'धांय-धांय गोली मरलन...': इस महिला के सामने हुई थी कॉलोनाइजर की हत्या, पांच फीट दूर खड़ी थी; बताई आंखों देखी
Varanasi News: वाराणसी में कॉलोनाइजर की हत्या जिस वक्त हुई उससे चंद कदम की दूरी पर एक महिला अपने खेत से फूल लेकर जा रही थी। इसी दाैरान बदमाश भी पीछा करते हुए पहुंच गए और महेंद्र को गोली मार दी।
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Varanasi News: हम फूल लेके खेते से अपने घरे जात रहली। उधर से महेंदर भइया भी आवत रहलन। उ अकेले रहलन। ओनकरे पीछे पलसर बाइक से तीन जने आउर आवत रहलन। डिवाइर के लग्गे जइसे ही महेंदर भइया गाड़ी धीमा कइलन, ओसही तीन गोली धांय-धांय चलल। हम पीछे मुड़के देखली त महेंदर भइया गिर गयल रहलन। ओनकरे माथे से खून गिरत रहल।
उ तीनों मिला आपन बंदूक हिलावत के बाइपास के तरफ भाग गइलन। हम चिल्ला-चिल्ला के सबके बुलवली। बगलिए में एक जने आउर रहलन उ तुरंते महेंदर भइया के परिचित लोगन के फोन करे लगलन। भइया बहुत मिलनसार रहलन। सबसे बतीयावे.... यह कहना है गीता का, जो सारनाथ थाना क्षेत्र के अरिहंत नगर कॉलोनी के पास रहती हैं। उसी कॉलोनी में उनका खेत है।
जब कॉलोनी में गुरुवार की सुबह करोड़पति कॉलोनाइजर की गोली मारकर हत्या की गई, तो वह मौके पर ही थी। बाएं साइड से महेंद्र गौतम अपने ऑफिस जा रहे थे और दाएं साइड से गीता अपने घर जा रही थी। महेंद्र और गीता के बीच मात्र सात से आठ फीट का फासला रहा होगा।
उन्होंने बताया कि बदमाशों ने मात्र दो फीट की दूरी से महेंद्र गौतम को गोली मारी। महेंद्र घायल होकर अपने बाएं साइड लगी एक बरामदे की जाली पर गिर गए। ये वही मकान है जहां लगे सीसीटीवी कैमरे में यह पूरा खूनी मामला रिकॉर्ड हो गया।
अमूमन शांत रहने वाली इस कॉलोनी में पहली बार गोली चलने की घटना से लोग भयभीत हो गए। जब महेंद्र के ऊपर गोली चली तो यहां सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। घटना सारनाथ थाना क्षेत्र से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर इस घटना को अंजाम दिया गया।
इसकी सूचना मिलने के तकरीबन आधे घंटे पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। गीता सहित आसपास के लोगों से जानकारी लेने के बाद महेंद्र गौतम के शव को कब्जे में ले लिया गया। उनकी पत्नी गुड़िया उर्फ प्रियंका गौतम, पुत्र नलिन (17), बेटी रिद्धिमा (13) और रिम्मी (8) सहित महेंद्र के पिता श्यामनाथ राम भी मौके पर पहुंच गए। श्यामनाथ आरटीओ से रिटायर्ड हैं।
मिलनसार व्यक्तित्व वाले थे महेंद्र
पास-पड़ोस के लोगों ने बताया कि महेंद्र गौतम बहुत ही व्यावहारिक शख्सियत थे। उनका किसी से भी विवाद नहीं था। बल्कि कोई समस्या होने पर वे सभी पक्षों को एक साथ बिठाकर बातचीत करवाकर विवाद को खत्म करवा दिया करते थे।
महेंद्र गौतम एनपीआर रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से अपना फर्म भी चलाते थे, जिसमें कुल आठ कर्मचारी काम करते थे। सबसे पुराने प्रेमनाथ यादव हैं। वे कुछ बताने से पहले फफक पड़े। अपने आंसू पोछते हुए वे बोले- उम्र में छोटे महेंद्र सिर्फ मुझे ही भइया कहते थे। गांव में उनका इतना सम्मान था कि हर कोई उन्हें भइया कहता था।
वे बताते हैं कि घटना के दिन यानी गुरुवार को हम लोग घर वाली ऑफिस पर ही थे। हमें गांव के ही एक शख्स से फोन कर गोली चलने की सूचना दी तो सभी लोग मौके से पहुंच गए।