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आंवले के पेड़ की पूजा से प्रसन्न होते हैं त्रिदेव

Mon, 23 Nov 2020 01:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Nov 2020 01:14 AM IST
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cultural news in varanasi
अक्षय पुण्य देने वाला आंवला नवमी का व्रत 23 नवंबर को किया जाएगा। कार्तिक महीने में स्नान का महत्व है, लेकिन अक्षय नवमी पर पवित्र नदियों में स्नान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आज के दिन आंवले के पेड़ के नीचे खाना बनाने और खाने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं।
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ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि पद्मपुराण के मुताबिक आंवला साक्षात विष्णु का ही स्वरूप है। यह विष्णु प्रिय है। इस पेड़ को याद कर के मन ही मन प्रणाम करने भर से ही गोदान के बराबर फल मिलता है। इसे छूने से दोगुना और प्रसाद स्वरूप इसका फल खाने से तीन गुना फल मिलता है। ग्रंथों में ये भी कहा गया है कि इसके मूल में भगवान विष्णु, ऊपर ब्रह्मा, स्कंद में रुद्र, शाखाओं में मुनिगण, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुदगण और फलों में प्रजापति का वास होता है। इसलिए ग्रंथों में आंवले को सर्वदेवयी कहा गया है।
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पूजन विधि
महिलाओं को इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके आंवले के पेड़ के पास जाना चाहिए और उसके आस-पास सफाई करके पेड़ की जड़ में साफ पानी चढ़ाना चाहिए। इसके बाद पेड़ की जड़ में दूध चढ़ाना चाहिए। चढ़ाया हुआ थोड़ा दूध और व मिट्टी सिर पर लगानी चाहिए। पूजन सामग्री से पेड़ की पूजा करें और उसके तने पर कच्चा सूत या मौली 8 परिक्रमा करते हुए लपेटें। कहीं-कहीं 108 परिक्रमा भी की जाती है। पूजन के बाद परिवार और संतान की सुख-समृद्धि की कामना करके पेड़ के नीचे बैठकर परिवार व मित्रों के साथ भोजन ग्रहण करना चाहिए।
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ये है मान्यता
इस दिन महर्षि च्यवन ने आंवले का सेवन किया था। जिससे उन्हें फिर से यौवन मिला था। इसलिए इस दिन आंवला खाना चाहिए।
कार्तिक शुक्लपक्ष की नवमी पर आंवले के पेड़ की परिक्रमा करने पर बीमारियों और पापों से छुटकारा मिलता है।
इस दिन भगवान विष्णु का वास आंवले में होता है। इसलिए इस पेड़ की पूजा से समृद्धि बढ़ती है और दरिद्रता नहीं आती।
अक्षय नवमी पर मां लक्ष्मी ने पृथ्वी लोक में भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा आंवले के रूप में की थी और इसी पेड़ के नीचे बैठकर भोजन ग्रहण किया था।
इसी दिन भगवान कृष्ण ने कंस वध से पहले तीन वनों की परिक्रमा की थी। इस वजह से अक्षय नवमी पर लाखों भक्त मथुरा-वृदांवन की परिक्रमा भी करते हैं।
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