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सावन की तरह रही भीड़, छह घंटे बाद मिले बाबा विश्वनाथ के दर्शन
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श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद पहले रविवार को भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। दोनों प्रवेश द्वार पर श्रद्धालुओं की कतार इतनी लंबी थी कि गोदौलिया से बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह तक पहुंचने में भक्तों को छह घंटे का समय लग गया। भीड़ का आलम ऐसा था कि सुगम दर्शन के लिए 300 रुपये का टिकट लेने वालों को भी लंबी कतार लगानी पड़ी। वीआईपी को भी दर्शन के लिए कतारबद्ध होना पड़ा।
मार्गशीर्ष की पूर्णिमा पर बाबा के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ ने सावन की भीड़ का अहसास करा दिया। मंगला आरती के बाद से शुरू हुआ दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा और देर रात तक डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा दरबार में दर्शन किए। श्रद्धालुओं की कतार एक तरफ गोदौलिया तो दूसरी तरफ चौक थाने से आगे को छू रही थी।
मध्यप्रदेश के सुरेश कुमार और तमिलनाडु से आए वी रामचंद्रन ने बताया कि वह सुबह 11:30 बजे से गोदौलिया पर लाइन में लगे थे और शाम को 5:30 बजे उनको बाबा का दर्शन मिला। कतार में लगे श्रद्धालुओं के लिए इंतजाम नहीं होने से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी। मुख्य द्वार पर ही पानी का इंतजाम होने के कारण अंदर कतारबद्ध श्रद्धालु पानी के लिए परेशान हुए। मंदिर क्षेत्र में यूरिनल की शुरुआत नहीं होने के कारण महिला श्रद्धालुओं को ज्यादा दिक्कत हुई।
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सुगम दर्शन के लिए तीन सौ रुपये का टिकट कटाने वालों की कतार हेल्पडेस्क से लेकर मंदिर के गर्भगृह तक रही। दबाव इतना ज्यादा बढ़ गया कि कुछ देर के लिए हेल्पडेस्क को बंद भी करना पड़ा। सुगम दर्शन वालों की कतार बांसफाटक फूलमंडी तक लगी रही।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बाबा दरबार में टेका मत्था
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी रविवार की शाम को बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंची। बाबा का षोडषोपचार पूजन करने के बाद उन्होंने नवनिर्मित धाम को भी देखा। केंद्रीय मंत्री ने धाम की भव्यता को सराहा और इसे काशी के विकास में मील का पत्थर भी बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की विकासवादी सोच का असर काशी में नजर आ रहा है। इससे पहले उन्होंने बाबा कालभैरव के दर पर शीश नवाया।
बाबा बर्फानी को त्रिशूल समर्पित करने निकले महेश
मध्यप्रदेश के रतलाम के निवासी महेश प्रजापति द्वादश ज्योतिर्लिंग की यात्रा पर निकले हैं। रविवार को हाथों में डमरू, त्रिशूल और सर्प की आकृति लेकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंचे। हाथों में भव्य त्रिशूल लिए महेश ने बाबा दर्शन करने के बाद बाबा का शिखर देखकर नमन किया और बाबा का धाम भी देखा। अंत में बाबा बर्फानी अमरनाथ का दर्शन करेंगे और इस त्रिशूल को समर्पित करेंगे।
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मार्गशीर्ष की पूर्णिमा पर बाबा के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ ने सावन की भीड़ का अहसास करा दिया। मंगला आरती के बाद से शुरू हुआ दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा और देर रात तक डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा दरबार में दर्शन किए। श्रद्धालुओं की कतार एक तरफ गोदौलिया तो दूसरी तरफ चौक थाने से आगे को छू रही थी।
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मध्यप्रदेश के सुरेश कुमार और तमिलनाडु से आए वी रामचंद्रन ने बताया कि वह सुबह 11:30 बजे से गोदौलिया पर लाइन में लगे थे और शाम को 5:30 बजे उनको बाबा का दर्शन मिला। कतार में लगे श्रद्धालुओं के लिए इंतजाम नहीं होने से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी। मुख्य द्वार पर ही पानी का इंतजाम होने के कारण अंदर कतारबद्ध श्रद्धालु पानी के लिए परेशान हुए। मंदिर क्षेत्र में यूरिनल की शुरुआत नहीं होने के कारण महिला श्रद्धालुओं को ज्यादा दिक्कत हुई।
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सुगम दर्शन के लिए तीन सौ रुपये का टिकट कटाने वालों की कतार हेल्पडेस्क से लेकर मंदिर के गर्भगृह तक रही। दबाव इतना ज्यादा बढ़ गया कि कुछ देर के लिए हेल्पडेस्क को बंद भी करना पड़ा। सुगम दर्शन वालों की कतार बांसफाटक फूलमंडी तक लगी रही।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बाबा दरबार में टेका मत्था
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी रविवार की शाम को बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंची। बाबा का षोडषोपचार पूजन करने के बाद उन्होंने नवनिर्मित धाम को भी देखा। केंद्रीय मंत्री ने धाम की भव्यता को सराहा और इसे काशी के विकास में मील का पत्थर भी बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की विकासवादी सोच का असर काशी में नजर आ रहा है। इससे पहले उन्होंने बाबा कालभैरव के दर पर शीश नवाया।
बाबा बर्फानी को त्रिशूल समर्पित करने निकले महेश
मध्यप्रदेश के रतलाम के निवासी महेश प्रजापति द्वादश ज्योतिर्लिंग की यात्रा पर निकले हैं। रविवार को हाथों में डमरू, त्रिशूल और सर्प की आकृति लेकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंचे। हाथों में भव्य त्रिशूल लिए महेश ने बाबा दर्शन करने के बाद बाबा का शिखर देखकर नमन किया और बाबा का धाम भी देखा। अंत में बाबा बर्फानी अमरनाथ का दर्शन करेंगे और इस त्रिशूल को समर्पित करेंगे।