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करोड़ों खर्च फिर भी जलभराव से नहीं मिली निजात

Tue, 08 Jun 2021 01:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jun 2021 01:36 AM IST
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Crores spent, still no relief from waterlogging
शहर में जलभराव की समस्या को देखते हुए सीवेज के साथ ड्रेनेज का काम भी साथ-साथ शुरू हुआ। इस पर काफी खर्च भी हुआ। मगर, बारिश होने पर जलभराव से आज भी शहर जूझ रहा है। जल निकासी के लिए 2009 में बसपा सरकार ने स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम की योजना बनाई। 253 करोड़ रुपये की इस योजना में शहर भर में करीब 76 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई गई। जल निकासी की यह योजना 2015 में पूरी तो हो गई है, लेकिन कारगर नहीं हुई।
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उस समय सपा सरकार में सीवेज, पेयजल व स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम निर्माण में कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से खूब धांधली की गई। योजना पूर्ण हुए छह वर्ष हो गए, लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाया। ड्रेनेज सिस्टम के लिए जगह-जगह बनाए गए पिट और जालियों को लोक निर्माण विभाग व नगर निगम द्वारा सड़क बनाने के दौरान पाट दिया गया है। जिससे स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह क्रियाशील नहीं हो सका। बंद जालियों व पिट को खुलवाने के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई द्वारा तीन करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है। इसके अलावा ज्यादातर जल निकासी पुराने नालों से हो रही है। नगवां-अस्सी नाला, नरोखर नाला, अकथा नाला, सिकरौल नाला, बघवा नाला मुख्य प्राकृतिक नाले हैं। शाही नाले के अलावा एक दशक पूर्व बना 76 किमी का स्टार्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम है। 200 वर्ष पूर्व जब शाही नाले के रूप में पहला ड्रेनेज बना था तो शहर की आबादी 1.80 लाख थी और क्षेत्रफल 30 वर्ग किमी था।
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ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने के लिए डीपीआर भेजी गई है। इसके अलावा शाही नाले का भी काम चल रहा है। सारा काम पूरा होने के बाद शहर में जलभराव की समस्या नहीं होगी। दिसंबर तक यह काम पूरा होना है।-एके पुरवार, मुख्य अभियंता, जल निगम
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दशाश्वमेध के नाले की जानकारी जल निगम के पास नहीं
दशाश्वमेध पर हाइड्रोलिक गेट बनाने के लिए हुई खुदाई के दौरान एक बड़ा नाला सामने आया। पूरी तरह सूखे नाले के बारे में जल निगम के अधिकारियों को भी कुछ नहीं पता है। अधिकारियों को न तो इस नाले के भूगोल के बारे में जानकारी है और न ही इसका इतिहास पता है। आसपास के लोग इसे शाही नाला का ही हिस्सा मानते हैं।

जलभराव के इलाके
शिवपुरवा का हनुमान मंदिर मैदान, शायरी माता मंदिर, जेपी नगर मलिन बस्ती, निराला नगर लेन नंबर तीन। सरैया पोखरी, सरैया फकीरिया टोला, कोनिया धोबीघाट, जलालीपुरा, अमरोहिया, सरैया मुस्लिम बस्ती, कोनिया मोहन कटरा, अमरपुर मढहिया, सरैया निगोरिया, रमरेपुर, मवईया यादव बस्ती, शेखनगर बैरीवन और पांडेयपुर बड़ी गैबी, जक्खा, मोतीझील, सीस नगवा, चपरहिया पोखरी, मकदूम बाबा, देव पोखरी, अम्बा पोखरी, अहमदनगर, जक्खा कब्रिस्तान, आकाशवाणी मोड़ आदि।
एक नजर में आंकड़े
-शहर की आबादी : 2081639
-शहर का क्षेत्रफल : 112.26 वर्ग किमी
-शहर में वार्ड : 90
-शहर में मुहल्ले : 434
-शहर में आवास : 192786
- शहर में शामिल गांव : 89
-छोटे व बड़े कुल 76 नाले
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