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सिलिंडर का संकट : गलियों की 70 प्रतिशत प्रसिद्ध कचौड़ी की दुकानें बंद, अन्नपूर्णा मंदिर में आज हो जाएगा पीएनजी कनेक्शन

Mon, 16 Mar 2026 01:53 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 01:53 AM IST
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Cylinder crisis: 70 percent of the famous shortbread shops on the streets closed, PNG connection will be made in Annapurna temple today.
वाराणसी। गैस संकट का असर व्यवसाय पर सीधा पड़ रहा है। रविवार को कचौड़ी गली, मणिकर्णिका घाट गली, ब्रह्मनाल, ठठेरी बाजार, चौखंभा और गोलघर समेत कई इलाकों में स्थित करीब 70 प्रतिशत मिष्ठान दुकानों और कचौड़ी की दुकानों पर उत्पादन लगभग ठप पड़ गया है। वहीं अन्नपूर्णा के अन्न क्षेत्र में प्रशासन ने 20 सिलिंडर भेजे थे, जिसके बाद रविवार को वहां भक्तों ने भोजन किया। इसके अलावा मां अन्नपूर्णा मंदिर में रविवार को पीएनजी कनेक्शन के लिए टीम ने सर्वे पूरा कर लिया। सोमवार की शाम तक यहां कनेक्शन हो जाएगा और मंदिर परिसर में ही एक बड़ी रसोई शुरू कर दी जाएगी।
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रविवार को ठठेरी बाजार क्षेत्र में स्थित श्रीराम भंडार, सत्यनारायण मिष्ठान, कुबेर मिष्ठान भंडार और राम मिष्ठान भंडार पर केवल नाममात्र की मिठाइयां ही उपलब्ध थीं। वहीं सुबह-ए-बनारस की पहचान मानी जाने वाली कचौड़ी-जलेबी हलवाई की दुकानों से लगभग गायब हो चुकी हैं। ऐसे में इन प्रसिद्ध गलियों में नाश्ता करने आने वाले लोग निराश होकर लौट रहे हैं। राम मिष्ठान भंडार के संचालक कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि उनके प्रतिष्ठान में कमर्शियल गैस सिलिंडर का उपयोग होता है, लेकिन कई दिनों से सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। मजबूरी में लकड़ी का सहारा लेकर कुछ चुनिंदा मिठाइयां ही तैयार की जा रही हैं। वहीं, गोलघर क्षेत्र में कचौड़ी-जलेबी की दुकान चलाने वाले अभिषेक साव ने बताया कि गैस सिलिंडर नहीं मिलने के कारण उनकी दुकान बंद है। इसी तरह मैदागिन, गोदौलिया और लहुराबीर क्षेत्र के कई दुकानदार भी गैस संकट से जूझ रहे हैं।
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अन्नपूर्णा मंदिर में महंत शंकर पुरी ने रविवार को प्रेस वार्ता की। उन्होंने बताया कि रविवार से अन्नक्षेत्र में प्रसाद वितरण सामान्य रूप से शुरू हो गया। कहा कि उन्हें जिला प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग देने का आश्वासन मिला है। साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अन्नक्षेत्र की रसोई व्यवस्था को और अधिक सुचारु बनाने के लिए पीएनजी गैस कनेक्शन को लेकर सर्वे भी कराया गया है।
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गांव की बरातों में सिलिंडर गायब, चूल्हों पर बन रहीं रोटियां
गौरा उपरवार रोड स्थित शुक्लहिया मंदिर पर रविवार की शाम अहरक बड़ागांव से बरात पहुंची, जिसमें घराती बराती पक्ष से 250 लोगों के खाने-पीने का इंतजार चौबेपुर निवासी संजय विश्वकर्मा ने अपनी बेटी की शादी के लिए किया था। वह एक सप्ताह से गैस एजेंसी में सिलिंडर के लिए जा रहे थे, नहीं मिलने पर रविवार की सुबह भट्ठियां लगाकर भोजन तैयार कराया। चौबेपुर में बंगाली बाबू सेठ के यहां 29 सदस्यीय परिवार में गैस न मिलने से घर की बहुएं चूल्हों पर भोजन पका रही हैं। अजांव गांव निवासी मुमताज ने बताया कि 7 परिवार हैं, उनके यहां 6 दिनों से गैस नहीं है। रोजा चल रहा है, रोजा खोलने के लिए ऊपरी लकड़ी से चाय वगैरह का इंतजाम करना पड़ रहा है। अजांव गांव के ही मनोज बरनवाल ने बताया कि उनके घर में 6 सदस्य हैं। अब तक गैस मनमानी मिल जाता था इसलिए कनेक्शन नहीं लिया। टंकी चूल्हा लेकर काम चलता था। अब 8 दिनों से चूल्हों पर काम चल रहा है। ईंधन न मिलने से लोग परेशान हैं।
दुर्गाकुंड, साकेतनगर, गांधीनगर, उपेंद्रनगर, शुकुलपुरा, शक्तिनगर के हॉस्टलों में लगी भट्ठियां
वाराणसी। भेलुपुर क्षेत्र के दुर्गाकुंड, साकेतनगर, गांधीनगर, उपेंद्रनगर, शुकुलपुरा और शक्तिनगर इलाके के हॉस्टलों में गैस सिलिंडर खत्म हो गए हैं। इन क्षेत्रों में करीब 40 हजार बच्चे हॉस्टल में रहते हैं। यहां अब भट्ठियों पर खाना बनने लगा है, रोटियों की संख्या कम करके चावल बढ़ा दिया गया है।उपेंद्रनगर में हॉस्टल का संचालन करने वाले रासबिहारी सिंह ने बताया कि सिलिंडर नहीं मिल रहा है, दो भट्टियां शुरू करवा दी हैं। रविंद्रपुरी में हॉस्टल चला रहे अभय शंकर ने बताया कि अब भट्ठियों पर खाना तैयार कराया जा रहा है। इसी तरह ब्रह्मानंद नगर के सूरज अग्रवाल ने बताया कि भोजन तैयार करने के लिए दो इंडक्शन लाए गए हैं। ब्यूरो
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी बटाई पर पाथ रहे उपले
चिरईगांव। ग्रामीण क्षेत्रों में उपलों का रेट दोगुना हो गया है। वहीं उपलों की पथाई भी चार गुना हो गई है। अभी तक 200 रुपये तक सैकड़ा उपला बिक रहा था और अब 400 रुपये सैकड़ा तक पहुंच गया है। गोबर कम पड़ने की स्थिति में खेत के किनारे फेंके जाने वाले गोबर से भी उपले पाथे जा रहे हैं। जाल्हुपुर, उकथी, मुस्तफाबाद आदि गांवों में उज्ज्वला योजना के लाभार्थी पशुपालकों से बटाई पर गोबर पाथ रहे हैं। समझौते के तहत उपले तैयार होने के बाद पशुपालक और गोबर पाथने वाले के बीच आधा-आधा हिस्सा बांट लिया जाएगा। वहीं वैवाहिक और भंडारे के कार्यक्रम में मधुकापुर, सिरिस्ती में लकड़ी और गोईठा से पकवान बनाया गया। संवाद


कोयले की भट्ठी पर शुरू की चाय पकानी
कछवा रोड स्थानीय बाजार में चाय विक्रेता अलगू जायसवाल ने बताया कि गैस सिलिंडर न मिलने से कोयले की भट्ठी पर चाय बनानी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि एक सिलिंडर से चाय की दुकान 15 दिन तक चल जाती थी। 18 रुपये किलो के रेट से पांच किलो प्रतिदिन कोयले की खपत हो रही है। कछवा रोड के रेस्टोरेंट के मालिक रमेश सिंह ने बताया कि कमर्शियल सिलिंडर न मिलने से प्रतिदिन ढाई क्विंटल लकड़ी की खपत हो गई है। मिठाई दुकानदार संतोष मोदनवाल ने बताया कि गैस सिलिंडर न मिलने के कारण दुकान को चलाने के लिए अस्थायी लकड़ी की भट्ठी बनाई गई और लकड़ी से काम करते हुए मिठाई की दुकान का संचालन किया जा रहा है। प्रतिदिन 35–40 किलो लकड़ी की खपत हो रही है।

बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहा सिलिंडर
कंचनपुर के सीबी सिंह ने बताया कि 11 मार्च को बुकिंग कराई थी, लेकिन अभी तक सिलिंडर नहीं आया है। भरथरा के राजीव पांडेय ने बताया कि 15 जनवरी को उन्होंने गैस बुक कराई थी। 11 मार्च से लगातार गैस बुक कराने का प्रयास कर रहे हैं। हमेशा नेटवर्क बिजी ही बता रहा है, एजेंसी भी जवाब नहीं दे रही है।
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