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साइबर ठगी: 860 म्यूल खातों में आठ राज्यों से आए 12 करोड़, 18 गिरफ्तारी, सरगना पकड़ से दूर

Tue, 25 Aug 2026 04:22 PM IST
Pragati Chand रवि प्रकाश सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
रवि प्रकाश सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Tue, 25 Aug 2026 04:22 PM IST
सार

वाराणसी में छह महीने में 860 म्यूल खातों में आठ राज्यों से 12 करोड़ की रकम आने की बात सामने आई है। तीन महीने में म्यूल खातों से जुड़े 22 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

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Cyber Fraud ₹12 crore from eight states landed in 860 mule accounts 18 arrested in varanasi
साइबर ठगी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइबर ठगी के नेटवर्क में बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले छोटे किरदार तो पुलिस के हत्थे चढ़ रहे हैं, लेकिन करोड़ों के लेनदेन को संचालित करने वाले असली सरगना अब भी पर्दे के पीछे हैं। वाराणसी में छह महीने में 860 म्यूल खातों में आठ राज्यों से 12 करोड़ की रकम आने की बात सामने आई है। बड़ी संख्या ऐसे खाताधारकों की है, जिन्होंने कमीशन के लालच में अपने खाते साइबर ठगों को दिए। 

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तीन महीने में म्यूल खातों से जुड़े 22 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों की भूमिका मुख्य रूप से बैंक खाते उपलब्ध कराने और रकम के बदले कमीशन लेने तक सीमित थी। इन लोगों से पुलिस को लेनदेन की कड़ियां तो मिलीं, लेकिन मास्टरमाइंड तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली।
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जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर ठगी की रकम अलग-अलग खातों में भेजकर उसे कई स्तर पर ट्रांसफर किए जाते हैं, इससे रकम के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बन जाती है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल कर रही है। करोड़ों की रकम जिन लोगों के इशारे पर खातों में घूम रही थी, वे आखिर कहां हैं? पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर नेटवर्क के मुख्य संचालकों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है, लेकिन साइबर ठग पकड़ से दूर हैं।

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आठ करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन पकड़ में आया
पुलिस ने सारनाथ के कोटवां निवासी अनुराग मौर्य के खाते को खंगालना शुरू किया। उसके खिलाफ तीन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें मिली थीं। पुलिस ने दो साल के रिकॉर्ड को खंगाला तो सामने आया कि खाते से आठ करोड़ का लेनदेन हुआ है। इसके बाद साइबर सेल ने प्राथमिकी दर्ज की। ठगी के पैसों की निकासी कहां-कहां हुई, इसकी जांच अभी चल रही है।

चेतगंज, भेलूपुर व सारनाथ समेत अन्य थानों में दर्ज हुईं प्राथमिकी
साइबर ठगी के मामले में दर्ज 22 प्राथमिकी में सबसे ज्यादा मामले चेतगंज, भेलूपुर और सारनाथ में आए। इन तीन थाना क्षेत्रों में 14 लोगों को पकड़ा गया, जो घर बैठे मुनाफा कमाने के लिए अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा रहे थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। अब तक शिकायतों के आधार पर आठ राज्यों की ठगी की रकम वाराणसी के म्यूल खातों में पहुंचने की बात सामने आई है। 

मनी ट्रेल और लेयरिंग की जांच जारी, नेटवर्क की अंतिम कड़ी एटीएम से निकासी
अब तक की जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने वित्तीय धोखाधड़ी और ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए म्यूल खातों का एक छिपा नेटवर्क तैयार कर रखा है। इसमें कमीशन का लालच देकर या धोखे से भोले-भाले लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। कई मामलों में चालू खाते भी किराये पर लिए जाते हैं। साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर ठगी गई रकम सीधे अपराधियों के खाते में न जाकर पहले इन्हीं म्यूल खातों में पहुंचाई जाती है। इसके बाद रकम को तेजी से कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर उसकी ट्रेल छिपाने की कोशिश की जाती है। इसे लेयरिंग सिस्टम कहा जाता है। नेटवर्क की अंतिम कड़ी में रकम एटीएम से नकद निकाली जाती है या अन्य माध्यमों से बदल दी जाती है।
  

म्यूल खातों पर कार्रवाई जारी है। संदिग्ध लेन-देन की जांच के लिए बैंकों से भी मदद ली जा रही है। एनसीआरपी पर दर्ज मामलों की जांच साइबर सेल की टीम कर रही है। कई खाते अभी भी जांच के दायरे में हैं। -विनय द्विवेदी, सहायक पुलिस आयुक्त, साइबर

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