UP Crime: साइबर क्राइम पुलिस करेगी नेटवर्किंग से 2000 बेरोजगारों से ठगी की जांच, आजमगढ़ में टीम ने डाला डेरा
Varanasi News: 2000 बेरोजगारों से चार करोड़ की ठगी की जांच साइबर क्राइम पुलिस करेगी। ठगी के मुख्य आरोपी इंद्रजीत कुमार पर भी शिकंजा कसा जा रहा है।
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मल्टीलेवल मार्केटिंग नेटवर्किंग के जरिये बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के 2000 बेरोजगारों से चार करोड़ की ठगी मामले की जांच साइबर क्राइम थाने को सौंपी गई है। आईटी एक्ट समेत अन्य पहलुओं की जांच साइबर क्राइम कर रही है। आजमगढ़ के मेंहनगर निवासी मुख्य आरोपी इंद्रजीत कुमार पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। परिजनों और करीबियों के बैंक खातों समेत अन्य संपत्तियों का ब्योरा भी पुलिस खंगाल रही है।
इंद्रजीत की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की एक टीम ने आजमगढ़ में डेरा डाल रखा है। एसीपी साइबर व सारनाथ विदुष सक्सेना ने बताया कि आरोपी इंद्रजीत कुमार के अलावा अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारियां जुटाई जा रही हैं। साइबर विशेषज्ञ के जरिये खंगाला जा रहा है कि किन-किन जिलों में इंद्रजीत का नेटवर्क था।
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बिहार, झारखंड और एमपी के बेरोजगारों को प्रलोभन और अधिक कमाई का लालच देकर 20 से 30 हजार रुपये लिए जाते थे और एक घंटे के प्रशिक्षण में उन्हें हेल्थ उत्पाद घर-घर बिक्री करने का दबाव बनाते थे। खास बात कि बेरोजगारों पर यह भी दबाव था कि अधिक से अधिक सदस्यों को कंपनी में ज्वाइन भी कराएं। बिहार-झारखंड, एमपी का होने के कारण वह शिकायत दर्ज नहीं करा पाते थे। सभी से नकदी ली जाती थी। पकड़े जाने के डर से ही बैंक में पैसा नहीं लिया जाता था।
20 मई को सारनाथ थाना क्षेत्र के दो जगहों पर पुलिस ने दबिश देकर मल्टीलेवल मार्केटिंग नेटवर्किंग का भंड़ाफोड़ किया था। 250 युवाओं को रेस्क्यू कर टीम ने बाहर निकाला था। कंपनी में काम करने वाले छह आरोपियों को सारनाथ थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने गिरफ्तार किया था। कंपनी का मुख्य संचालक आजमगढ़ निवासी इंद्रजीत कुमार है।
बीमा और म्यूचुअल फंड में निवेश का लालच देकर 35 लाख रुपये की साइबर ठगी
लंका थाना क्षेत्र के सामने घाट निवासी शिक्षक गोपेश पांडेय के साथ 35 लाख रुपये की साइबर ठगी हो गई। जालसाजों ने बीमा और म्यूचुअल फंड में निवेश का लालच देकर 35 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत के साथ ही साइबर सेल और बैंक को भी सूचना दी।
गोपेश पांडेय रामनगर के एक राजकीय विद्यालय में शिक्षक हैं। बताया कि 2023 में एचडीएफसी लाइफ में 14 लाख रुपये का बीमा और म्यूचुअल फंड में निवेश किया था। फरवरी 2026 में उनके पास एक फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को कंपनी से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनकी किश्त जमा नहीं हुई है। जालसाज ने भरोसा दिलाया कि बकाया रकम जमा कर दी जाए तो पहले से जमा पूरी राशि और लाभ वापस मिल जाएगा।
फोन करने वाले ने बीमा और निवेश से जुड़ी पूरी जानकारी बताई, जिससे गोपेश को उस पर विश्वास हो गया। 24 फरवरी से 20 मई के बीच अलग-अलग कंपनियों के नाम पर उनसे कई किश्तों में 35 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। आरोपी ने लालच दिया कि पिछली रकम जोड़कर 90 लाख रुपये मिलेंगे।
गोपेश ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी, जो स्वयं शिक्षिका हैं, की जमा पूंजी भी निवेश के नाम पर ट्रांसफर कर दी। बाद में जब जालसाज ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब ठगी का एहसास हुआ। पूरा परिवार तनाव में है। थाना प्रभारी राजकुमार पांडेय ने बताया कि मामले की जांच साइबर सेल और पुलिस कर रही है।