कचरा अक्सर सड़क किनारे जलता दिखाई देता है। यह वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। कार्बन डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों के उत्सर्जन की बात भी कही गई है। साथ ही पारे और हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों को बीमारियों के लिए जिम्मेदार माना गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे सूक्ष्म कण (पार्टिकुलेट मैटर ) वह जहरीले कण हैं, जो सांस के जरिये हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे खास तौर से फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है। यह कैंसर का कारक भी बन सकता है। वहीं खुले में कूड़ा पड़ा रहना भी वायु प्रदूषण का मुख्य कारक है। इसमें छोटे-छोटे पार्टिकल हवा में शामिल होकर हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं।
800-1000 मीट्रिक टन रोजाना निकलता है कूड़ा

शहर में रोजाना 800-1000 मीट्रिक टन कूड़ा निकल रहा है। पुराने शहर और मुख्य जगहों से कूड़ा का उठान हो रहा है मगर अभी नव विस्तारित इलाकों से समय से कूड़े का उठान नहीं हो रहा है। मंडुवाडीह, डाफी, ककरमत्ता, चितईपुर, रामनगर, डोमरी, सूजाबाद समेत अन्य इलाकों से कूड़े का उठान नहीं होता है।

वहीं शहर में जो कूड़े की गाड़ियां निकलती हैं वह ब्रेकर पर अक्सर कूड़ा गिरा देती हैं जो सड़कों पर फैला रहता है।  नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके शर्मा ने कहा कि रोजाना कूड़े का उठान हो रहा है यदि कहीं कूड़े का उठान नहीं हो रहा है तो टोल फ्री नंबर 1533 पर फोन करें।


अस्पताल ओपीडी पीड़ितों के प्रतिशत पर गौर करें तो बीएचयू 6000 मरीज आते हैं और 500 मरीजों को दिक्कत है कुल 8 प्रतिशत मरीज प्रभावित हैं। जिला अस्पताल 1400 मरीज आते हैं और 160 मरीज प्रभावित हैं 12 प्रतिशत प्रभावित हैं। मंडलीय अस्पताल 1200 मरीज आते हैं  110 मरीजों को परेशानी है संख्या 9 प्रतिशत है।


लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल 800 मरीज आते हैं 80 मरीजों को समस्या है और इनका प्रतिशत 10 है। 2000 स्वास्थ्य केंद्रों में 220 मरीज इन समस्याओं से पीड़ित हैं और कुल प्रतिशत 12 है। इसमें निजी अस्पताल में भी 3500 मरीजों की संख्या में 350 प्रभावित हैं और प्रतिशत 10 है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed