चिंता: कोरोना काल में वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया का खतरा, स्वास्थ्य विभाग के लिए संक्रामक बीमारियों से निपटना चुनौती
बरसात के मौसम में जगह-जगह जलभराव और नियमित साफ-सफाई न होने की वजह से ही मच्छर पनपने लगते हैं। इससे डेंगू, मलेरिया का खतरा रहता है।
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कोरोना काल में संक्रामक बीमारियों से निपटना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। बरसात में वायरल फीवर, डेंगू, मलेरिया सहित अन्य बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में लोगों को कोरोना संक्रमण के साथ ही अब मच्छर और जल जनित बीमारियों से बचना जरूरी है। हालांकि कोरोना की पहली लहर में डेंगू, मलेरिया के मरीजों की संख्या घटी थी, ऐसे में दूसरी लहर में भी उसी रणनीति पर काम करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
बरसात के मौसम में जगह-जगह जलभराव और नियमित साफ-सफाई न होने की वजह से ही मच्छर पनपने लगते हैं। इससे डेंगू, मलेरिया का खतरा रहता है। हालांकि पिछले चार साल के आंकड़ों पर गौर करें तो 2018-2019 में डेंगू, मलेरिया के मरीजों की तुलना में 2020-2021 में नए मरीजों की संख्या में भी कमी आई है। इसके पीछे कोरोना काल में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना है। वहीं, सेहत के प्रति अधिक सतर्कता को मुख्य वजह माना जा रहा है। आम लोगों के साथ शासन, प्रशासन की ओर से भी निगरानी की जाती रही।
वहीं, बदलते मौसम में डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों की सेहत पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। संक्रामक बीमारियों से निपटने की तैयारी में स्वास्थ्य विभाग जुट गया है। शहरी, ग्रामीण इलाकों में अभियान चलाकर डेंगू, मलेरिया, काला जार, फाइलेरिया आदि से बचाव के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह के मुताबिक मलेरिया विभाग की टीम को जिम्मेदारी दी गई है। जांच के दौरान डेंगू, मलेरिया के संभावित मरीजों का सैंपल लेकर जांच भी कराई जाएगी।
तीन साल में मरीजों का आंकड़ा
वर्ष मरीज
मलेरिया- 2018 340
2019 271
2020 46
2021 53(अब तक)
डेंगू 2018 327
2019 522
2020 4
2021 ---
फाइलेरिया 2018 13
2019 18
020 10
2021 2
कालाजार 2018 1
2019 4
2020 1
2021 -
संक्रामक बीमारियों से निपटने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एक जुलाई से संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत होगी। डेंगू, मलेरिया के कारण, बचाव के प्रति जागरूक करने के साथ ही संभावित लक्षण वालों का सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी।
-एससी पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी