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वरुणा का दर्द : डीएम आवास के पीछे कटते रहे हरे पेड़, आंखें मूंदे रहा वन विभाग

Sun, 04 Jun 2017 12:55 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 04 Jun 2017 12:55 PM IST
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Varuna river pain Green trees cutting behind DM housing, no action
वरुणा नदी के किनारे काटा गया पेड़ - फोटो : अमर उजाला

वृक्ष धरती का शृंगार होते हैं। अगर वृक्ष न हों, हरियाली न हो तो धरती की कोख सूनी हो जाएगी। धरती पर हरियाली बनी रहे इसकी जिम्मेदारी वन विभाग की है पर वरुणा की हरीतिमा उजड़ गई और जिला वन अधिकारी को आज भी इस बात का इंतजार है कि कोई उनके पास आकर शिकायत करे तो वे कुछ करें।

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आम तौर पर किसी गरीब-मजलूम को एक पेड़ काटने की अनुमति देने में पसीने छुड़ा देने वाला वन विभाग भी वरुणा के गुनहगारों में से एक है। इस इलाके की हरीतिमा नष्ट कर होटल बनाने की तैयारियां मुकम्मल हो गईं और विभाग के जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे शिकायत मिलने का इंतजार करते रहे।

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भीमनगर में डीएम आवास के ठीक पीछे वरुणा नदी किनारे सैकड़ों हरे पेड़ कट गए लेकिन इसकी जानकारी वन विभाग को आज तक नहीं है। वहीं दूसरे किनारे पर आज भी हरीतिमा बरकरार है। यहां पेड़ काटने के साथ ही मिट्टी डालकर गड्ढे पाटने का काम एक साल से चल रहा था।

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स्थानीय लोगों ने पेड़ कटने की शिकायत भी की लेकिन रौब-रुआब के आगे उनकी भला सुनता कौन? लोगों का कहना है कि बिना सारे विभागों की मिलीभगत के एक जीती-जागती नदी का गला घोंटने की साजिश को अंजाम ही नहीं दिया जा सकता था।

 

जिला वन अधिकारी मूलचंद का कहना है कि भीमनगर के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक तकरीबन एक साल पहले तक यहां घनी वृक्षावली थी। इनमें आम, नीम, बेल, पाकड़, बबूल, महुआ आदि के सैकड़ों पेड़ थे।

 

गरमी के दिनों में यहां लोग सुकू न के कुछ पल बिताते थे। बाद में कुछ लोग इसे अपनी जमीन बताकर नदी किनारे के गड्ढे पाटने लगे। कुछ दिनों बाद यहां पेड़ काटने का सिलसिला शुरू हो गया। पेड़ काटने के बाद बची ठूंठ पर भी मिट्टी डाल दी गई।

अवैध निर्माणों पर कार्रवाई से बच रहा वीडीए

Varuna river pain Green trees cutting behind DM housing, no action
वरुणा में गिरने वाले नाले को पाटकर बनाया गया घर - फोटो : अमर उजाला

अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का ढिंढोरा पीटने वाला वीडीए वरुणा के डूब क्षेत्र पर कब्जा करने वालों पर कार्रवाई से बच रहा है। यही कारण है कि बीते एक साल से अवैध निर्माण कराने वालों 893 को नोटिस तो दिया लेकिन एक भी अवैध निर्माण ढहाया नहीं गया।

 

अवैध निर्माण कराने वालों में कई जनप्रतिनिधि, डॉक्टर, इंजीनियर, होटल कारोबारी, बिल्डर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालक हैं जिन पर हाथ डालने से वीडीए बच रहा है। जानकारों की मानें तो नदी के डूब क्षेत्र पर एक ही दिन में अवैध निर्माण नहीं हुआ है।

 

बगैर वीडीए और नगर निगम की मिलीभगत के निर्माण कराना असंभव था। किसी मकान में एक ईंट जोड़ी जाती है तो वहां वीडीए के लोग पहुंच जाते हैं। यहां इतनी ऊंची अट्टालिकाएं तन गईं और विभाग को भनक तक न लगी, यह आश्चर्यजनक है। जिन अधिकारियों को निगहबानी की जिम्मेदारी दी गई है उन्होंने ही आंखें मूंद ली हैं।

 

वीडीए के उपाध्यक्ष पुलकित खरे ने कहा कि वरुणा नदी किनारे अवैध कब्जे जल्द हटाए जाएंगे। इससे पहले गंगा के अस्सी घाट से अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाने की कार्ययोजना बनाई गई है। जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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