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करोड़ों रुपये बहे, फिर भी बेहाल है बनारस

Sat, 25 Mar 2017 05:36 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 25 Mar 2017 05:36 PM IST
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Crores of rupees spend, yet Varanasi not developed
रीवा घाट पर आज से घाट संध्या का आयोजन - फोटो : फाइल फोटो

शहर के बुनियादी विकास एवं सफाई व्यवस्था के लिए केंद्र से संचालित योजनाएं करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी अधर में हैं। डेढ़ साल पहले धरोहरों और कुंडों के संरक्षण के लिए 80 करोड़ की हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड आग्मेंटेशन योजना (हृदय) शुरू हुई लेकिन अब तक इसका एक भी काम पूरा नहीं हो पाया।

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वजह, जिम्मेदारों की बेपरवाही और काम में देरी। हालांकि जिम्मेदारों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के चलते काम प्रभावित हुआ था। अब तेजी लाई जाएगी।

जबकि, हकीकत यह है कि जो योजनाएं चुनाव की अधिसूचना के पहले से संचालित हैं, उनका भी कोई पुरसाहाल नहीं है। ये योजनाएं पूरी हुई होतीं तो अब तक शहर की तस्वीर काफी कुछ बदल गई होती लेकिन जनता पस्त है और शहर बेहाल।
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‘हृदय’ से नहीं कराया काम

हृदय योजना के तहत शहर में 34 सड़कों का निर्माण कराया जाना है। इसकी शुरुआत डेढ़ साल पहले हुई। दिसंबर 2016 तक ये सड़कें बन जानी चाहिए थीं लेकिन अब तक किसी एक सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।

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इनमें 10 सड़कें नगर निगम को और 24 सड़कें केंद्रीय एजेंसी एनबीसीसी को बनानी हैं। न नगर निगम ने गंभीरता दिखाई न केंद्रीय एजेंसी ने। इन सड़कों के निर्माण पर 80 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।

बनारस के कुंडों को संवारने में सुस्ती

Crores of rupees spend, yet Varanasi not developed
Varanasi temple - फोटो : अमर उजाला

हृदय योजना से ऐतिहासिक-धार्मिक महत्व के चार कुंडों दुर्गा कुंड, लक्ष्मी कुंड, लाटभैरव कुंड और मछोदरी कुंड को संवारने का काम शुरू हुआ। दिसंबर 2016 से पहले ही इसे भी पूरा कराने के दावे किए गए थे लेकिन अब तक एक भी कुंड संवर नहीं पाया।

 

काम अधर में है। इसकी बड़ी वजह, कार्यदायी संस्था और नगर निगम अधिकारियों की उदासीनता है। फरवरी के पहले हफ्ते में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रवीण प्रकाश ने भी काम की धीमी गति पर नाराजगी जताई थी लेकिन उसका भी असर नहीं हुआ।

प्लास्टिक रिसाइकिलिंग सेंटर : अभी टेंडर तक नहीं

शहर को ‘प्लास्टिक मुक्त’ करने की योजना अब तक कागज पर है। तैयारी थी कि प्लास्टिक वेस्ट से सड़कें बनाई जाएंगी। इसके लिए प्लास्टिक रिसाइकिलिंग सेंटर खोला जाना था। भेलूपुर में जगह भी चिह्नित कर ली गई लेकिन उसके बाद से पूरी योजना ठंडे बस्ते में है। 10 लाख रुपये की लागत वाले रिसाइकिलिंग सेंटर के लिए टेंडर बीते साल दिसंबर में ही कराया जाना था लेकिन अब तक कहीं कोई प्रगति नहीं हुई।

मल्टीलेवल पार्किंग: अभी फाइलों में ही

शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम और पार्किंग है। पार्किंग को व्यवस्थित कर जाम से निजात दिलाने के लिए 150 करोड़ से अधिक की योजना तो बना ली गई लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ। टाउनहाल, तांगा स्टैंड, मछोदरी स्कूल, कंपनी गार्डेन, सेनपुरा, जूता मार्केट लहुराबीर और नगर निगम के पास मल्टीलेवल पार्किंग बनवाई जानी है लेकिन यह काम कब तक हो पाएगा, फिलहाल नगर निगम के अधिकारी भी नहीं जानते। जबकि, यह काम पिछले साल ही पूरा करा लिया जाना था।

Crores of rupees spend, yet Varanasi not developed
दशाश्वमेध घाट

स्ट्रीट लाइट : ठेका हुआ, काम नहीं

शहर में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए ईईएसएल कंपनी को ठेका दिया गया। गलियों, सड़कों से घाटों तक 40 हजार लाइटें लगाई जानी हैं। जून 2016 तक यह काम पूरा हो जाना था लेकिन अब तक आधा भी नहीं हो पाया है। धरोहरों के संरक्षण की योजनाएं भी मूर्तरूप नहीं ले पाई हैं। टाउनहाल और भारतमाता मंदिर की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम अब तक अधर में है।

 

हेरिटेज वॉक: उद्घाटन के बाद गुम

गंगा किनारे के सुरम्य वातावरण में काशी के कलाकारों और उनकी कलाओं से देसी-विदेशी सैलानियों को रूबरू कराने के लिए हेरिटेज वॉक की योजना बनी, उद्घाटन भी हो गया लेकिन उसके बाद से सब कुछ ठप है। अब तक न यह योजना मूर्तरूप ले पाई और न ही जिम्मेदारों को इसे लेकर कोई खास परवाह है।

जबकि, पर्यटन के लिहाज से इस योजना को महत्वपूर्ण माना जाता है। हृदय के तहत दस करोड़ की लागत से इसे मूर्तरूप दिया जाना है लेकिन काम कब शुरू होगा और फिर कब तक पूरा होगा, अभी कुछ भी तय नहीं।

 

‘अमृत’: कब खत्म होगा इंतजार

ट्रांस वरुणा में सीवेज समस्या से परेशान नागरिकों के लिए अटल मिशन फार रिजूवनेशन एंड अरबन ट्रांसफारमेशन (अमृत) योजना लागू हुई। इसके तहत तकरीबन 50 हजार घरों के सीवर कनेक्शन ब्रांच लाइनों में जोड़े जाने है और उन ब्रांच लाइनों को मुख्य पाइप लाइन से कनेक्ट किया जाना है। अब तक यह काम शुरू हो जाना चाहिए था। 166 में से 115 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त हो चुकी है लेकिन कार्यदायी संस्था जल निगम को कोई जल्दी नहीं। जनता परेशान है।

 

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